Sambhal Encroachment Drive : यूपी के संभल में प्रशासन का बड़ा एक्शन, सरकारी जमीन पर बना मदरसा और मस्जिद जमींदोज

संभल में हड़कंप! प्रशासन द्वारा 4 महीने का नोटिस दिए जाने के बाद संभल के विभिन्न गांवों में सरकारी जमीन पर बने अवैध मदरसे और मस्जिदों को ढहाने की प्रक्रिया तेज हो गई है। कहीं बुलडोजर गरज रहा है, तो कहीं लोग खुद ही अवैध निर्माण हटा रहे हैं। क्या संभल से पूरी तरह खत्म होगा सरकारी जमीन पर कब्जा?

Sambhal Encroachment Drive

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

अप्रैल 5, 2026

Sambhal Encroachment Drive : उत्तर प्रदेश के संभल जनपद में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत एक बार फिर प्रशासन का सख्त रूप देखने को मिला है। रविवार को संभल के असमोली थाना अंतर्गत ग्राम मुबारकपुर बंद में सरकारी जमीन पर किए गए अवैध कब्जों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की गई। राजस्व विभाग और स्थानीय प्रशासन की संयुक्त टीम ने भारी पुलिस बल की मौजूदगी में ग्राम समाज की बेशकीमती भूमि पर बने अवैध ढांचों को ढहाना शुरू कर दिया। इस कार्रवाई से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है, वहीं प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि सरकारी संपत्ति पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

जिलाधिकारी के आदेश पर चला पीला पंजा: 8 दिन का मिला था अल्टीमेटम

यह पूरी कार्रवाई संभल के जिलाधिकारी डॉ. राजेंद्र पैंसिया के कड़े निर्देशों के बाद अमल में लाई गई है। राजस्व विभाग की जांच में यह पाया गया था कि गांव की सरकारी भूमि पर अवैध रूप से निर्माण कराया गया है। प्रशासन ने कार्रवाई से पहले कब्जाधारियों को आठ दिन का समय देते हुए अल्टीमेटम जारी किया था कि वे स्वयं अपना अवैध निर्माण हटा लें। हालांकि, स्थानीय लोगों ने अतिक्रमण हटाने की कोशिश तो शुरू की, लेकिन निर्धारित समय सीमा के भीतर काम पूरा नहीं हो सका। इसके बाद रविवार सुबह तड़के ही जेसीबी मशीनें मौके पर पहुंच गईं और अवैध निर्माणों को ध्वस्त करने का काम युद्धस्तर पर शुरू कर दिया गया।

मदरसा, मस्जिद और दुकानें हुईं ध्वस्त: 4 बीघा जमीन कराई गई मुक्त

प्रशासनिक टीम ने गाटा संख्या 623 और 630 की भूमि का सीमांकन कर उसे कब्जामुक्त कराने की प्रक्रिया तेज कर दी है। सरकारी अभिलेखों के अनुसार, यह भूमि खाद के गड्ढों और खेल के मैदान के लिए आरक्षित थी। लेकिन पिछले कुछ समय में भू-माफियाओं और स्थानीय लोगों ने इस करीब चार बीघा भूमि पर अवैध रूप से गौसुल मदरसा, एक मस्जिद, दो स्कूल और पांच व्यावसायिक दुकानों का निर्माण कर लिया था। ध्वस्त की गई दुकानों में मेडिकल स्टोर, सब्जी की दुकान, जन सेवा केंद्र और खाने-पीने के स्टाल शामिल थे। इन सभी पक्के निर्माणों को बुलडोजर की मदद से मिट्टी में मिला दिया गया।

ग्रामीण खुद वहन कर रहे जेसीबी का खर्च: प्रधानपति का बड़ा बयान

इस कार्रवाई में एक दिलचस्प पहलू यह सामने आया कि अवैध निर्माण हटाने के लिए खुद ग्राम प्रधानपति हाजी मुनव्वर ने प्रशासन से जेसीबी मशीन उपलब्ध कराने की मांग की थी। तहसीलदार धीरेंद्र कुमार सिंह के समन्वय से मशीनें उपलब्ध कराई गईं, जिनका किराया ग्रामीण स्वयं वहन कर रहे हैं। प्रधानपति का कहना है कि वे कानून का सम्मान करते हैं और समय कम होने के कारण वे मैनुअल तरीके से निर्माण नहीं हटा पाए थे, इसलिए मशीन की मदद ली गई। अनुमान लगाया जा रहा है कि पूरे क्षेत्र को पूरी तरह से साफ करने और मलबे को हटाने में करीब 20 घंटे का समय लग सकता है।

सुरक्षा के कड़े इंतजाम: भारी पुलिस बल की तैनाती और शांति व्यवस्था

चूंकि कार्रवाई धार्मिक स्थल (मस्जिद और मदरसा) और सार्वजनिक संस्थानों से जुड़ी थी, इसलिए मौके पर किसी भी प्रकार के सांप्रदायिक तनाव या विरोध की स्थिति को टालने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। पीएसी और स्थानीय पुलिस की टुकड़ियों ने पूरे गांव को छावनी में तब्दील कर दिया। राजस्व टीम मौके पर ही पैमाइश और सीमांकन का कार्य पूरा कर रही है ताकि भविष्य में दोबारा यहां कब्जा न हो सके। प्रशासन ने चेतावनी दी है कि जनपद में जहां कहीं भी सरकारी जमीनों, तालाबों या चरागाहों पर अवैध कब्जे हैं, उन्हें इसी तरह चिह्नित कर ध्वस्त किया जाएगा।

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