UP Election 2027: योगी की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति बनाम सपा की ‘वापसी’ की जंग, ग्राउंड पर क्या हैं ‘पीतल नगरी’ मुरादाबाद नगर सीट के असली मुद्दे?

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर मुरादाबाद नगर सीट पर सियासी मुकाबला दिलचस्प होने वाला है। 2022 में भाजपा ने महज 782 वोटों से जीत दर्ज की थी। पीतल कारोबार की चुनौतियां, जलभराव, ट्रैफिक जाम, प्रदूषण और स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली जैसे मुद्दे इस बार चुनावी नतीजों को प्रभावित कर सकते हैं।

UP Election 2027

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

नवम्बर 6, 2026

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UP Election 2027: देश के सबसे बड़े सियासी सूबे उत्तर प्रदेश की आबोहवा में राजनीतिक सरगर्मी तेज होने लगी है। जैसे-जैसे आगामी विधानसभा चुनाव का वक्त नजदीक आ रहा है, लखनऊ के गलियारों से लेकर पूर्वांचल के गांवों और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के खेतों तक, हर तरफ बस एक ही चर्चा है—इस बार ऊंट किस करवट बैठेगा? यूपी की राजनीति का इतिहास गवाह रहा है कि,यहां सत्ता का रास्ता किसी एक फॉर्मूले से नहीं, बल्कि क्षेत्रीय इतिहास, सीटों के मिजाज और अचूक जातिगत समीकरणों के जटिल ताने-बाने से होकर गुजरता है।

विजय रथ को बरकरार रखने की कोशिश

विजय रथ को बरकरार रखने की कोशिश

चुनावी इतिहास पर नजर डालें तो स्पष्ट होता है कि,उत्तर प्रदेश की हर एक सीट का अपना अलग सामाजिक भूगोल है। एक तरफ सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी अपने ‘सबका साथ, सबका विकास’ के नैरेटिव और राष्ट्रवाद के साथ-साथ गैर-यादव पिछड़ों (OBC) और सवर्ण गठजोड़ को साधकर अपने विजय रथ को बरकरार रखने की पूरी ताकत झोंक रही है। वहीं दूसरी तरफ, मुख्य विपक्षी समाजवादी पार्टी अपने ‘PDA’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले और आक्रामक सामाजिक न्याय की पिच के जरिए चुनावी समीकरणों को पलटने की जुगत में है।

मुरादाबाद नगर विधानसभा सीट पर कांटे की लड़ाई

उत्तर प्रदेश की राजनीति में पश्चिमी यूपी के ‘पीतल नगरी’ यानी मुरादाबाद का अपना एक अलग सियासी रसूख है। मुरादाबाद जिले की 6 विधानसभा सीटों में सबसे हाई-प्रोफाइल और शहरी मिजाज वाली सीट मुरादाबाद नगर मानी जाती है। 2027 के विधानसभा चुनाव की आहट के साथ ही इस सीट पर सियासी बिसात बिछनी शुरू हो गई है।

भौगोलिक क्षेत्र और राजनीतिक महत्व

मुरादाबाद नगर विधानसभा क्षेत्र पूरी तरह से शहरी और अर्ध-शहरी इलाकों का मिश्रण है। यह मुरादाबाद लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है।

प्रमुख इलाके: इसमें मुरादाबाद नगर निगम के अधिकांश वार्ड आते हैं, जिनमें सिविल लाइंस, लाइनपार, बुध बाजार, कटघर, मंडी चौक, गुलजारीमल धर्मशाला, जामा मस्जिद क्षेत्र, और पीतल बस्ती जैसे घनी आबादी वाले इलाके शामिल हैं।

मतदाताओं की कुल संख्या और जातीय समीकरण (अनुमानित)

मतदाताओं की कुल संख्या और जातीय समीकरण (अनुमानित)

मुरादाबाद नगर सीट पर मतदाताओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। 2022 के विधानसभा चुनाव और उसके बाद हुए मतदाता पुनरीक्षण (SIR) के आंकड़ों के आधार पर यहां  कुल मतदाताओं की संख्या लगभग 5.25 लाख से 5.40 लाख के बीच है (जिसमें पुरुष मतदाता करीब 2.85 लाख और महिला मतदाता करीब 2.45 लाख हैं)।

वर्ग / जातिअनुमानित वोट प्रतिशतप्रभावशाली क्षेत्र और रुझान
मुस्लिम मतदातालगभग 45% – 48%पुराने शहर, जामा मस्जिद, पीतल बस्ती, कटघर के कुछ हिस्से। (अंसारी, सैफी, तुर्क और पठान बिरादरी का दबदबा)।
वैश्य (बनिया) और पंजाबीलगभग 14% – 16%सिविल लाइंस, बुध बाजार, रेलवे कॉलोनी, गंज बाजार। पीतल कारोबार पर मजबूत पकड़।
दलित (अनुसूचित जाति)लगभग 11% – 13%लाइनपार और बाहरी वार्डों में निर्णायक भूमिका (जाटव और वाल्मीकि समाज)।
सैनी, कश्यप और अन्य OBCलगभग 12% – 14%लाइनपार, मझोला और कटघर क्षेत्र। गैर-यादव ओबीसी वोट बैंक।
ब्राह्मण, ठाकुर और कायस्थलगभग 9% – 11%सिविल लाइंस, रामगंगा विहार और आशियाना कॉलोनी क्षेत्र।

2012 से 2022 तक किसने दिखाया दमखम?

पिछले तीन विधानसभा चुनावों में इस सीट पर समाजवादी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी के बीच सीधा और बेहद रोमांचक मुकाबला देखने को मिला है।

2012 विधानसभा चुनाव (सपा की वापसी): इस चुनाव में प्रदेश में सपा की लहर थी। समाजवादी पार्टी के मोहम्मद युसूफ अंसारी ने भाजपा के मजबूत नेता रितेश कुमार गुप्ता को बेहद करीबी मुकाबले में हराया था।

विजेता: मोहम्मद युसूफ अंसारी (सपा) – लगभग 88,341 वोट

मोहम्मद युसूफ अंसारी

उपविजेता: रितेश कुमार गुप्ता (भाजपा) – लगभग 86,303 वोट

जीत का अंतर: मात्र 2,038 वोट

2017 विधानसभा चुनाव

मोदी लहर और हिंदू वोटों के एकजुट होने का सीधा फायदा भाजपा को मिला। 2012 की हार का बदला लेते हुए भाजपा के रितेश कुमार गुप्ता ने मौजूदा विधायक युसूफ अंसारी को शिकस्त दी।

विजेता: रितेश कुमार गुप्ता (भाजपा) – लगभग 1,23,467 वोट

रितेश कुमार गुप्ता

उपविजेता: मोहम्मद युसूफ अंसारी (सपा) – लगभग 1,20,274 वोट

जीत का अंतर: 3,193 वोट

2022 विधानसभा चुनाव :

2022 का चुनाव इस सीट के इतिहास के सबसे रोचक चुनावों में से एक रहा। दोनों पार्टियों को 1.40 लाख से ज्यादा वोट मिले, लेकिन अंत में बाजी फिर भाजपा के हाथ लगी।

विजेता: रितेश कुमार गुप्ता (भाजपा) – 1,48,384 वोट (49.35%)

उपविजेता: मोहम्मद युसूफ अंसारी (सपा) – 1,47,602 वोट (49.09%)

जीत का अंतर: मात्र 782 वोट

2027 में जाति और ध्रुवीकरण कितना बड़ा रोल अदा करेगा?

मुरादाबाद नगर सीट का इतिहास गवाह है कि, यहां सीधी लड़ाई ‘हिंदू बनाम मुस्लिम‘ ध्रुवीकरण या फिर ‘जातीय बिखराव‘ के इर्द-गिर्द घूमती है।

भाजपा की रणनीति: चूंकि यहां मुस्लिम आबादी लगभग आधी है, इसलिए भाजपा की पूरी कोशिश वैश्य, पंजाबी, ब्राह्मण, ठाकुर के साथ-साथ गैर-यादव ओबीसी (सैनी, कश्यप, प्रजापति) और दलित वोटों को एकजुट रखने की होती है। यदि हिंदू वोटों में बिखराव नहीं होता, तो भाजपा मजबूत स्थिति में रहती है।

भाजपा

सपा/विपक्ष की रणनीति: समाजवादी पार्टी की नजर एकमुश्त मुस्लिम वोटों के साथ-साथ दलित या ओबीसी (विशेषकर सैनी/कश्यप) वोटों में सेंध लगाने पर रहती है। 2027 में यदि विपक्षी दल किसी ऐसे चेहरे पर दांव लगाते हैं जो मुस्लिम वोटों के बंटवारे को रोक सके, तो मुकाबला बेहद कांटे का होगा।

सपा/विपक्ष

2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के रितेश गुप्ता ने महज 782 वोटों के बेहद मामूली अंतर से जीत दर्ज की थी। ऐसे में 2027 के चुनाव से पहले इस हाई-प्रोफाइल सीट का सियासी मिजाज और जनता की जमीनी समस्याएं क्या हैं, आइए विस्तार से समझते हैं:

पीतल और हस्तशिल्प उद्योग पर वैश्विक संकट और महंगाई की मार

मुरादाबाद नगर की अर्थव्यवस्था की रीढ़ यहां का पीतल और मेटल हैंडीक्राफ्ट उद्योग है, जिससे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लाखों लोगों को रोजगार मिलता है।

कच्चा माल महंगा और ऑर्डर घटे: हालांकि कानून-व्यवस्था में सुधार और ‘एक जिला एक उत्पाद’ (ODOP) योजना से कारोबारियों को सुरक्षा और प्रोत्साहन मिला है, लेकिन हाल के महीनों में वैश्विक अस्थिरता (विशेषकर पश्चिम एशिया संकट) के कारण तांबा, जस्ता, एल्युमीनियम और स्टेनलेस स्टील जैसे कच्चे माल की कीमतों में 30 से 35 फीसदी तक का उछाल आया है।

छोटे कारीगरों की मुश्किलें: अमेरिका और यूरोप से निर्यात के ऑर्डर कम होने और माल ढुलाई (कंटेनर) महंगी होने का सीधा असर छोटे निर्यातकों, भट्टी संचालकों और दिहाड़ी कारीगरों की आमदनी पर पड़ रहा है।

जलभराव और बदहाल ड्रेनेज सिस्टम

जलभराव और बदहाल ड्रेनेज सिस्टम

मुरादाबाद नगर क्षेत्र की सबसे पुरानी और विकराल समस्याओं में से एक जलभराव है। मानसून के दौरान ही नहीं, बल्कि सामान्य दिनों में भी नालों की सफाई न होने और मुख्य नालों पर अवैध अतिक्रमण के कारण कई रिहायशी कॉलोनियों और निचले इलाकों की सड़कों पर गंदा पानी भर जाता है।

भीषण ट्रैफिक जाम और बाजारों में अतिक्रमण

भीषण ट्रैफिक जाम और बाजारों में अतिक्रमण

शहर की बढ़ती आबादी और वाहनों की संख्या के मुकाबले सड़कें संकरी होती जा रही हैं।

बुध बाजार, गंज बाजार, मंडी चौक, इंपीरियल तिराहा और स्टेशन रोड जैसे प्रमुख व्यावसायिक इलाकों में अतिक्रमण और ई-रिक्शा की अनियंत्रित संख्या के कारण दिनभर भीषण जाम की स्थिति बनी रहती है।

पार्किंग की उचित व्यवस्था न होने से व्यापारियों और ग्राहकों दोनों को रोजाना जूझना पड़ता है, जिसका असर स्थानीय खुदरा व्यापार पर भी पड़ रहा है।

बिजली की अघोषित कटौती और लो-वोल्टेज

बिजली की अघोषित कटौती और लो-वोल्टेज

शहरी क्षेत्र होने के बावजूद गर्मी और उमस के मौसम में बिजली की ट्रिपिंग, लो-वोल्टेज और जर्जर तारों के टूटने की समस्या आम जनता और लघु उद्योगों को परेशान करती है। छोटे कारखानों और घरेलू कारीगरों को निर्बाध बिजली न मिलने से उत्पादन प्रभावित होता है और जनरेटर के इस्तेमाल से लागत बढ़ जाती है।

स्वास्थ्य सेवाओं और सरकारी अस्पतालों पर बढ़ता दबाव

मुरादाबाद मंडल मुख्यालय होने के कारण यहां के जिला अस्पताल और महिला अस्पताल पर आसपास के जिलों के मरीजों का भी भारी दबाव रहता है।

स्थानीय नागरिकों की शिकायत है कि सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी, जांच मशीनों की खराबी और लंबी कतारों के कारण मध्यम व गरीब वर्ग के लोगों को मजबूरन महंगे निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ता है।

प्रदूषण और रामगंगा नदी की स्वच्छता का मुद्दा

पीतल की ढलाई, पॉलिशिंग और केमिकल वॉशिंग के कारण शहर में वायु और जल प्रदूषण एक गंभीर चुनौती है। अवैध रूप से संचालित होने वाली भट्टियों से निकलने वाला धुआं और बिना ट्रीटमेंट के नालों के जरिए रामगंगा नदी में गिरने वाला रासायनिक कचरा शहरवासियों के स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा बना हुआ है।

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