UP Farmers: योगी सरकार का बड़ा फैसला, यूपी के किसानों को गेहूं खरीद में राहत

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किसानों को बड़ी राहत देते हुए गेहूं खरीद के लिए 'फार्मर रजिस्ट्री' की अनिवार्यता को समाप्त कर दिया है।

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

अप्रैल 20, 2026

UP Farmers: उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने किसानों के हित में एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है, जिससे गेहूं खरीद प्रक्रिया को लेकर लंबे समय से चली आ रही परेशानियों में बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने निर्देश जारी करते हुए कहा है कि अब किसानों को सरकारी क्रय केंद्रों पर गेहूं बेचने के लिए फॉर्मर रजिस्ट्री की अनिवार्यता नहीं होगी।

इस निर्णय के बाद प्रदेश के किसान बिना किसी अतिरिक्त पंजीकरण प्रक्रिया के अपनी फसल सीधे सरकारी खरीद केंद्रों पर बेच सकेंगे। सरकार का यह कदम किसानों की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए लिया गया है, जिससे खरीद प्रक्रिया को आसान और तेज बनाया जा सके।

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जिलाधिकारियों को तत्काल आदेश लागू करने के निर्देश

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस फैसले को तुरंत लागू करने के लिए सभी जिलाधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा है कि किसी भी स्तर पर किसानों को असुविधा नहीं होनी चाहिए और पुरानी व्यवस्था के अनुसार ही गेहूं की खरीद सुनिश्चित की जाए।

सरकार का मानना है कि फॉर्मर रजिस्ट्री की अनिवार्यता के कारण कई किसानों को फसल बेचने में कठिनाई हो रही थी, जिससे खरीद प्रक्रिया धीमी पड़ रही थी। ऐसे में इस बाधा को हटाकर व्यवस्था को सरल बनाने का निर्णय लिया गया है।

किसानों की समस्याओं को देखते हुए लिया गया फैसला

पिछले कुछ समय से कई किसानों ने शिकायत की थी कि तकनीकी कारणों और पंजीकरण प्रक्रिया पूरी न होने के कारण वे अपनी गेहूं की फसल समय पर नहीं बेच पा रहे थे। इसके चलते क्रय केंद्रों पर भीड़ और देरी जैसी समस्याएं सामने आ रही थीं।

इन सभी समस्याओं को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने फॉर्मर रजिस्ट्री की अनिवार्यता समाप्त कर दी है, ताकि किसान बिना किसी जटिल प्रक्रिया के अपनी उपज बेच सकें और उन्हें न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) का पूरा लाभ मिल सके।

गेहूं खरीद प्रक्रिया होगी आसान और तेज

इस नए निर्णय के बाद अब किसानों को सरकारी क्रय केंद्रों पर लंबी प्रक्रियाओं या तकनीकी बाधाओं का सामना नहीं करना पड़ेगा। किसान आसानी से अपनी फसल बेच सकेंगे, जिससे खरीद प्रक्रिया में तेजी आएगी और समय की बचत भी होगी। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी किसान को अपनी उपज बेचने में किसी तरह की परेशानी न हो और उन्हें समय पर भुगतान और उचित मूल्य मिल सके।

लापरवाही पर सख्त कार्रवाई के निर्देश

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को यह भी स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि किसी भी किसान को फसल बेचने में कठिनाई होती है या फॉर्मर रजिस्ट्री के अभाव में खरीद रोकी जाती है, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। सरकार ने यह भी निर्देश दिया है कि क्रय केंद्रों पर किसानों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, ताकि खरीद प्रक्रिया सुचारू और पारदर्शी तरीके से चल सके।

किसानों में खुशी की लहर

इस फैसले के बाद प्रदेश के किसानों में खुशी का माहौल है। अब उन्हें फसल बेचने के लिए अतिरिक्त औपचारिकताओं या लंबी प्रतीक्षा का सामना नहीं करना पड़ेगा। इससे न केवल उनकी परेशानियां कम होंगी, बल्कि गेहूं खरीद व्यवस्था भी पहले की तरह सरल और प्रभावी हो सकेगी। कुल मिलाकर, यह फैसला किसानों के लिए राहत भरा माना जा रहा है और इससे सरकारी खरीद प्रक्रिया को नई गति मिलने की उम्मीद है।

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