UP Panchayat Chunav 2026: उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर हलचल तेज हो गई है, लेकिन उससे पहले राज्य सरकार ओबीसी आयोग का गठन करेगी। यह जानकारी योगी आदित्यनाथ सरकार ने इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में दी है। राज्य सरकार ने यह बताया कि आयोग की रिपोर्ट के आधार पर ही पंचायत चुनाव कराए जाएंगे।
जनहित याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई
हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दाखिल की गई थी, जिसमें यह मांग की गई थी कि प्रदेश में पिछड़ा वर्ग आयोग का कार्यकाल पांच महीने पहले पूरा हो चुका है। याचिकाकर्ता ने सरकार से यह अनुरोध किया था कि इस आयोग का गठन तुरंत किया जाए, ताकि पंचायत चुनाव के लिए तैयारियाँ पूरी की जा सकें। इस याचिका पर जस्टिस राजन राय और जस्टिस अवधेश चौधरी की बेंच ने सुनवाई की।
राज्य सरकार का हलफनामा: आयोग का गठन जरूरी
इस मामले की सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार ने हाईकोर्ट में हलफनामा पेश किया। सरकार ने कहा कि पंचायत चुनाव से पहले राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन किया जाएगा। इसके बाद आयोग जो रिपोर्ट तैयार करेगा, उसी के आधार पर उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव आयोजित किए जाएंगे। सरकारी अधिवक्ता ने कोर्ट में बताया कि आयोग के गठन की प्रक्रिया चल रही है। इसके बाद कोर्ट ने याचिका को निस्तारित कर दिया, क्योंकि अब इस मामले में कोई शेष नहीं था।
पंचायत चुनाव के समय पर होने का दावा
यूपी में इस साल अप्रैल-मई के महीने में पंचायत चुनाव कराए जाने की संभावना है। पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने भी पहले ही दावा किया था कि उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव समय पर होंगे। लेकिन फिलहाल, पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन नहीं हो पाया है, और अगर इस आयोग का गठन जल्दी नहीं होता है, तो पंचायत चुनावों में देरी भी हो सकती है।
चंद्रशेखर आज़ाद ने भी ओबीसी आयोग के गठन की मांग की थी
इससे पहले, नगीना सांसद और आज़ाद समाज पार्टी के अध्यक्ष चंद्रशेखर आज़ाद ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर ओबीसी आयोग के गठन की मांग की थी। उन्होंने भी जोर देकर कहा था कि बिना ओबीसी आयोग के रिपोर्ट के पंचायत चुनाव कराना मुश्किल होगा। अब सरकार ने साफ कर दिया है कि यूपी में पंचायत चुनाव ओबीसी आयोग की रिपोर्ट के आधार पर ही आयोजित किए जाएंगे।
आगे की राह: आयोग का गठन और चुनाव की प्रक्रिया
उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव की दिशा अब राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट पर निर्भर करेगी। अगर आयोग का गठन जल्द होता है और उसकी रिपोर्ट समय पर मिलती है, तो चुनावों की प्रक्रिया शुरू हो सकेगी। हालांकि, यदि इसमें देरी होती है, तो चुनावों में समय भी बढ़ सकता है। इससे प्रदेश के लाखों मतदाता प्रभावित हो सकते हैं।
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