UP Election 2027: उत्तर प्रदेश में विधानसभा और लोकसभा दोनों की सीटों को बढ़ाने पर विचार चल रहा है। नारी वंदन अधिनियम में प्रस्तावित संशोधन के बाद संभावित परिसीमन (Delimitation) के तहत विधानसभा और लोकसभा की सीटों में लगभग 50 प्रतिशत तक वृद्धि की संभावना जताई जा रही है।
अगर यह प्रस्ताव लागू होता है, तो उत्तर प्रदेश में लोकसभा के वर्तमान 80 निर्वाचन क्षेत्रों की संख्या बढ़कर 120 तक जा सकती है। इसी क्रम में विधानसभा की सीटें भी बढ़कर 605 तक पहुंच सकती हैं। इस बदलाव से प्रदेश के 75 जिलों में विधानसभा सीटों का औसत 3-5 से बढ़कर 6-8 तक होने की उम्मीद है।
सीटों में वृद्धि और आबादी का अनुपात
पहले विधानसभा चुनाव 1952 में उत्तर प्रदेश की आबादी लगभग 6.32 करोड़ थी और उस समय विधानसभा में 347 सीटें थीं। इस हिसाब से एक सीट पर औसतन 1.82 लाख लोग आते थे सन् 1971 तक आबादी बढ़कर 8.83 करोड़ हो गई और 1973 में हुए परिसीमन के बाद सीटों की संख्या बढ़ाकर 403 कर दी गई। उस समय प्रति सीट आबादी लगभग 2.19 लाख थी।
हालांकि, इसके बाद विधानसभा सीटों की संख्या स्थिर रह गई और 2011 तक प्रदेश की आबादी लगभग 19.98 करोड़ हो गई। इसका मतलब यह हुआ कि फिलहाल एक विधानसभा सीट पर औसतन 4.95 लाख लोग हैं। अगर नई संख्या 605 सीटें होती हैं, तो 2011 की आबादी के अनुसार प्रति विधानसभा सीट लगभग 3.30 लाख लोग होंगे।
2027 और 2032 चुनाव पर प्रभाव
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह बदलाव होता है, तो 2027 विधानसभा चुनावों पर फिलहाल इसका असर नहीं पड़ेगा, क्योंकि परिसीमन प्रक्रिया समय लेती है। इसके बाद संभावना है कि 2032 में उत्तर प्रदेश से 600 से अधिक विधायक चुने जाएं।
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सबसे बड़े और सबसे छोटे विधानसभा क्षेत्र
उत्तर प्रदेश में फिलहाल कुछ विधानसभा क्षेत्र आबादी के लिहाज से काफी बड़े हैं। उदाहरण के लिए:
- साहिबाबाद – लगभग 12 लाख मतदाता
- लोनी – लगभग 8 लाख मतदाता
- मुरादनगर – लगभग 7.5 लाख मतदाता
वहीं सबसे छोटी विधानसभा क्षेत्रों में महोबा और सीसामऊ शामिल हैं। इन छोटे और बड़े क्षेत्रों के बीच संतुलन बनाने के लिए परिसीमन आवश्यक माना जा रहा है।









