UP News: शंकराचार्य के धरने के बीच बाबा रामदेव की एंट्री, प्रशासन को लेकर कही ये बड़ी बात

उत्तर प्रदेश में शंकराचार्य के धरने के बीच बाबा रामदेव की अचानक एंट्री ने माहौल गरमा दिया है। रामदेव ने प्रशासन को लेकर बड़ा बयान देते हुए सवाल उठाए हैं, जिससे संत समाज और राजनीति दोनों में हलचल तेज हो गई है। अब नजरें सरकार की अगली प्रतिक्रिया पर टिकी हैं।

शंकराचार्य के धरने के बीच बाबा रामदेव की एंट्री

Wrriten By :

Neha Mishra

Published On :

जनवरी 23, 2026

UP News: उत्तर प्रदेश के पवित्र तीर्थराज प्रयागराज में आयोजित हो रहे माघ मेले में गुरुवार को योग गुरु बाबा रामदेव ने संगम की लहरों के बीच श्रद्धा की डुबकी लगाई। बाबा रामदेव ने न केवल त्रिवेणी संगम में स्नान किया, बल्कि जल का आचमन कर घाट पर होने वाली भव्य आरती में भी सहभागिता की। इस दौरान उन्होंने वर्तमान में चल रहे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और प्रशासन के विवाद पर अपनी स्पष्ट राय रखते हुए संतों की गरिमा का पक्ष लिया।

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बाबा रामदेव का बड़ा बयान

बताते चले कि, योग गुरु ने माघ मेले में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के साथ हुई हालिया घटना पर गहरा क्षोभ व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि किसी भी पूजनीय संत या योगी के प्रति अपशब्दों का प्रयोग या अपमानजनक व्यवहार पूर्णतः अस्वीकार्य है। बाबा रामदेव के अनुसार, यह केवल शंकराचार्य की गरिमा का प्रश्न नहीं है, बल्कि किसी भी साधु के साथ इस प्रकार की अभद्रता निंदनीय और शर्मनाक है। उन्होंने जोर देकर कहा कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति को अपनी और दूसरों की गरिमा का सम्मान सुनिश्चित करना चाहिए।

धर्मस्थलों पर विवाद और अहंकार को रामदेव ने बताया वर्जित

धर्मस्थलों पर विवाद और अहंकार को रामदेव ने बताया वर्जित
धर्मस्थलों पर विवाद और अहंकार को रामदेव ने बताया वर्जित

आपको बता दे कि, बाबा रामदेव ने शंकराचार्य को भगवान शंकर का साक्षात स्वरूप बताते हुए यह भी कहा कि साधु समाज से विवादों की अपेक्षा नहीं की जाती। उनके अनुसार, जिस व्यक्ति ने अपने अभिमान का त्याग कर दिया है, वही सच्चा साधु है। उन्होंने चेतावनी दी कि जब सनातन धर्म के सामने बाहरी चुनौतियां और षडयंत्र (जैसे इस्लामीकरण या गजवा-ए-हिंद की सोच) मौजूद हों, तो हिंदू संतों को आपस में विवादों से बचना चाहिए। तीर्थ स्थानों पर स्नान या पालकी जैसे विषयों पर झगड़ा करना साधुत्व के विपरीत है।

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तीर्थराज प्रयागराज की पवित्रता

मेले के महत्व पर प्रकाश डालते हुए योग गुरु ने कहा कि यह स्थान केवल नाम, जप और तप के लिए है। उन्होंने दुःख प्रकट किया कि कुछ लोग पवित्र तीर्थों को भी अपने निजी एजेंडे और ‘अहं’ की तुष्टि का केंद्र बना लेते हैं। बाबा रामदेव ने स्पष्ट किया कि त्रिवेणी संगम मुक्ति का मार्ग प्रशस्त करता है, न कि किसी की व्यक्तिगत प्रतिष्ठा को सिद्ध करने का स्थान। उनके अनुसार, तीर्थों में संयम और अध्यात्म सर्वोपरि होना चाहिए।

योगी सरकार की प्रबंधन क्षमता की सराहना

संगम स्नान के अपने अनुभव को साझा करते हुए बाबा रामदेव ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली उत्तर प्रदेश सरकार की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि जिस कुशलता के साथ सीएम योगी ने माघ मेले का आयोजन और प्रबंधन किया है, वह सराहनीय है। घाटों की दिव्य व्यवस्था, आध्यात्मिक वातावरण और सुरक्षा के इंतजामों को देखकर उनकी आत्मा हर्षित हुई। उन्होंने इस प्रबंधन को राजधर्म का उत्कृष्ट उदाहरण बताया।

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अविमुक्तेश्वरानंद और पुलिस प्रशासन के बीच हुई झड़प

ज्ञात हो कि यह विवाद 17 जनवरी को माघ अमावस्या के अवसर पर शुरू हुआ था। शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद अपने पूरे लाव-लश्कर और रथ के साथ स्नान के लिए जा रहे थे, लेकिन सुरक्षा कारणों से पुलिस प्रशासन ने उन्हें रथ छोड़कर आगे बढ़ने को कहा। इसके बाद संतों और पुलिस के बीच तीखी बहस हुई। शंकराचार्य ने इसे अपमानजनक बताते हुए प्रशासन पर जानबूझकर मान-सम्मान को ठेस पहुँचाने का आरोप लगाया है और तब से वे मेले में ही धरने पर बैठे हैं।