UP News: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य को भारत का अग्रणी स्टार्टअप गंतव्य बनाने के उद्देश्य से रविवार को एक उच्चस्तरीय बैठक की। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को ‘उत्तर प्रदेश स्टार्टअप नीति-2026’ का मसौदा तैयार करने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं। उनका मानना है कि प्रदेश की विशाल युवा शक्ति, तेजी से बढ़ता डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और निवेशकों के लिए अनुकूल वातावरण उत्तर प्रदेश को नवाचार-आधारित अर्थव्यवस्था का राष्ट्रीय केंद्र बनाने में सक्षम है। योगी आदित्यनाथ के अनुसार, नई नीति का मूल मंत्र युवाओं को नौकरी मांगने वाला नहीं, बल्कि नौकरी देने वाला (जॉब क्रिएटर) बनाना है।
स्टार्टअप इकोसिस्टम की उल्लेखनीय प्रगति
बैठक के दौरान सूचना प्रौद्योगिकी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग के प्रमुख सचिव ने प्रदेश की उपलब्धियों का विवरण साझा किया। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश ने स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने में अभूतपूर्व प्रगति की है। वर्ष 2018 में जो प्रदेश केवल ‘एस्पायरिंग लीडर’ श्रेणी में था, वह 2025 तक भारत सरकार की स्टार्टअप रैंकिंग में ‘टॉप परफॉर्मर’ के स्तर पर पहुँच चुका है। यह विकास दर्शाता है कि राज्य में उद्यमिता के प्रति एक सकारात्मक और मजबूत इकोसिस्टम तैयार हुआ है, जिसे अब नई नीति के माध्यम से नई ऊंचाइयों पर ले जाना है।
प्रोटोटाइप अनुदान और सीड कैपिटल में बढ़ोतरी
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य के स्टार्टअप्स को प्रारंभिक विचार (आइडिया) चरण से लेकर वैश्विक बाजार में विस्तार तक हर स्तर पर सरकार का पूरा सहयोग मिलना चाहिए। उन्होंने निर्देश दिए कि नई स्टार्टअप नीति में भरण-पोषण भत्ता, प्रोटोटाइप अनुदान, और सीड कैपिटल सहायता जैसे प्रोत्साहनों को अधिक प्रभावी बनाया जाए। साथ ही, स्टार्टअप्स के लिए पेटेंट फाइलिंग और गुणवत्ता प्रमाणन (क्वालिटी सर्टिफिकेशन) की प्रक्रिया को सरल और प्रोत्साहन-आधारित बनाने पर जोर दिया गया है, ताकि प्रदेश में नवाचार को बल मिल सके।
महिला उद्यमी, दिव्यांगजन और पिछड़े क्षेत्रों को विशेष प्राथमिकता
योगी आदित्यनाथ ने स्टार्टअप नीति को समावेशी बनाने पर विशेष ध्यान केंद्रित किया है। उन्होंने निर्देश दिए कि नई नीति में महिला उद्यमियों, आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों, दिव्यांगजनों और ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए विशेष प्रावधान किए जाएं। इसके अलावा, राज्य के विकास में क्षेत्रीय असंतुलन को दूर करने के लिए पूर्वांचल और बुंदेलखंड जैसे क्षेत्रों में स्थापित होने वाले स्टार्टअप्स को विशेष अतिरिक्त प्रोत्साहन देने का निर्णय लिया गया है। इस दूरदर्शी दृष्टिकोण से राज्य के कोने-कोने में उद्यमिता की लहर पैदा करने का लक्ष्य रखा गया है।
स्टार्टअप और नवाचार का राष्ट्रीय केंद्र बनेगा यूपी
अंत में, मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि आगामी नीति-2026 में ऐसी व्यवस्था की जाए जो वैश्विक प्रतिस्पर्धा में यूपी के स्टार्टअप्स को आगे रखे। उत्तर प्रदेश को नवाचार और उद्यमशीलता का ग्लोबल हब बनाने के लिए सरकार तकनीकी संस्थानों और निजी क्षेत्र के साथ मिलकर काम करने के लिए प्रतिबद्ध है। यह नीति न केवल राज्य की जीडीपी (GDP) में योगदान देगी, बल्कि आने वाले वर्षों में उत्तर प्रदेश को तकनीक और रोजगार के क्षेत्र में देश का नेतृत्व करने वाला राज्य बनाएगी।










