Judge Transfer 2026 : यूपी न्यायिक विभाग में बड़ा फेरबदल, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने किया 1,086 जजों का तबादला

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने वार्षिक स्थानांतरण नीति के तहत उत्तर प्रदेश न्यायिक सेवा में अब तक का सबसे बड़ा फेरबदल किया है। 1,086 न्यायिक अधिकारियों के कार्यक्षेत्र रातों-रात बदल दिए गए हैं, जिसमें एडीजे से लेकर सिविल जज तक शामिल हैं। क्या इस प्रशासनिक बदलाव का असर लंबित केसों पर पड़ेगा?

Judge Transfer 2026

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

अप्रैल 11, 2026

Judge Transfer 2026 : उत्तर प्रदेश की न्यायिक प्रणाली में कार्यकुशलता और पारदर्शिता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण कदम उठाया है। हाल ही में हुए 700 अधिकारियों के तबादले के कुछ ही दिनों बाद, कोर्ट ने अब एक और विशाल प्रशासनिक फेरबदल किया है। इस नए आदेश के तहत प्रदेश भर के एक हजार से अधिक न्यायिक अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। यह कदम राज्य की जिला अदालतों में लंबित मामलों के निस्तारण और प्रशासनिक कामकाज को और अधिक सुव्यवस्थित करने की दिशा में एक बड़ा प्रयास माना जा रहा है।

स्थानांतरण का विवरण: तीन श्रेणियों में बांटे गए 1,086 न्यायिक अधिकारी

हाई कोर्ट द्वारा जारी आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, इस फेरबदल की जद में कुल 1,086 जज आए हैं। इन तबादलों को तीन मुख्य श्रेणियों में विभाजित किया गया है ताकि निचले स्तर से लेकर जिला स्तर तक की अदालतों में संतुलन बना रहे:

  • अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (ADJ): इस रैंक के 408 अधिकारियों का तबादला किया गया है।

  • सिविल जज (सीनियर डिवीजन): वरिष्ठ स्तर के 277 न्यायाधीशों को नए कार्यक्षेत्र आवंटित हुए हैं।

  • सिविल जज (जूनियर डिवीजन): कनिष्ठ स्तर के 401 अधिकारियों के स्थान में परिवर्तन किया गया है।

यह व्यापक बदलाव दर्शाता है कि उच्च न्यायालय प्रदेश की न्यायिक मशीनरी को पूरी तरह से सक्रिय और ऊर्जावान बनाए रखना चाहता है।

चीफ जस्टिस अरुण भंसाली का आदेश और नई नियुक्तियों की घोषणा

न्यायिक अधिकारियों के स्थानांतरण की यह पूरी प्रक्रिया इलाहाबाद हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली के निर्देशानुसार संपन्न की गई है। इस सूची में न केवल जिला अदालतों के न्यायाधीश शामिल हैं, बल्कि हाई कोर्ट के प्रशासनिक ढांचे में भी कुछ महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। इसी क्रम में, बुलंदशहर में तैनात एडीजे वरुण मोहित निगम को एक बड़ी जिम्मेदारी सौंपते हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट का नया रजिस्ट्रार (लिस्टिंग) नियुक्त किया गया है। उनकी यह भूमिका मुकदमों की सूचीबद्धता और अदालती प्रक्रिया को गति देने में सहायक सिद्ध होगी।

समय सीमा का निर्धारण: 15 अप्रैल तक कार्यभार ग्रहण करना अनिवार्य

प्रशासनिक कार्यों में विलंब को रोकने के लिए हाई कोर्ट ने सख्त समय सीमा भी निर्धारित की है। जारी आदेश में स्पष्ट रूप से निर्देश दिया गया है कि स्थानांतरित किए गए सभी अधिकारियों को 15 अप्रैल की दोपहर तक अपनी वर्तमान तैनाती से कार्यमुक्त होना होगा। चार्ज सौंपने के तत्काल बाद, उन्हें अपनी नई पोस्टिंग के स्थान पर जाकर कार्यभार संभालना अनिवार्य है। कोर्ट की मंशा साफ है कि इस फेरबदल के कारण न्यायिक कार्यों में किसी भी प्रकार का व्यवधान उत्पन्न न हो और आम जनता को अदालती कार्यवाही का लाभ निर्बाध रूप से मिलता रहे।

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