UP Politics: मंच पर फूट-फूट कर रोए मंत्री संजय निषाद, पिछली सरकारों के काले चिट्ठे खोले!

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में एक जनसभा के दौरान योगी सरकार के कैबिनेट मंत्री डॉ. संजय निषाद का बेहद भावुक रूप देखने को मिला। मंच से समाज को संबोधित करते हुए वे फूट-फूट कर रो पड़े और आरोप लगाया कि पिछली सरकारों ने निषाद समाज को केवल 'ठगने और लूटने' का काम किया है।

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

मार्च 22, 2026

UP Politics: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले राजनीतिक माहौल गरमाने लगा है। इसी बीच प्रदेश सरकार के मंत्री और निषाद पार्टी के नेता डॉ. संजय निषाद गोरखपुर दौरे पर पहुंचे, जहां उन्होंने एक जनसभा को संबोधित करते हुए भावुक होकर सबका ध्यान अपनी ओर खींचा। मंच पर भाषण देते समय वह फूट-फूटकर रो पड़े और अपने समाज की पीड़ा को साझा किया।

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पिछली सरकारों पर लगाया आरोप

गोरखपुर के दिग्विजयनाथ पार्क में आयोजित सभा में संजय निषाद ने कहा कि पिछली सरकारों ने निषाद समाज को ठगा और लूटा। उन्होंने भावुक होकर कहा कि उनकी बहन-बेटियों की इज्जत लूटी गई, बच्चों को पीछे छोड़ दिया गया और समाज को हाशिये पर धकेल दिया गया। उन्होंने कहा कि अपनी पार्टी बनाकर ही समाज को मजबूत किया जा सकता है।

योगी सरकार की सराहना

संजय निषाद ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने निषाद समाज की पीड़ा को समझा और सदन में उनकी मांगों को उठाया। उन्होंने कहा कि योगी सरकार ने समाज को साथ दिया है और उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुना है।

ठगों और बेईमानों से दूरी बनाने की अपील

मंच से संजय निषाद ने अपने समाज से अपील की कि वे ठगों और बेईमानों का साथ छोड़ दें। उन्होंने कहा कि केवल सच्चे नेतृत्व के साथ खड़े होकर ही समाज को न्याय और सम्मान मिल सकता है।

राजनीतिक रणनीति और असर

गोरखपुर में संजय निषाद का मंच पर रोना और भावुक होना अब राजनीतिक बहस का विषय बन गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटना आगामी विधानसभा चुनावों में असर डाल सकती है। कुछ जानकार इसे संजय निषाद की बड़ी राजनीतिक रणनीति भी मान रहे हैं, जिसके जरिए वह अपने समाज को भावनात्मक रूप से जोड़ने और समर्थन जुटाने की कोशिश कर रहे हैं।

संजय निषाद का गोरखपुर दौरे पर भावुक होना और समाज की पीड़ा को मंच से साझा करना आगामी चुनावों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह घटना न केवल निषाद समाज बल्कि पूरे प्रदेश की राजनीति में नई चर्चा का विषय बन गई है। चुनावी माहौल में ऐसे भावनात्मक संबोधन राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकते हैं।

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