Bareilly MLC Result: शिक्षक MLC चुनाव में BJP का दबदबा, सपा को कितनी सीटों पर मिली कामयाबी?

उत्तर प्रदेश शिक्षक एमएलसी चुनाव में बीजेपी के डॉ. हरि सिंह ढिल्लो ने बरेली-मुरादाबाद सीट पर दूसरी बार जीत दर्ज की। उन्होंने सपा के हाजी दानिश अख्तर को 17,676 वोटों से हराया। वहीं, वाराणसी में लाल बिहारी यादव और लखनऊ में उमेश द्विवेदी भी दोबारा जीते। मेरठ की शिक्षक और स्नातक सीटों पर भी बीजेपी ने जीत हासिल की।

Bareilly MLC Result

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

अक्टूबर 28, 2026

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Bareilly MLC Result: उत्तर प्रदेश विधान परिषद के शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के नतीजे सामने आ गए हैं। बरेली-मुरादाबाद खंड शिक्षक सीट पर बीजेपी के डॉ. हरि सिंह ढिल्लो ने लगातार दूसरी बार जीत दर्ज की है। उन्होंने समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी हाजी दानिश अख्तर को 17,676 वोटों के बड़े अंतर से हराया। ढिल्लो को कुल 21,672 वोट मिले, जबकि दानिश अख्तर के खाते में 3,996 वोट आए। मतगणना के पहले राउंड से ही ढिल्लो ने बढ़त बना ली थी, जो आखिरी राउंड तक कायम रही।

वाराणसी, लखनऊ और मेरठ में भी चुनावी मुकाबले के नतीजे

शिक्षक और स्नातक एमएलसी चुनाव में बीजेपी और सपा के प्रत्याशियों ने कई सीटों पर दोबारा जीत हासिल की। वाराणसी खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से सपा के लाल बिहारी यादव फिर विजयी हुए। वहीं, लखनऊ खंड शिक्षक सीट पर बीजेपी के उमेश द्विवेदी ने सपा प्रत्याशी सुशील कुमार को छह हजार से ज्यादा वोटों से हराया। मेरठ खंड शिक्षक सीट पर बीजेपी के श्रीचंद शर्मा और स्नातक सीट पर दिनेश गोयल ने जीत दर्ज की।

हरि सिंह ढिल्लो बोले- यह मेरी नहीं, शिक्षकों की जीत

जीत के बाद डॉ. हरि सिंह ढिल्लो ने कहा कि यह चुनाव उनका व्यक्तिगत चुनाव नहीं, बल्कि पूरे शिक्षक समुदाय का चुनाव था। उन्होंने अपनी जीत का श्रेय शिक्षकों को दिया। ढिल्लो ने कहा कि शिक्षकों के सम्मान को बढ़ाने के लिए एजुकेशन एक्ट लागू कराने की दिशा में काम करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि वह लगातार शिक्षकों की समस्याएं मुख्यमंत्री के सामने उठाते रहे हैं। मुख्यमंत्री ने भी मंच से इस बात का जिक्र किया था।

‘नाम है हरि सिंह ढिल्लो, जब चाहो आकर मिल लो’ बना चुनावी नारा

डॉ. हरि सिंह ढिल्लो की जीत के पीछे उनकी लगातार सक्रियता को भी अहम माना जा रहा है। पिछले छह सालों में वह बरेली और मुरादाबाद मंडल के अलग-अलग जिलों में जाकर शैक्षणिक संस्थानों के शिक्षकों से मिलते रहे। चुनाव के दौरान उनका नारा ‘नाम है हरि सिंह ढिल्लो, जब चाहो आकर मिल लो’ काफी लोकप्रिय हुआ। शिक्षकों के बीच उनकी सहज पहुंच और समस्याओं को उठाने की छवि ने भी उन्हें फायदा पहुंचाया।

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पांच राउंड की मतगणना में शुरू से आगे रहे बीजेपी प्रत्याशी

बरेली के संजय कम्युनिटी हॉल में मंगलवार को सुबह आठ बजे मतपेटियां खोलने का काम शुरू हुआ। मतपत्रों की छंटाई के बाद करीब चार बजे 35,161 मतों की गिनती शुरू हुई। इसके लिए आठ टेबल लगाई गई थीं। पहले राउंड में ढिल्लो को 5,251 वोट मिले, जबकि दानिश अख्तर को 816 वोट हासिल हुए। दूसरे राउंड तक बीजेपी प्रत्याशी की बढ़त बढ़कर 8,546 वोट हो गई। तीसरे राउंड के बाद उनकी बढ़त 12,248 वोट तक पहुंच गई। चौथे राउंड में भी ढिल्लो आगे रहे और अंतिम नतीजे में 17,676 वोटों से जीत दर्ज की।

सपा प्रत्याशी ने फर्जी वोटिंग का लगाया आरोप

हार के बाद सपा प्रत्याशी हाजी दानिश अख्तर ने चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उन्होंने 23 अक्टूबर को लोकतंत्र का काला दिवस बताते हुए अमरोहा जिले में वोटों की लूट का आरोप लगाया। दानिश अख्तर के मुताबिक, मंडी धनौरा में उन्होंने खुद फर्जी वोटिंग पकड़ी और अधिकारियों को इसकी जानकारी दी। हालांकि, उनके आरोपों की पुष्टि के लिए स्वतंत्र जांच की जानकारी सामने नहीं आई है।

शिक्षक संगठनों की राजनीति पर भी पड़ा चुनावी असर

इस चुनाव के नतीजों ने शिक्षक संगठनों की पारंपरिक राजनीति पर भी सवाल खड़े किए हैं। पहले शिक्षक एमएलसी चुनाव में शिक्षक संघों के उम्मीदवारों का दबदबा रहता था, लेकिन अब बीजेपी और सपा जैसे राजनीतिक दलों की सक्रियता बढ़ गई है। बरेली में चुनाव के दौरान 17 प्रत्याशी मैदान में थे, लेकिन प्रमुख रूप से बीजेपी, सपा और दो शिक्षक संगठनों के प्रत्याशियों के कैंप ही नजर आए।

3,183 वोट निरस्त, मतपत्र भरने में हुई गलतियां

बरेली-मुरादाबाद शिक्षक एमएलसी चुनाव में इस बार 3,183 वोट निरस्त हुए, जबकि पिछली बार यह संख्या करीब 1,500 थी। मतदाताओं को अपनी पसंद के प्रत्याशी के सामने निर्धारित तरीके से अंक ‘1’ लिखना था, लेकिन कई मतपत्रों पर गोला बनाने, दोहरा निशान लगाने या हस्ताक्षर करने जैसी गलतियां मिलीं। बताया गया कि निरस्त मतों में ढिल्लो के मतपत्र भी बड़ी संख्या में शामिल थे। हालांकि, इतनी बड़ी संख्या में वोट निरस्त होने से चुनाव प्रक्रिया और मतपत्र भरने के तरीके को लेकर चर्चा तेज हो गई है।