UP Election 2027: अमेठी की तिलोई सीट पर क्या बदलेगा सियासी गणित? पुराने नतीजे दे रहे संकेत

अमेठी की तिलोई विधानसभा सीट का चुनावी इतिहास कांग्रेस, बीजेपी और समाजवादी पार्टी के बीच बदलते समीकरणों से भरा रहा है। 2022 में मायकेश्वर शरण सिंह ने बीजेपी के टिकट पर जीत दर्ज की, जबकि 2024 लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को तिलोई क्षेत्र में बढ़त मिली। 2027 में उम्मीदवार और गठबंधन अहम रहेंगे।

UP Election 2027

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

सितम्बर 21, 2026

UP Election 2027:  उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को राज्य की राजनीति के साथ-साथ राष्ट्रीय राजनीति के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। 403 विधानसभा सीटों वाले उत्तर प्रदेश के चुनावी नतीजे 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले राजनीतिक दलों के लिए अहम संकेत दे सकते हैं। इसी कारण भारतीय जनता पार्टी, समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और अन्य दल संगठन को मजबूत करने, बूथ स्तर पर सक्रियता बढ़ाने और मतदाताओं तक पहुंच बनाने की तैयारियों में जुटे हैं। अमेठी जिले की तिलोई विधानसभा सीट भी इसी व्यापक चुनावी तस्वीर का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

तिलोई विधानसभा सीट
तिलोई विधानसभा सीट

तिलोई विधानसभा सीट का राजनीतिक परिचय

तिलोई विधानसभा क्षेत्र संख्या 178 है और यह सामान्य श्रेणी की सीट है। यह अमेठी लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आती है। विधानसभा क्षेत्र में तिलोई शहर के साथ बड़ी संख्या में ग्रामीण इलाके शामिल हैं। उपलब्ध 2011 आधारित प्रोफाइल के अनुसार यहां करीब 94.67 प्रतिशत आबादी ग्रामीण क्षेत्र में रहती है। मौजूदा विधायक भारतीय जनता पार्टी के मयंकेश्वर शरण सिंह हैं, जिनकी आधिकारिक प्रोफाइल में सामाजिक पृष्ठभूमि क्षत्रिय, शिक्षा स्नातक और व्यवसाय कृषि दर्ज है।

तिलोई में राजघराने का पुराना प्रभाव

अमेठी को लंबे समय तक गांधी परिवार के राजनीतिक प्रभाव वाले क्षेत्र के तौर पर देखा जाता रहा है, लेकिन तिलोई विधानसभा की राजनीतिक कहानी इससे अलग रही है। यहां तिलोई रियासत और राजपरिवार का स्थानीय प्रभाव लंबे समय से चुनावी राजनीति का हिस्सा रहा है। उपलब्ध चुनावी इतिहास के अनुसार 1967 से 2022 तक हुए 15 चुनावों में आठ बार राजपरिवार से जुड़े उम्मीदवारों ने जीत हासिल की। इस वजह से तिलोई में उम्मीदवार की व्यक्तिगत पहचान और स्थानीय राजनीतिक नेटवर्क को भी महत्वपूर्ण माना जाता है।

कांग्रेस, भाजपा और सपा के बीच बदलता इतिहास

तिलोई के चुनावी इतिहास में अलग-अलग समय पर कांग्रेस, भाजपा और समाजवादी पार्टी को सफलता मिली है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक कांग्रेस ने इस सीट पर आठ बार जीत दर्ज की, जबकि भाजपा ने जनसंघ के दौर को शामिल करने पर पांच बार जीत हासिल की। समाजवादी पार्टी को दो बार सफलता मिली। बहुजन समाज पार्टी अब तक इस सीट पर जीत दर्ज नहीं कर सकी है। यह इतिहास बताता है कि तिलोई का चुनावी समीकरण समय के साथ कई बार बदला है।

मयंकेश्वर शरण सिंह की राजनीतिक यात्रा

मयंकेश्वर शरण सिंह तिलोई की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय प्रमुख चेहरों में शामिल हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार वह अलग-अलग चुनावों में अलग-अलग राजनीतिक दलों के टिकट पर इस सीट से चुनाव जीत चुके हैं। 2007 में वह समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार के रूप में महज 457 वोट के अंतर से चुनाव जीते थे। इसके बाद 2017 और 2022 में भाजपा उम्मीदवार के रूप में उन्होंने जीत दर्ज की। 2017 में उनकी जीत का अंतर 44,047 वोट और 2022 में 27,829 वोट रहा।

प्रत्याशीपार्टीवोटवोट प्रतिशत
मयंकेश्वर शरण सिंहBJP99,47248.54%
मोहम्मद नईमSP71,64334.96%
प्रदीप सिंघलINC21,97810.72%
रघुवंशBSP6,1202.99%
NOTA1,8100.88%
BJP की जीत27,82913.58 प्रतिशत अंक

2022 में भाजपा ने दर्ज की बड़ी जीत

2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के मयंकेश्वर शरण सिंह को 99,472 वोट मिले थे, जो कुल मतों का करीब 48.54 प्रतिशत था। समाजवादी पार्टी के मोहम्मद नईम को 71,643 वोट मिले और उनका मत प्रतिशत करीब 34.96 रहा। कांग्रेस के प्रदीप सिंघल को 21,978 और बसपा के रघुवंश को 6,120 वोट मिले। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार भाजपा ने यह चुनाव 27,829 वोट के अंतर से जीता था।

2017 में जीत का अंतर 44 हजार से अधिक

2017 के विधानसभा चुनाव में भी मयंकेश्वर शरण सिंह भाजपा उम्मीदवार के रूप में विजयी हुए थे। उन्हें 96,119 वोट मिले थे, जो करीब 49.11 प्रतिशत मत थे। बसपा के मोहम्मद सऊद को 52,072 और कांग्रेस के विनोद कुमार मिश्रा को 35,837 वोट मिले। इस चुनाव में भाजपा की जीत का अंतर 44,047 वोट था। 2022 में भाजपा के वोट कुछ बढ़े, लेकिन मुख्य प्रतिद्वंद्वी के वोट बढ़ने के कारण जीत का अंतर घटकर 27,829 रह गया।

प्रत्याशीपार्टीवोटवोट प्रतिशत
मयंकेश्वर शरण सिंहBJP96,11949.11%
मोहम्मद सऊदBSP52,07226.61%
विनोद कुमार मिश्राINC35,83718.31%
अन्यशेष
BJP की जीत44,04722.50 प्रतिशत अंक

2012 में बेहद करीबी रहा था मुकाबला

तिलोई में 2012 का विधानसभा चुनाव बेहद करीबी मुकाबले के लिए याद किया जाता है। कांग्रेस के डॉ. मोहम्मद मुस्लिम ने 61,249 वोट हासिल कर जीत दर्ज की थी। समाजवादी पार्टी के मयंकेश्वर शरण सिंह को 58,539 वोट मिले। दोनों के बीच अंतर केवल 2,710 वोट का था। बसपा के नदीम अशरफ को 24,027 वोट मिले थे। इस परिणाम से पता चलता है कि तिलोई में एक समय मुकाबला बेहद करीबी भी रहा है।

प्रत्याशीपार्टीवोटवोट प्रतिशत
डॉ. मोहम्मद मुस्लिमINC61,24933.12%
मयंकेश्वर शरण सिंहSP58,53931.65%
नदीम अशरफBSP24,02713.00%
अन्यशेष
कांग्रेस की जीत2,7101.46 प्रतिशत अंक

2024 लोकसभा चुनाव ने बदला राजनीतिक संकेत

2024 के लोकसभा चुनाव में अमेठी सीट पर कांग्रेस की जीत के बाद तिलोई विधानसभा क्षेत्र के राजनीतिक संदर्भ में भी चर्चा बढ़ी। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार तिलोई खंड में कांग्रेस को 18,118 वोट की बढ़त मिली। इसके विपरीत 2019 के लोकसभा चुनाव में इसी खंड में भाजपा 15,164 वोट से आगे थी। हालांकि लोकसभा और विधानसभा चुनाव अलग परिस्थितियों में होते हैं, इसलिए इन आंकड़ों को 2027 के विधानसभा चुनाव का सीधा अनुमान नहीं माना जा सकता।

2026 की मतदाता सूची ने बदला चुनावी आधार

2027 के चुनाव से पहले तिलोई की मतदाता सूची में बड़ा बदलाव दर्ज हुआ है। एसआईआर प्रक्रिया से पहले विधानसभा क्षेत्र में 3,48,696 मतदाता दर्ज थे। अंतिम सूची में यह संख्या घटकर 3,06,621 रह गई। यानी दोनों सूचियों के बीच 42,075 मतदाताओं की शुद्ध कमी दर्ज हुई, जो करीब 12.07 प्रतिशत है। यह बदलाव आगामी चुनाव के लिए महत्वपूर्ण संदर्भ बन गया है।

तिलोई में पुरुष और महिला मतदाताओं की संख्या

2026 की अंतिम मतदाता सूची के अनुसार तिलोई विधानसभा क्षेत्र में 1,65,232 पुरुष मतदाता और 1,41,372 महिला मतदाता हैं। इसके अलावा 17 थर्ड जेंडर मतदाता भी दर्ज हैं। कुल मतदाताओं की संख्या 3,06,621 है। उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर महिला-पुरुष अनुपात करीब 856 महिलाएं प्रति 1,000 पुरुष मतदाता है। हालांकि केवल मतदाता संख्या के आधार पर किसी राजनीतिक दल के पक्ष में रुझान तय नहीं किया जा सकता।

SIR के आंकड़ों को जातीय नजरिए से पढ़ना सावधानी मांगता है

मतदाता सूची में जाति या धर्म के आधार पर वर्तमान विधानसभा-वार आंकड़े प्रकाशित नहीं होते। इसलिए एसआईआर के बाद घटे 42,075 मतदाताओं को किसी विशेष जाति, समुदाय या राजनीतिक दल से जोड़ना उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर संभव नहीं है। इसी तरह पुराने जातीय अनुमानों को नई मतदाता सूची पर उसी अनुपात में लागू करके वर्तमान सामाजिक समीकरण निकालना भी उचित नहीं होगा।

तिलोई के पुराने जातीय अनुमान अलग-अलग

तिलोई की सामाजिक संरचना में मुस्लिम, अनुसूचित जाति, ब्राह्मण, क्षत्रिय, यादव और दूसरे ओबीसी समुदायों की मौजूदगी बताई जाती है। हालांकि अलग-अलग पुराने राजनीतिक अनुमानों में इन समूहों की संख्या और हिस्सेदारी में काफी अंतर मिलता है। एक पुराने आकलन में मुस्लिम मतदाताओं की संख्या करीब 1.40 लाख तक बताई गई थी, जबकि दूसरे मॉडल में उनका हिस्सा लगभग 30.89 प्रतिशत बताया गया। दोनों आंकड़ों में अंतर होने के कारण इन्हें वर्तमान आधिकारिक आंकड़े के तौर पर नहीं देखा जा सकता।

अनुसूचित जाति और पासी समाज की भूमिका

2011 की जनसंख्या आधारित जानकारी के अनुसार तिलोई क्षेत्र में अनुसूचित जाति की आबादी करीब 28.36 प्रतिशत थी। पुराने राजनीतिक अनुमानों में पासी समाज की संख्या भी काफी महत्वपूर्ण बताई गई है। लेकिन पासी अनुसूचित जाति के भीतर आने वाला एक समुदाय है, इसलिए दोनों आंकड़ों को जोड़ना सही नहीं होगा। इसी तरह अनुसूचित जाति की पूरी आबादी को किसी एक राजनीतिक दल के साथ जोड़कर देखना भी तथ्यात्मक रूप से उचित नहीं है।

ब्राह्मण और क्षत्रिय मतदाताओं का पुराना अनुमान

तिलोई के पुराने सामाजिक समीकरणों में ब्राह्मण और क्षत्रिय समुदायों का भी उल्लेख मिलता है। एक पुराने अनुमान में ब्राह्मण मतदाताओं की संख्या करीब 50 हजार और क्षत्रिय मतदाताओं की संख्या लगभग 40 हजार बताई गई थी। दूसरे राजनीतिक मॉडल में ब्राह्मणों की हिस्सेदारी करीब 9.47 प्रतिशत और क्षत्रियों की करीब 9.03 प्रतिशत बताई गई। ये आंकड़े पुराने अनुमान हैं और इन्हें वर्तमान मतदाता सूची की आधिकारिक जातीय संख्या नहीं माना जा सकता।

यादव और दूसरे ओबीसी समुदाय

तिलोई के सामाजिक समीकरण में यादव और अन्य ओबीसी समुदाय भी महत्वपूर्ण बताए जाते हैं। एक पुराने अनुमान में यादव मतदाताओं की संख्या करीब 42 हजार बताई गई थी, जबकि दूसरे मॉडल में यादवों की हिस्सेदारी लगभग 6.52 प्रतिशत थी। व्यापक ओबीसी आबादी का एक पुराना अनुमान करीब 80 हजार का था। चूंकि यादव स्वयं ओबीसी श्रेणी में आते हैं, इसलिए दोनों आंकड़ों को जोड़कर कुल संख्या निकालना सही नहीं होगा।

ग्रामीण इलाका होने से स्थानीय मुद्दों की भूमिका

तिलोई विधानसभा क्षेत्र की बड़ी ग्रामीण आबादी चुनावी मुद्दों को केवल जातीय समीकरणों तक सीमित नहीं रहने देती। खेती, सिंचाई, खाद-बीज, फसल का मूल्य, ग्रामीण सड़क, स्थानीय बाजार, रोजगार, पेयजल और स्वास्थ्य जैसी जरूरतें अलग-अलग सामाजिक समूहों के लिए साझा मुद्दे बन सकती हैं। गांवों को स्कूल, अस्पताल, बाजार और बड़े मार्गों से जोड़ने वाली सड़कें भी स्थानीय चुनावी चर्चा का हिस्सा रह सकती हैं।

तिलोई मेडिकल कॉलेज बना बड़ा विकास मुद्दा

तिलोई में स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय और अस्पताल क्षेत्र के प्रमुख विकास प्रोजेक्ट में शामिल है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार करीब 16.5 एकड़ भूमि पर लगभग 300 करोड़ रुपये की लागत से परियोजना विकसित की जा रही है। मेडिकल कॉलेज को 2025 में पहले 50 और बाद में 100 एमबीबीएस सीटों की अनुमति मिलने की जानकारी सामने आई थी। हालांकि अस्पताल भवन के निर्माण में तय समय से देरी भी हुई है।

2027 तक मेडिकल कॉलेज की स्थिति अहम होगी

आगामी विधानसभा चुनाव से पहले यह देखा जाना महत्वपूर्ण होगा कि मेडिकल कॉलेज और अस्पताल कितनी क्षमता के साथ संचालित होता है। डॉक्टर, जांच सुविधाएं, मरीजों को मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाएं और आसपास के ग्रामीण इलाकों की पहुंच इसके प्रभाव को तय करने वाले पहलू होंगे। संस्थान के पूरी तरह विकसित होने से स्वास्थ्य सुविधाओं के साथ रोजगार, परिवहन, बाजार और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ने की संभावना पर चर्चा होती रही है।

सड़क और कनेक्टिविटी भी स्थानीय सवाल

तिलोई के ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क और संपर्क मार्गों की स्थिति भी स्थानीय चर्चा का विषय रही है। इन्हौना से पूर्वांचल एक्सप्रेसवे की ओर जाने वाली सड़क और खानापुर चपरा-शंकरगंज मार्ग की खराब स्थिति को लेकर शिकायतें सामने आने की जानकारी है। ग्रामीण क्षेत्र के लिए केवल बड़े हाईवे की मौजूदगी पर्याप्त नहीं होती, बल्कि गांवों से बाजार, स्कूल, अस्पताल और मुख्य मार्ग तक पहुंचने वाली सड़कों की स्थिति भी महत्वपूर्ण रहती है।

पेयजल योजनाओं की जमीनी स्थिति

ग्रामीण पेयजल तिलोई के विकास से जुड़ा एक अन्य मुद्दा है। जल जीवन मिशन के तहत पाइपलाइन पहुंचने के बावजूद कुछ स्थानों पर घरेलू कनेक्शन और नियमित जलापूर्ति को लेकर शिकायतें सामने आई हैं। हालांकि किसी एक गांव की शिकायत से पूरे विधानसभा क्षेत्र की स्थिति तय नहीं की जा सकती, लेकिन इससे यह सवाल जरूर जुड़ता है कि योजनाओं का लाभ अंतिम घर तक कितनी प्रभावी तरीके से पहुंच रहा है।

2027 में PDA और गठबंधन की चर्चा

आगामी चुनाव के संदर्भ में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के संभावित तालमेल तथा सामाजिक समीकरणों को लेकर भी राजनीतिक चर्चा है। विपक्षी दलों के लिए संगठनात्मक तालमेल, उम्मीदवार चयन और अलग-अलग सामाजिक समूहों के बीच समर्थन का स्वरूप महत्वपूर्ण हो सकता है। वहीं भाजपा के लिए मौजूदा संगठन, सरकार के कामकाज और स्थानीय स्तर पर मयंकेश्वर शरण सिंह की राजनीतिक पकड़ प्रमुख संदर्भ रहेंगे।

तिलोई में उम्मीदवार का चेहरा महत्वपूर्ण

तिलोई के चुनावी इतिहास को देखते हुए उम्मीदवार की स्थानीय पहचान भी एक महत्वपूर्ण पहलू के रूप में सामने आती है। अलग-अलग चुनावों में परिणामों के बदलने से यह स्पष्ट होता है कि केवल पार्टी का नाम ही चुनावी परिणाम को निर्धारित नहीं करता। 2007 और 2012 के करीबी मुकाबलों से लेकर 2017 और 2022 के बड़े अंतर तक, सीट ने अलग-अलग राजनीतिक परिस्थितियों में अलग परिणाम देखे हैं।

2027 की लड़ाई को केवल जातीय गणित से नहीं समझा जा सकता

तिलोई के चुनावी समीकरण को समझने के लिए पुराने जातीय आंकड़ों के साथ वर्तमान मतदाता सूची, पिछले चुनावों के परिणाम, उम्मीदवारों की स्थानीय स्वीकार्यता और क्षेत्रीय मुद्दों को भी देखना होगा। 2026 की अंतिम सूची में मतदाता आधार 3,06,621 है। 2022 में भाजपा ने 27,829 वोट से जीत दर्ज की थी, जबकि 2024 लोकसभा चुनाव में तिलोई खंड में कांग्रेस को 18,118 वोट की बढ़त मिली थी। ये आंकड़े अलग-अलग चुनावों के हैं और उनका संदर्भ भी अलग है।

2027 से पहले तिलोई के सामने कई सवाल

तिलोई विधानसभा में 2027 का चुनाव कई स्तरों पर महत्वपूर्ण होगा। एक तरफ भाजपा के सामने लगातार तीसरी विधानसभा जीत का प्रयास होगा, तो दूसरी ओर विपक्षी दल 2024 के लोकसभा परिणामों के बाद अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर सकते हैं। इसी बीच नई मतदाता सूची ने चुनावी आधार को पहले की तुलना में छोटा कर दिया है। मेडिकल कॉलेज, सड़क, पेयजल, कृषि और रोजगार जैसे मुद्दे भी चुनावी चर्चा का हिस्सा बन सकते हैं।

तिलोई का चुनावी गणित अभी खुला हुआ है

तिलोई के इतिहास में कांग्रेस की पुरानी मौजूदगी, भाजपा की हालिया लगातार जीत, समाजवादी पार्टी की पिछली सफलताएं और राजपरिवार का स्थानीय प्रभाव—सभी अलग-अलग समय में दिखाई देते हैं। 2027 में इन पुराने राजनीतिक संकेतों का वर्तमान मतदाता सूची और स्थानीय मुद्दों के साथ किस तरह मेल बैठता है, यह चुनावी प्रक्रिया आगे बढ़ने के साथ स्पष्ट होगा। फिलहाल उपलब्ध आंकड़े तिलोई को एक ऐसे विधानसभा क्षेत्र के रूप में सामने रखते हैं, जहां चुनावी समीकरण कई सामाजिक, राजनीतिक और स्थानीय कारकों से मिलकर बनते हैं।

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