UP School Summer Vacation : उत्तर प्रदेश के सरकारी और निजी स्कूलों में पढ़ने वाले लाखों छात्र-छात्राओं और उनके अभिभावकों के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण और बड़ी खबर सामने आ रही है। राज्य में लगातार बढ़ रहे पारे, भीषण गर्मी के प्रकोप और थपेड़ों की तरह चल रही खतरनाक लू (हीटवेव) को ध्यान में रखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने एक बड़ा संवेदनशील फैसला लिया है। सरकार के बेसिक शिक्षा परिषद ने प्राथमिक (प्राइमरी) और उच्च प्राथमिक (जूनियर हाईस्कूल) विद्यालयों की ग्रीष्मकालीन छुट्टियों (समर वेकेशन) की तय अवधि को आगे बढ़ाने का आदेश जारी किया है, ताकि इस जानलेवा मौसम में बच्चों की सेहत और शारीरिक स्वास्थ्य पूरी तरह सुरक्षित बना रहे। राज्य सरकार द्वारा जारी किए गए नए आधिकारिक आदेश के अनुसार, अब प्रदेश के सभी विद्यालय 20 मई 2026 से लेकर 24 जून 2026 तक पूरी तरह से बंद रहेंगे।
पहले 16 जून से खुलने वाले थे स्कूल, मौसम ने बदला फैसला
पूर्व में शिक्षा विभाग द्वारा तय की गई समय-सारिणी के मुताबिक, राज्य के सभी सरकारी विद्यालयों को 16 जून से ही दोबारा खोल दिया जाना था, जहां नियमित पढ़ाई शुरू होनी थी। परंतु, जून के महीने में मौसम की अत्यधिक प्रतिकूल और गंभीर परिस्थितियों को देखते हुए शासन ने बच्चों के हित में अपनी पुरानी नीति को बदलने का त्वरित निर्णय लिया। सरकार के इस नए और राहत देने वाले कदम के बाद, अब उत्तर प्रदेश के सभी विद्यार्थियों के लिए स्कूलों में नियमित रूप से कक्षाएं 25 जून 2026 से पूर्ण रूप से संचालित की जाएंगी। इससे बच्चों को तपती धूप में स्कूल जाने से बड़ी राहत मिलेगी।
अधिकारियों को 22 जून से पहुंचना होगा स्कूल, पूरे होंगे प्रशासनिक कार्य
भले ही भीषण गर्मी के कारण स्कूली विद्यार्थियों की छुट्टियां 24 जून तक लगातार जारी रहेंगी, लेकिन विद्यालयों के सुचारू संचालन और जरूरी व्यवस्थाओं को समय पर पूरा करने के लिए संबंधित बेसिक शिक्षा अधिकारियों, प्रधानाचार्यों और प्रशासनिक कर्मचारियों को 22, 23 और 24 जून को अनिवार्य रूप से स्कूल पहुंचना होगा। इस तीन दिवसीय अवधि के दौरान स्कूलों में व्यापक साफ-सफाई अभियान चलाया जाएगा, नए सत्र की समय-सारिणी (टाइम-टेबल) तैयार की जाएगी, मिड-डे मील (एमडीएम) के राशन और भोजन की मुकम्मल व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी, नई पाठ्य-पुस्तकों का वितरण किया जाएगा और अन्य सभी महत्वपूर्ण प्रशासनिक कार्य समय से पूरे किए जाएंगे। इसके अलावा, बीच में पड़ने वाले 21 जून को ‘अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस’ के पावन अवसर पर सभी विद्यालयों में विशेष योगाभ्यास कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा, जिसमें बच्चों के स्वास्थ्य और फिटनेस को बढ़ावा देने के लिए उनकी सहभागिता भी सुनिश्चित की जा सकती है।
भ्रम की स्थिति को दूर करने के लिए अपर मुख्य सचिव ने जारी किया सामूहिक आदेश
उत्तर प्रदेश के अपर मुख्य सचिव (बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा) द्वारा जारी किए गए विस्तृत सरकारी आदेश में स्पष्ट रूप से बताया गया है कि हर साल अत्यधिक और जानलेवा गर्मी के कारण कई जिलों में स्कूल दोबारा खुलने के तुरंत बाद भी स्थानीय प्रशासन को उन्हें अचानक बंद करना पड़ता था। कई बार अलग-अलग जिलों के जिलाधिकारी (डीएम) अपनी स्थानीय मौसमी परिस्थितियों के अनुसार अलग-अलग तारीखों पर स्कूल बंदी के आदेश जारी करते थे, जिससे पूरे प्रदेश के अभिभावकों और शिक्षकों के बीच भारी भ्रम और असमंजस की स्थिति बन जाती थी।
इसी बड़ी व्यावहारिक समस्या के स्थाई समाधान के लिए इस बार शासन स्तर से पहले ही पूरे प्रदेश में एक साथ अवकाश की अवधि बढ़ाने का सामूहिक फैसला लिया गया है। इसके साथ ही शिक्षा विभाग ने यह भी पूरी तरह सुनिश्चित किया है कि छुट्टियों के बढ़ने के बावजूद पूरे शैक्षणिक सत्र के दौरान विद्यार्थियों को निर्धारित न्यूनतम 220 शिक्षण दिवसों की गुणवत्तापूर्ण पढ़ाई हर हाल में उपलब्ध कराई जाए।
जर्जर भवनों में क्लास न लगाने और समय पर किताबें बांटने के कड़े निर्देश
शिक्षा विभाग के आला अधिकारियों ने सूबे के सभी जिलों के जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों (बीएसए) को सख्त निर्देश जारी किए हैं कि स्कूल खुलने से पहले प्रत्येक छात्र तक नए सत्र की पाठ्य-पुस्तकें अनिवार्य रूप से पहुंच जानी चाहिए। इसके साथ ही सुरक्षा के मद्देनजर यह कड़ा आदेश भी दिया गया है कि प्रदेश के किसी भी कोने में किसी भी जर्जर या असुरक्षित स्कूली भवन के भीतर बच्चों की क्लास न लगाई जाए और न ही वहां पढ़ाई कराई जाए।
आंतरिक सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, अभी भी राज्य के कई सुदूर ग्रामीण स्कूलों में शत-प्रतिशत किताबें नहीं पहुंच सकी हैं, क्योंकि बड़ी संख्या में प्राथमिक शिक्षक इस समय राष्ट्रीय जनगणना सहित अन्य महत्वपूर्ण सरकारी व गैर-शैक्षणिक कार्यों में व्यस्त हैं। इसके बावजूद, विभाग ने स्पष्ट किया है कि जैसे ही 25 जून को स्कूल खुलेंगे, अध्यापकों को विद्यार्थियों का ढोल-नगाड़ों या फूल-मालाओं से उत्साहपूर्ण स्वागत करना होगा, स्कूलों में छात्रों की उपस्थिति बढ़ाने के लिए विशेष अभियान चलाना होगा और उनके अभिभावकों से लगातार जीवंत संपर्क बनाए रखना होगा।










