UP Politics: उत्तर प्रदेश विधानसभा के चल रहे मानसून सत्र के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सदन में अपना भाषण पूरा नहीं कर सके। इसके बाद विधानमंडल परिसर में एक विशेष प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए सीएम योगी ने समाजवादी पार्टी (SP) और विपक्षी दलों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि सदन में सपा का आचरण न केवल संसदीय गरिमा और परंपराओं के खिलाफ है, बल्कि यह पूरी तरह से अलोकतांत्रिक, शर्मनाक और सदन की अवमानना करने वाला है।
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सदन नियमों और परंपराओं से चलता है: सीएम योगी
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि विधानसभा किसी दल विशेष की मर्जी से नहीं, बल्कि स्थापित नियमों, परिनियमों और विधिवत परंपराओं के अनुसार संचालित होती है। विधानसभा संचालन नियमावली के नियम-59 का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि जो मुद्दा किसी न्यायाधिकरण (Tribunal), आयोग या न्यायालय के समक्ष विचाराधीन हो, उस पर सदन में चर्चा नहीं की जा सकती। हालांकि, विशेष परिस्थितियों में यदि विधानसभा अध्यक्ष उचित समझें तो इसकी अनुमति दे सकते हैं, लेकिन विपक्ष ने नियमों को ताक पर रख दिया।
सीएम ने बताया कि सर्वदलीय बैठक में समाजवादी पार्टी ने यह आश्वासन दिया था कि वे नियमों के दायरे में रहकर नोटिस के माध्यम से चर्चा कराएंगे, लेकिन सदन में उनका रवैया इसके बिल्कुल विपरीत रहा। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा का लोकतांत्रिक मूल्यों और संस्थाओं में कभी विश्वास नहीं रहा है। ‘हल्ला बोल’ की राजनीति को अलोकतांत्रिक बताते हुए उन्होंने कहा कि सपा कभी मीडिया पर हमला करती है, तो कभी चुनाव आयोग और न्यायाधिकरणों का अपमान करती है, जिससे डॉ. भीमराव आंबेडकर की लोकतांत्रिक भावनाएं आहत होती हैं।
यह ‘चंदा चोरी’ नहीं, बल्कि ‘चढ़ावा चोरी’ है
अयोध्या मामले पर बात करते हुए मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यह मामला कथित ‘चंदा चोरी’ का नहीं, बल्कि मंदिर के चढ़ावे से जुड़ी चोरी का था। उन्होंने खुलासा किया कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने खुद राज्य सरकार को पत्र लिखकर निष्पक्ष एसआईटी (SIT) जांच की मांग की थी। ट्रस्ट के अनुरोध पर राज्य सरकार ने 13 जून को विशेष जांच दल का गठन कर जांच शुरू कराई थी। चूंकि यह मामला उच्चतम न्यायालय में भी विचाराधीन है, इसलिए सदन में इस पर इस तरह का हंगामा करना पूरी तरह नियमों के विरुद्ध था।
साधु-संतों को बदनाम करने की साजिश
सीएम योगी ने कहा कि जब एसआईटी की जांच चल रही थी, तब माननीय उच्चतम न्यायालय ने आगे की कार्रवाई को अपनी निगरानी में ले लिया। जांच में यह स्पष्ट हो चुका है कि इस मामले में किसी भी साधु-संत की कोई संलिप्तता नहीं है। मंदिर परिसर में लगभग 100 कर्मचारी काम करते हैं, जिनमें से मात्र 8 लोगों की संदिग्ध भूमिका सामने आई है। इसके बावजूद कुछ दलों द्वारा साधु-संतों पर बेबुनियाद आरोप लगाना, पूरी अयोध्या नगरी को अपमानित करना और राम मंदिर की छवि को धूमिल करना अत्यंत निंदनीय है।
कांग्रेस और सपा पर रामभक्तों पर गोली चलवाने का आरोप
विपक्ष पर कड़ा प्रहार करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जो लोग आज आस्था की बात कर रहे हैं, वही कांग्रेस और समाजवादी पार्टी हैं जिन्होंने इतिहास में भगवान राम का अपमान किया है। वर्ष 1990 में अयोध्या और सरयू नदी को रक्तरंजित करने का पाप इन्हीं दलों ने किया था, जब निहत्थे रामभक्तों पर गोलियां चलाई गई थीं। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने रामभक्तों का खून बहाया, आज वे किस मुंह से आस्था और नैतिकता की बात कर रहे हैं? जनता इनके दोहरे चरित्र को अच्छी तरह जानती है।










