UP BJP Campaign: चुनाव से पहले बीजेपी का बड़ा दांव, तीन दिन प्रदेशभर में पदयात्राएं

यूपी विधानसभा चुनाव 2027 से पहले बीजेपी ने तीन दिवसीय प्रदेशव्यापी अभियान का ऐलान किया है। लखनऊ से गाजियाबाद तक पदयात्राएं निकलेंगी। योगी आदित्यनाथ, शिवराज सिंह चौहान और जेपी नड्डा समेत कई बड़े नेता मैदान में उतरेंगे। आखिर इस अभियान के जरिए बीजेपी विपक्ष को कौन सा राजनीतिक संदेश देना चाहती है?

UP BJP Campaign

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

नवम्बर 3, 2026

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UP BJP Campaign : उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर सियासी सरगर्मियां तेज होने लगी हैं। बीजेपी ने विपक्ष के खिलाफ राजनीतिक माहौल तैयार करने और जनता के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए प्रदेशव्यापी अभियान का ऐलान किया है। पार्टी की ओर से ‘लोकतंत्र बचाओ-अराजकता हटाओ’ अभियान चलाया जा रहा है। यह विशेष अभियान 3 नवंबर से 5 नवंबर तक चलेगा। इसके तहत प्रदेश के सभी छह प्रमुख संगठनात्मक क्षेत्रों में पदयात्राएं निकाली जाएंगी। इन कार्यक्रमों में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से लेकर केंद्रीय मंत्रियों और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं तक की भागीदारी रहेगी।

2027 चुनाव से पहले बीजेपी का प्रदेशव्यापी अभियान

बीजेपी का यह अभियान आगामी विधानसभा चुनाव से पहले संगठन को सक्रिय करने और विपक्ष के राजनीतिक आरोपों का जवाब देने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। पार्टी का मुख्य उद्देश्य वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर (SIR) को लेकर विपक्ष की ओर से बनाए जा रहे नैरेटिव का मुकाबला करना है। इसके साथ ही बीजेपी कार्यकर्ता पदयात्राओं के माध्यम से आम जनता तक पहुंचेंगे और पार्टी का पक्ष रखेंगे।

बीजेपी प्रदेश महामंत्री और अभियान प्रभारी दिलीप पटेल के मुताबिक, तीन दिनों तक चलने वाले इस कार्यक्रम में प्रदेश के छह प्रमुख संगठनात्मक क्षेत्रों को शामिल किया गया है। पार्टी ने अलग-अलग शहरों में वरिष्ठ नेताओं की जिम्मेदारी तय की है, ताकि अभियान को व्यापक स्तर पर सफल बनाया जा सके।

लखनऊ और बरेली में पहले दिन दिग्गज नेताओं की एंट्री

अभियान के पहले दिन यानी 3 नवंबर को राजधानी लखनऊ और बरेली में बीजेपी का शक्ति प्रदर्शन देखने को मिलेगा। लखनऊ में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान, प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी, उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक और प्रदेश महामंत्री (संगठन) धर्मपाल सिंह पदयात्रा का नेतृत्व करेंगे।

पार्टी की योजना इस कार्यक्रम के जरिए राजधानी में कार्यकर्ताओं को एकजुट करने और जनता के बीच अपनी राजनीतिक रणनीति को पहुंचाने की है। वहीं बरेली में पूर्व बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी संयुक्त रूप से अभियान की कमान संभालेंगे। यहां भी पदयात्रा के साथ जनसंवाद कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।

4 नवंबर को गोरखपुर, प्रयागराज और कानपुर में जुटेंगे बड़े नेता

अभियान के दूसरे दिन 4 नवंबर को बीजेपी पूर्वांचल और मध्य उत्तर प्रदेश में अपनी ताकत दिखाएगी। गोरखपुर में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी पदयात्रा में शामिल होंगे। इन दिग्गज नेताओं की मौजूदगी से पूर्वांचल में पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच उत्साह बढ़ाने की कोशिश की जाएगी।

वहीं प्रयागराज में उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य पदयात्रा का नेतृत्व करेंगे। औद्योगिक शहर कानपुर में उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ सड़क पर उतरेंगे। इन कार्यक्रमों के माध्यम से बीजेपी विपक्ष के आरोपों का जवाब देने के साथ आगामी चुनाव के लिए राजनीतिक माहौल बनाने की कोशिश करेगी।

5 नवंबर को गाजियाबाद में योगी करेंगे अभियान का समापन

बीजेपी के इस तीन दिवसीय अभियान का समापन 5 नवंबर को पश्चिमी उत्तर प्रदेश के महत्वपूर्ण जिले गाजियाबाद में होगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद पदयात्रा का नेतृत्व करेंगे। इस दौरान पश्चिमी उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ पार्टी पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं के शामिल होने की संभावना है।

गाजियाबाद को समापन स्थल चुनना भी राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में किसानों, युवाओं और विभिन्न सामाजिक वर्गों के बीच राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए बीजेपी इस क्षेत्र में अपनी संगठनात्मक सक्रियता बढ़ाना चाहती है।

विपक्ष के नैरेटिव का जवाब देने की तैयारी

बीजेपी का ‘लोकतंत्र बचाओ-अराजकता हटाओ’ अभियान केवल पदयात्राओं तक सीमित नहीं रहने वाला है। पार्टी इसके जरिए एसआईआर और दूसरे राजनीतिक मुद्दों पर विपक्ष के आरोपों का जवाब देने की तैयारी में है। कार्यकर्ताओं को जनता के बीच जाकर संवाद करने और पार्टी का पक्ष रखने की जिम्मेदारी दी गई है।

राजनीतिक नजरिए से देखें तो 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी का यह अभियान संगठन की ताकत परखने और कार्यकर्ताओं को चुनावी मोड में लाने की कोशिश है। अब देखना होगा कि तीन दिनों की इन पदयात्राओं से पार्टी को जमीनी स्तर पर कितना राजनीतिक लाभ मिलता है और विपक्ष इस अभियान का जवाब किस रणनीति से देता है।

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