UP Politics: कांग्रेस के तेवर, बोली- हमारे बिना मुख्यमंत्री नहीं बन सकता; अखिलेश यादव पर भी निशाना

उत्तर प्रदेश की राजनीति में कांग्रेस ने नया सियासी संदेश दिया है। पार्टी नेताओं ने दावा किया कि उनके समर्थन के बिना कोई मुख्यमंत्री नहीं बन सकता। इस बयान के जरिए कांग्रेस ने न सिर्फ अपनी ताकत दिखाने की कोशिश की, बल्कि समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव को भी संकेत दिया कि 2027 की लड़ाई में उसकी भूमिका अहम रहने वाली है।

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Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

अगस्त 19, 2026

UP Politics:  उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। चुनावी तैयारियों के बीच दलों के बीच गठबंधन, सीट बंटवारे और नेतृत्व को लेकर बयानबाजी लगातार बढ़ रही है। इसी बीच उत्तर प्रदेश कांग्रेस प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP) के नेता और मंत्री ओम प्रकाश राजभर के उस दावे को खारिज किया है, जिसमें उन्होंने कांग्रेस नेता से मुलाकात या संपर्क की बात कही थी।

राजेंद्र पाल गौतम ने मुलाकात के दावे को नकारा

राजेंद्र पाल गौतम ने स्पष्ट किया कि उनकी ओम प्रकाश राजभर से अब तक न तो कोई व्यक्तिगत मुलाकात हुई है और न ही फोन पर बातचीत हुई है। उन्होंने कहा कि अगर राजभर मुलाकात का दावा कर रहे हैं तो उन्हें इसकी तस्वीर सामने रखनी चाहिए। कांग्रेस प्रभारी ने सवाल उठाया कि आखिर राजभर इस तरह का दावा क्यों कर रहे हैं।

सितंबर से शुरू हो सकती है सीट शेयरिंग पर बातचीत

समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच संभावित गठबंधन को लेकर सीट बंटवारा सबसे अहम मुद्दों में माना जा रहा है। राजेंद्र पाल गौतम के मुताबिक, महागठबंधन में सीट शेयरिंग को लेकर बातचीत सितंबर से शुरू होने की संभावना है। उन्होंने कहा कि अक्टूबर तक सीटों पर सहमति बनाने का प्रयास किया जाएगा, जिसके बाद टिकट वितरण की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है।

सम्मानजनक सीट समझौते पर कांग्रेस का जोर

कांग्रेस प्रभारी ने कहा कि गठबंधन में सीटों का बंटवारा सम्मानजनक तरीके से होना चाहिए। उन्होंने संकेत दिया कि सीटों की संख्या को लेकर कुछ कम-ज्यादा संभव है, लेकिन दोनों दलों का बड़ा लक्ष्य उत्तर प्रदेश में सरकार बनाना होना चाहिए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस बड़ा दिल रखने के लिए तैयार है और उम्मीद है कि सहयोगी दल भी इसी भावना के साथ आगे बढ़ेंगे।

अखिलेश यादव को लेकर कांग्रेस का रुख

राजेंद्र पाल गौतम ने कहा कि कांग्रेस समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के चेहरे को आगे रखकर चुनावी रणनीति पर काम कर रही है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उनका दावा है कि कांग्रेस के बिना प्रदेश में मुख्यमंत्री बनना संभव नहीं होगा। इस बयान से गठबंधन के भीतर नेतृत्व और सीट बंटवारे को लेकर चर्चा और तेज हो सकती है।

कांग्रेस संगठन मजबूत होने का दावा

कांग्रेस नेता ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में पार्टी का संगठन पहले की तुलना में मजबूत हुआ है। उन्होंने कहा कि अब गांव-गांव कांग्रेस के कार्यकर्ता मौजूद हैं और पार्टी आगामी चुनाव के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस को 2017 के विधानसभा चुनाव की तुलना में इस बार ज्यादा सीटें मिलनी चाहिए।

मायावती को साथ लाने की वकालत

जब राजेंद्र पाल गौतम से पूछा गया कि क्या बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती भी संभावित विपक्षी गठबंधन का हिस्सा बन सकती हैं, तो उन्होंने समान विचारधारा वाले दलों को साथ आने की बात कही। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ लड़ाई के लिए समान विचार रखने वाली ताकतों का एकजुट होना जरूरी है। हालांकि, मायावती को लेकर कोई औपचारिक गठबंधन स्पष्ट नहीं किया गया है।

राजभर के बयानों पर फिर कांग्रेस का पलटवार

ओम प्रकाश राजभर की ओर से सपा और कांग्रेस को लेकर लगातार दिए जा रहे बयानों पर भी राजेंद्र पाल गौतम ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने दोहराया कि उनकी राजभर से कोई बातचीत नहीं हुई है। कांग्रेस नेता ने कहा कि उन्हें जानकारी नहीं है कि राजभर ऐसा दावा किस आधार पर कर रहे हैं।

इमरान मसूद भी सपा पर उठा चुके सवाल

इससे पहले कांग्रेस सांसद इमरान मसूद भी समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन को लेकर अपनी राय जाहिर कर चुके हैं। उन्होंने सपा पर मुस्लिम समुदाय से जुड़े मुद्दों पर अपेक्षित मजबूती से आवाज नहीं उठाने का आरोप लगाया था। मसूद ने कहा था कि अगर सपा वास्तव में बीजेपी के खिलाफ गठबंधन चाहती है, तो उसे ईमानदारी के साथ इसे अंतिम रूप देना चाहिए।

चुनाव से पहले गठबंधन की परीक्षा

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव की तारीख जैसे-जैसे नजदीक आएगी, कांग्रेस और सपा के बीच सीट बंटवारे और रणनीति को लेकर बातचीत महत्वपूर्ण होती जाएगी। फिलहाल दोनों दल साथ चुनाव लड़ने की संभावना जता रहे हैं, लेकिन नेताओं के अलग-अलग बयानों से यह भी साफ है कि गठबंधन के भीतर कई मुद्दों पर सहमति बनना अभी बाकी है।

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