UP Power Supply : यूपी में निर्बाध बिजली आपूर्ति के लिए सीएम योगी के कड़े निर्देश, जानिए पूरी रणनीति और नए नियम

उत्तर प्रदेश में भीषण गर्मी और रिकॉर्ड तोड़ बिजली मांग के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शक्ति भवन के अधिकारियों को सख्त लहजे में चेतावनी दी है; अघोषित कटौती और तकनीकी खराबी में लापरवाही बरतने पर यूपी पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन में बड़े पैमाने पर सस्पेंशन शुरू हो गए हैं, आखिर क्या है सरकार का नया एक्शन प्लान? जानिए!

UP Power Supply

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

मई 24, 2026

UP Power Supply : उत्तर प्रदेश में भीषण गर्मी और पारे के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने के बीच बिजली की मांग ऐतिहासिक रूप से बढ़ गई है। इस चुनौतीपूर्ण दौर में आम जनता, किसानों, व्यापारियों और उद्योगों को राहत देने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कमर कस ली है। रविवार को ऊर्जा मंत्री अरविंद कुमार शर्मा और राज्य मंत्री कैलाश सिंह राजपूत की उपस्थिति में मुख्यमंत्री ने ऊर्जा विभाग, पावर कॉरपोरेशन और सभी डिस्कॉम (बिजली वितरण कंपनियों) के शीर्ष अधिकारियों के साथ एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की। सीएम योगी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस चिलचिलाती गर्मी में प्रदेशवासियों को निर्बाध और गुणवत्तापूर्ण बिजली देना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

बिजली उत्पादन क्षमता में ऐतिहासिक वृद्धि: रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा उत्पादन

बैठक में मुख्यमंत्री को अवगत कराया गया कि वर्ष 2022 की तुलना में साल 2026 तक राज्य विद्युत उत्पादन निगम की स्थापित क्षमता में 86 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। अब उत्तर प्रदेश की कुल विद्युत उत्पादन क्षमता बढ़कर 13,388 मेगावाट हो गई है। इसमें अनपरा, ओबरा, ओबरा, हरदुआगंज, परीछा, जवाहरपुर और पनकी जैसे प्रमुख तापीय विद्युत गृहों से 9,120 मेगावाट बिजली मिल रही है। इसके अलावा जल विद्युत से 526.4 मेगावाट और मेजा, घाटमपुर व खुर्जा जैसी संयुक्त परियोजनाओं से 3,742 मेगावाट बिजली राज्य को प्राप्त हो रही है। साथ ही गैर-पारंपरिक यानी सौर और अन्य नवीकरणीय स्रोतों से भी लगभग 10 हजार मेगावाट बिजली का उत्पादन किया जा रहा है।

मजबूत ट्रांसमिशन नेटवर्क: तकनीकी बाधाओं और पारेषण हानियों में आई भारी कमी

बिजली को बिना किसी रुकावट के उपभोक्ताओं तक पहुंचाने के लिए यूपी पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन लिमिटेड के पास वर्तमान में 60,858 सर्किट किलोमीटर लंबी ट्रांसमिशन लाइनें सक्रिय हैं। प्रदेश के 715 उपकेंद्रों के माध्यम से 2,05,632 एमवीए की विशाल क्षमता उपलब्ध कराई गई है। सीएम ने ट्रांसमिशन नेटवर्क को और आधुनिक बनाने के निर्देश दिए हैं। राहत की बात यह है कि ट्रांसमिशन नेटवर्क की उपलब्धता 99.30 प्रतिशत दर्ज की गई है और पारेषण हानियां (Transmission Losses) घटकर मात्र 3.2 प्रतिशत रह गई हैं। सीएम ने कहा कि तकनीकी फाल्ट को न्यूनतम स्तर पर रखा जाए।

लापरवाही पर सख्त एक्शन: खराब ट्रांसफॉर्मर और फीडर ब्रेकडाउन पर तय होगी जवाबदेही

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को चेताया कि बिजली आपूर्ति में किसी भी स्तर पर ढिलाई या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने ‘फीडर वाइज’ जवाबदेही तय करने के निर्देश दिए हैं। आंधी-तूफान या अत्यधिक तापमान के कारण यदि कोई ट्रांसफॉर्मर खराब होता है या फीडर बाधित होता है, तो फील्ड स्टाफ को तुरंत रिस्पॉन्स देना होगा। मई के महीने में आए तूफानों से प्रभावित हुए 38 सब-स्टेशन और 326 फीडरों को जिस तेजी से बहाल किया गया, सीएम ने उसकी समीक्षा की। इसके साथ ही अंडरग्राउंड केबलिंग वाले इलाकों में बिना अनुमति होने वाली खुदाई पर रोक लगाने को कहा गया है ताकि लाइनें न कटें।

ट्रांसफॉर्मर डैमेज कंट्रोल में बड़ी सफलता: आधुनिक सुरक्षा तंत्र का दिखा असर

बिजली विभाग की सतर्कता और सुरक्षा तंत्र की व्यापक स्थापना के चलते राज्य में बिजली ट्रांसफॉर्मर के जलने या क्षतिग्रस्त होने की घटनाओं में उल्लेखनीय कमी आई है। आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2022-23 में जहां 429 पावर ट्रांसफॉर्मर क्षतिग्रस्त हुए थे, वहीं वर्ष 2025-26 में यह संख्या लगभग 80 प्रतिशत घटकर सिर्फ 87 रह गई। इसी तरह, 100 केवीए से अधिक क्षमता वाले बड़े वितरण ट्रांसफॉर्मरों की क्षति दर भी 39,177 से घटकर 20,292 पर आ गई है। सीएम ने इस सुधार को सकारात्मक बताते हुए इसे और बेहतर करने के निर्देश दिए।

बिजली की मांग में भारी उछाल: देश में दूसरे नंबर पर रहा उत्तर प्रदेश

इस वर्ष अप्रैल और मई में रिकॉर्डतोड़ गर्मी के कारण बिजली की खपत बहुत तेजी से बढ़ी है। 15 अप्रैल से 22 मई के बीच दैनिक औसत मांग 501 मिलियन यूनिट से बढ़कर 561 मिलियन यूनिट प्रतिदिन पहुंच गई। वहीं, पीक डिमांड भी 29,831 मेगावाट से बढ़कर 30,339 मेगावाट के सर्वकालिक उच्च स्तर पर आ गई। इस भारी मांग के बावजूद उत्तर प्रदेश देश में सबसे ज्यादा बिजली की आपूर्ति करने वाला दूसरा सबसे बड़ा राज्य बनकर उभरा है। कॉरपोरेशन ने मांग को पूरा करने के लिए 12 राज्यों के साथ ‘पावर बैंकिंग’ की विशेष व्यवस्था की है।

दीर्घकालिक ऊर्जा रणनीति: 2029 तक अतिरिक्त बिजली जुटाने का रोडमैप तैयार

भविष्य की बढ़ती आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए उत्तर प्रदेश ने वर्ष 2015 से 2026 के बीच कुल 32,305 मेगावाट बिजली के लिए टाई-अप किया है, जिसमें से 62 प्रतिशत क्षमता पिछले तीन वर्षों में ही जोड़ी गई है। वर्ष 2029 तक की मांग को निर्बाध रूप से पूरा करने के लिए सरकार 10,719 मेगावाट अतिरिक्त क्षमता जोड़ने पर काम कर रही है। इस आगामी क्षमता में विंड एनर्जी, बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम, पंप्ड हाइड्रो और हाइब्रिड ऊर्जा जैसी आधुनिक और पर्यावरण अनुकूल परियोजनाएं शामिल होंगी।

उपभोक्ता सेवाओं में पारदर्शिता: 1912 हेल्पलाइन से मिलेगी सही और सटीक जानकारी

सीएम योगी ने कहा कि उपभोक्ताओं को केवल यह बताना काफी नहीं है कि बिजली कब कटी, बल्कि यह भी बताना होगा कि आपूर्ति कब तक बहाल होगी। नवंबर 2025 से लागू की गई नई एकीकृत 1912 कॉल सेंटर व्यवस्था के जरिए अब लखनऊ और नोएडा केंद्रों से कॉल लोड बैलेंसिंग की जा रही है। इसकी दैनिक कॉल हैंडलिंग क्षमता को बढ़ाकर 75 हजार से 90 हजार कर दिया गया है। मुख्यमंत्री ने दोनों ऊर्जा मंत्रियों को इस हेल्पलाइन सेंटर का औचक निरीक्षण करने और उपभोक्ताओं की समस्याओं का पारदर्शी समाधान सुनिश्चित करने को कहा है।

स्मार्ट मीटर धारकों के लिए बड़ी राहत: जून से लागू होगी नई पोस्टपेड बिलिंग व्यवस्था

राज्य सरकार ने स्मार्ट प्रीपेड मीटर से जुड़ी उपभोक्ताओं की शिकायतों को देखते हुए एक बड़ा फैसला लिया है। अब सभी स्मार्ट प्रीपेड उपभोक्ताओं को पुरानी व्यवस्था की तरह पोस्टपेड श्रेणी में बदल दिया गया है। जून 2026 से इन उपभोक्ताओं के बिल हर महीने की 1 से 10 तारीख के बीच पोस्टपेड आधार पर जारी किए जाएंगे, जो उपभोक्ताओं को सीधे एसएमएस, व्हाट्सऐप और ई-मेल पर मिलेंगे। इसके अलावा, 15 मई से 30 जून तक पूरे प्रदेश में विशेष कैंप लगाकर मीटर संबंधी सभी शिकायतों का मौके पर ही निपटारा किया जा रहा है।

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