UP News: उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) राजीव कृष्ण ने अपने कार्यकाल का एक वर्ष पूरा होने पर पुलिस मुख्यालय में आयोजित एक महत्वपूर्ण प्रेसवार्ता में राज्य की कानून-व्यवस्था का लेखा-जोखा पेश किया। डीजीपी ने स्पष्ट किया कि पिछले एक वर्ष के दौरान 10 प्रमुख प्राथमिकताओं पर ध्यान केंद्रित किया गया, जिनमें महिला सुरक्षा, साइबर अपराधों पर नकेल और संगठित अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सबसे ऊपर रही। उन्होंने दोहराया कि प्रदेश में अपराधियों के प्रति ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई गई है, जिसके सकारात्मक परिणाम स्वरूप पिछले सात-आठ वर्षों में अपराधों के आंकड़ों में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है।
‘मिशन शक्ति’ से महिला सुरक्षा और महिला अपराधों में कमी
डीजीपी ने बताया कि ‘मिशन शक्ति’ अभियान के माध्यम से महिलाओं की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। राज्य पुलिस ने न केवल पुलिसकर्मियों को विशेष प्रशिक्षण दिया, बल्कि दहेज उत्पीड़न और घरेलू हिंसा जैसे मामलों के प्रति संवेदनशीलता और जागरूकता भी बढ़ाई। डीजीपी के आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों में 9.5 से लेकर 33 प्रतिशत तक की बड़ी गिरावट आई है, जो पुलिस की कार्यप्रणाली और समाज में बढ़ते सुरक्षा भाव का प्रमाण है।
साइबर अपराध की चुनौतियों से निपटने के लिए आधुनिक तकनीक और AI
बदलते दौर में साइबर ठगी और ऑनलाइन अपराधों को डीजीपी ने बड़ी चुनौती स्वीकार किया। इससे निपटने के लिए 62 हजार से अधिक पुलिसकर्मियों को साइबर विशेषज्ञता का प्रशिक्षण दिया गया है। डीजीपी ने गर्व के साथ बताया कि यूपी पुलिस ने अब तक साइबर ठगी के 450 करोड़ रुपये होल्ड (रोकवा) कराए हैं, जो पूरे देश में एक रिकॉर्ड है। उन्होंने बताया कि ‘कृत्रिम बुद्धिमत्ता’ (AI) आधारित तकनीकों का उपयोग अपराधियों की पहचान और निगरानी में किया जा रहा है, जिससे फरार अपराधियों को पकड़ने में बड़ी सफलता मिल रही है।
शहीद जवानों के परिजनों को वित्तीय सहायता
पुलिसकर्मियों के मनोबल को बनाए रखने के लिए डीजीपी ने कल्याणकारी योजनाओं का विस्तार किया है। ड्यूटी के दौरान शहीद हुए या दुर्घटना में जान गंवाने वाले पुलिसकर्मियों के परिजनों को अब तक 137 करोड़ रुपये की सहायता राशि दी जा चुकी है। इसके अलावा, 51 हजार पुलिसकर्मियों को नि:शुल्क चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई गई है और जल्द ही 200 की क्षमता वाले अत्याधुनिक छात्रावास बनाने की योजना है ताकि जवानों और उनके परिवारों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।
नए आपराधिक कानूनों का प्रभावी कार्यान्वयन
डीजीपी ने नए आपराधिक कानूनों को लागू करने के लिए पुलिस को तैयार करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि समयबद्ध तरीके से आरोप पत्र (चार्जशीट) दाखिल करने और डिजिटल साक्ष्यों को प्राथमिकता देने का कार्य किया जा रहा है। विशेष रूप से ‘ई-समन’ व्यवस्था को मजबूत किया गया है, जिसके तहत अदालतों से समन सीधे थानों तक डिजिटल माध्यम से भेजे जा रहे हैं। वर्तमान में 90 प्रतिशत मामलों में यह व्यवस्था सुचारू रूप से लागू हो चुकी है, जिससे न्याय प्रक्रिया में तेजी आई है।
आतंकवाद और संगठित अपराध के खिलाफ ATS-STF की सख्त कार्रवाई
आतंकवाद के बदलते स्वरूप पर चिंता जताते हुए डीजीपी ने कहा कि सीमा पार से सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को कट्टरपंथ की ओर धकेलने की साजिशें रची जा रही हैं। इस पर एटीएस और एसटीएफ ने कड़ा रुख अपनाते हुए हाल के दिनों में 13 संदिग्धों को गिरफ्तार किया है। अंत में, डीजीपी ने स्पष्ट किया कि आने वाले समय में संगठित अपराध और ‘सफेदपोश अपराधियों’ के आर्थिक नेटवर्क को ध्वस्त किया जाएगा। उन्होंने विश्वास दिलाया कि आम नागरिकों, महिलाओं और व्यापारियों के लिए एक सुरक्षित और भयमुक्त वातावरण बनाना ही यूपी पुलिस का एकमात्र लक्ष्य है।










