UP News: देश की राजधानी दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के बीच चल रही उच्चस्तरीय बैठकों और देश भर में नीट परीक्षा को लेकर सुलगते असंतोष के बीच, समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने केंद्र और राज्य सरकार पर तीखा राजनीतिक हमला बोला है। अखिलेश यादव ने छात्रों पर हुए लाठीचार्ज, पेपर लीक माफिया और राम मंदिर के मुद्दे पर सरकार को कटघरे में खड़ा करते हुए कई गंभीर दावे किए हैं।
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छात्रों के प्रदर्शन और लाठीचार्ज पर तीखी टिप्पणी
नीट परीक्षा और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर सड़कों पर उतरे छात्रों पर हुए पुलिस लाठीचार्ज को अखिलेश यादव ने बेहद निंदनीय और दुखद बताया है। उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन और सरकार में थोड़ी भी संवेदनशीलता बची होती, तो वे पहले ही दिन छात्रों की समस्याओं का संज्ञान लेते और उनसे बातचीत करते।
सपा प्रमुख ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि देश के युवाओं और छात्रों की मांगें पूरी तरह से जायज हैं। सरकार संवाद स्थापित करने के बजाय दमनकारी नीतियों का सहारा ले रही है, जो सरकार के अंदर छिपे अहंकार को साफ-साफ प्रदर्शित करता है।
“पेपर लीक में भाजपाई शामिल, आरक्षण के डर से नहीं दे रहे नौकरी”
पेपर लीक के गंभीर मुद्दों पर बोलते हुए अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि जितने भी लोग इस प्रकार के घोटालों और पेपर लीक प्रकरणों में संलिप्त पाए जाते हैं, वे कहीं न कहीं भाजपा से जुड़े होते हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि आज तक कोई भी मुख्य दोषी कानून की गिरफ्त में नहीं आ सका है।
बेरोजगारी के मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए उन्होंने दावा किया कि भाजपा सरकार जानबूझकर युवाओं को नौकरियां नहीं देना चाहती है, क्योंकि ऐसा करने पर उन्हें संविधान प्रदत्त आरक्षण देना पड़ेगा। आरक्षण को कमजोर करने और युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने का यह एक सुनियोजित षड्यंत्र है।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और विभाग परिवर्तन पर बड़ा दावा
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की अटकलों और गृह मंत्री अमित शाह के साथ उनकी मुलाकात पर प्रतिक्रिया देते हुए अखिलेश यादव ने बड़ा राजनीतिक दावा किया। उन्होंने कहा कि यदि मंत्री का विभाग बदल भी दिया जाता है, तो अंततः फायदा सरकार को ही पहुंचेगा।
पूर्व मुख्यमंत्री ने आगे कटाक्ष करते हुए कहा कि जब कोई मंत्री लंबे समय तक एक ही मंत्रालय या विभाग में जमा रहता है, तो वह जनहित के काम करने के बजाय अपने और अपने करीबियों के लिए दूसरे रास्ते तलाशने लगता है। विभाग में भ्रष्टाचार और नाकामी को छिपाने के लिए बदलाव की चर्चाएं चल रही हैं।
राम मंदिर चोरी के मामले पर भाजपा और लखनऊ-दिल्ली के रिश्तों पर बयान
सपा प्रमुख ने राम मंदिर में हुई कथित चोरी के मामले का जिक्र करते हुए वर्तमान सरकार की तुलना ऐतिहासिक आक्रांताओं से कर डाली। उन्होंने कहा कि इतिहास में विदेशी लुटेरों ने मंदिर तोड़े, विश्वविद्यालय तोड़े और आंदोलनकारियों को प्रताड़ित किया था, और आज ठीक वही कार्य भारतीय जनता पार्टी कर रही है। भाजपा के भीतर सत्ता का भारी अहंकार समा गया है।
इसके साथ ही उन्होंने एक बड़ा राजनीतिक निहितार्थ निकालते हुए कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु राम की नगरी में चोरी की घटना का होना यह संकेत देता है कि कहीं न कहीं “लखनऊ वाले, दिल्ली वालों को नीचा दिखाने” का प्रयास कर रहे हैं, जिससे सत्ता के गलियारों में आपसी खींचतान जगजाहिर हो रही है।
“यह सरकार नहीं, अहंकार का प्रतीक है”
अखिलेश यादव ने अंत में केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि जब देश के करोड़ों युवा किसी आंदोलन से जुड़ते हैं और जिन होनहार बच्चों की इस पूरे घटनाक्रम में जान चली गई, उनके प्रति संवेदना का एक शब्द भी सरकार के मुख से न निकलना इस बात का प्रमाण है कि यह अब एक जनहितैषी सरकार नहीं बल्कि पूरी तरह अहंकार का पर्याय बन चुकी है। छात्र अपनी जायज आवाज बुलंद कर रहे हैं, लेकिन बहरी हो चुकी सरकार उनकी एक भी बात सुनने को तैयार नहीं है।
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