UP News: योगी कैबिनेट विस्तार में बड़ा खेल! पूजा पाल को क्यों नहीं मिली जगह? सपा नेता ने कसा तीखा तंज

उत्तर प्रदेश में योगी सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार के साथ ही सियासी पारा चढ़ गया है। रविवार को 8 नए मंत्रियों ने शपथ ली, लेकिन चर्चा का केंद्र चायल विधायक पूजा पाल रहीं, जिन्हें जगह नहीं मिली। इस पर सपा नेता आईपी सिंह ने तीखा हमला बोला है। जानें क्या है योगी सरकार का 2027 वाला मास्टर प्लान।

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Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

मई 11, 2026

UP News: उत्तर प्रदेश की सियासत में लंबे समय से प्रतीक्षित योगी आदित्यनाथ सरकार का मंत्रिमंडल विस्तार रविवार (10 मई) को संपन्न हो गया। इस विस्तार में कुल आठ मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई गई, जिनमें छह नए चेहरे शामिल हैं। सरकार ने इस फेरबदल के जरिए आगामी 2027 के विधानसभा चुनावों के लिए अपनी बिसात बिछानी शुरू कर दी है। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम में सबसे अधिक चर्चा चायल विधायक पूजा पाल की रही, जिन्हें कयासों के विपरीत कैबिनेट में जगह नहीं मिल सकी।

सपा नेता आईपी सिंह का कड़ा प्रहार

बताते चले कि, पूजा पाल को मंत्री न बनाए जाने पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और अखिलेश यादव के करीबी आईपी सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर उन पर तीखा हमला बोला। उन्होंने पूजा पाल के व्यक्तिगत जीवन और राजनीतिक निष्ठा पर सवाल उठाते हुए लिखा कि अब वह भाजपा के कोटे से कभी विधायक भी नहीं बन पाएंगी। सिंह ने उन पर अपने दिवंगत पति के नाम पर राजनीति करने और बाद में “धोखा” देने का आरोप लगाया। उन्होंने तंज कसते हुए यहां तक कह दिया कि अब भाजपा का अगला मंत्रिमंडल विस्तार 20 साल बाद ही होगा।

पूजा पाल का राजनीतिक सफर

पूजा पाल कौशांबी की चायल विधानसभा सीट से वर्ष 2022 में सपा के टिकट पर चुनाव जीती थीं। हालांकि, बीते वर्षों में उनकी दूरियां सपा से बढ़ती गईं। राज्यसभा चुनाव के दौरान भाजपा उम्मीदवार के पक्ष में मतदान करने और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कार्यशैली की प्रशंसा करने के कारण उन्हें पार्टी विरोधी गतिविधियों में संलिप्त माना गया। इसी के चलते साल 2025 में समाजवादी पार्टी ने उन्हें निष्कासित कर दिया था। चर्चा थी कि उन्हें इस वफादारी का इनाम कैबिनेट मंत्री के रूप में मिलेगा, लेकिन रविवार की सूची ने इन उम्मीदों पर पानी फेर दिया।

जातीय समीकरण की बिसात

योगी सरकार ने इस मंत्रिमंडल फेरबदल और नए मंत्रियों की नियुक्ति में जातीय संतुलन का विशेष ध्यान रखा है। सपा के ‘पीडीए’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फार्मूले का मुकाबला करने के लिए भाजपा ने अपने कुनबे में ओबीसी और दलित चेहरों को प्रमुखता दी है।

ओबीसी प्रतिनिधित्व: भूपेंद्र चौधरी, हंसराज विश्वकर्मा, सोमेंद्र तोमर, अजीत सिंह पाल और कैलाश राजपूत को शामिल कर पिछड़ा वर्ग को साधने की कोशिश की गई है।

ब्राह्मण और दलित चेहरा: ब्राह्मण समाज से मनोज पांडेय को जगह मिली है, वहीं कृष्णा पासवान और सुरेंद्र दिलेर के जरिए दलित वोट बैंक को मजबूत संदेश देने का प्रयास किया गया है।

2027 के चुनाव की तैयारी

इस कैबिनेट विस्तार और क्षेत्रीय समीकरणों के जरिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट कर दिया है कि भाजपा अपनी सोशल इंजीनियरिंग को धार देने में जुटी है। जहाँ एक ओर नए मंत्रियों के जरिए विभिन्न समुदायों को जोड़ने की कोशिश की गई है, वहीं दूसरी ओर पूजा पाल जैसे नेताओं की अनदेखी ने विपक्षी दलों को हमलावर होने का मौका दे दिया है। अब देखना यह होगा कि यह नया मंत्रिमंडल 2027 की चुनावी जंग में कितना प्रभावी साबित होता है।