UP Politics: चिराग पासवान का नया दांव, विपक्षी नैरेटिव पर पलटवार

LJP प्रमुख चिराग पासवान 5 जुलाई को लखनऊ में कार्यकर्ता सम्मेलन कर यूपी की सियासत में चुनावी बिगुल फूंकेंगे।

UP Politics

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

जुलाई 4, 2026

UP Politics: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। इसी क्रम में लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने यूपी की राजनीति में अपनी सक्रियता को और बढ़ा दिया है। आगामी 5 जुलाई को लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में लोजपा (रामविलास) का एक भव्य कार्यकर्ता सम्मेलन आयोजित होने जा रहा है, जिसे चिराग पासवान संबोधित करेंगे।

UP News: CM योगी ने बढ़ाया मानसिक दिव्यांग और निराश्रितों का अनुदान, दिए कई अहम निर्देश

विपक्ष के ‘नैरेटिव’ को चुनौती

लोजपा (रामविलास) के यूपी प्रभारी अरुण भारती ने इस कार्यक्रम को बेहद महत्वपूर्ण बताते हुए विपक्ष पर कड़ा प्रहार किया है। पार्टी का स्पष्ट मानना है कि लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान विपक्ष द्वारा फैलाया गया “संविधान और आरक्षण खतरे में है” का नैरेटिव पूरी तरह झूठा और भ्रामक था। चिराग पासवान ने लोकसभा और जनता के बीच बार-बार यह संदेश दिया है कि जब तक रामविलास पासवान का परिवार और उनका वंशज सक्रिय है, संविधान और आरक्षण को कोई आंच नहीं आ सकती। अब इसी संदेश को उत्तर प्रदेश के गांव-गांव तक पहुंचाने की रणनीति तैयार की जा रही है।

दलित प्रतिनिधित्व और चुनावी रणनीति

इस सम्मेलन का मुख्य केंद्र बिंदु दलित प्रतिनिधित्व को लेकर पार्टी की भावी रणनीति होगा। अरुण भारती ने कांग्रेस को आड़े हाथों लेते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस केवल चुनावी हार की आहट मिलते ही दलित चेहरों का इस्तेमाल करती है। उन्होंने राजेंद्र पाल गौतम, मीरा कुमार और के. सुरेश जैसे नामों का उल्लेख करते हुए इसे कांग्रेस की दलित विरोधी मानसिकता और हार की स्वीकारोक्ति करार दिया। लोजपा (रामविलास) अब अपने दम पर और गठबंधन के साथ तालमेल बिठाकर उत्तर प्रदेश में दलित वर्ग के बीच अपनी पैठ बनाने की तैयारी में है।

एनडीए में एकजुटता और भविष्य की राह

लोजपा (रामविलास) के एनडीए गठबंधन में होने के बावजूद यूपी में पार्टी की अलग रणनीति को लेकर उठ रहे सवालों पर अरुण भारती ने स्पष्ट किया कि एनडीए पूरी तरह एकजुट है। चिराग पासवान का यह लखनऊ दौरा कार्यकर्ताओं में जोश भरने और आगामी विधानसभा चुनावों के लिए पार्टी के सांगठनिक ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

आने वाले दिनों में यह सम्मेलन न केवल विपक्ष के दुष्प्रचार का जवाब देने के लिए एक मंच बनेगा, बल्कि लोजपा (रामविलास) की उत्तर प्रदेश में एक नई राजनीतिक ताकत के रूप में उभरने की दिशा में एक महत्वपूर्ण संकेत भी साबित होगा। पार्टी अब जनता के बीच जाकर अपने विजन को रखेगी और दलित समाज के साथ अपने जुड़ाव को और प्रगाढ़ करने पर ध्यान केंद्रित करेगी। चिराग पासवान की यह सक्रियता यूपी की चुनावी राजनीति में नए समीकरणों को जन्म दे सकती है।

UPTET 2026: साल्वर गैंग का काला खेल! जूते में मोबाइल से लेकर फर्जी परीक्षा तक, जानें कैसे पकड़े गए