UP By Election: यूपी उपचुनाव को लेकर इस समय सियासी हलचल तेज है. सभी राजनीतिक दल अपनी-अपनी तैयारियों को धार देने में लगे हुए है. आज बीजेपी ने 7 उम्मीदवारों का ऐलान कर दिया है. जिनमें से एक करहल विधानसभा सीट भी है. इस सीट पर होने वाले उपचुनाव में बीजेपी ने समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) के गढ़ में सेंध लगाने की कोशिश की है. बीजेपी ने इस सीट से मुलायम सिंह यादव के करीबी रिश्तेदार अनुजेश यादव को प्रत्याशी बनाया है. अनुजेश यादव सपा सांसद और अखिलेश यादव के चचेरे भाई धर्मेंद्र यादव के बहनोई हैं. इस बार करहल सीट पर बीजेपी और सपा के बीच सीधा मुकाबला देखने को मिल रहा है, जहां अनुजेश यादव का मुकाबला अखिलेश यादव के भतीजे तेज प्रताप यादव से होगा.
सपा का गढ़: अखिलेश यादव का किला

बताते चले कि करहल विधानसभा सीट मैनपुरी जिले में स्थित है और इसे समाजवादी पार्टी के गढ़ के रूप में जाना जाता है. इस सीट से पूर्व में अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने 2022 के विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज की थी. लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव में कन्नौज से सांसद निर्वाचित होने के बाद उन्होंने करहल की विधानसभा सदस्यता से इस्तीफा दे दिया. इसके बाद, अखिलेश यादव ने अपने भतीजे तेज प्रताप यादव को इस सीट से मैदान में उतारा है. तेज प्रताप यादव बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू यादव के दामाद भी हैं, जो इस सीट पर समाजवादी पार्टी की पकड़ को और मजबूत बना सकते हैं.
भतीजा बनाम फूफा: दिलचस्प मुकाबला

आपको बता दे कि, करहल सीट पर इस बार का चुनावी मुकाबला बेहद दिलचस्प हो गया है. बीजेपी ने अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) के पारिवारिक संबंधों का फायदा उठाते हुए, उनके करीबी रिश्तेदार अनुजेश यादव को मैदान में उतारा है. अनुजेश यादव, अखिलेश के भतीजे तेज प्रताप यादव के फूफा हैं. इस प्रकार, करहल की सियासी जंग अब भतीजा बनाम फूफा में बदल गई है. दोनों ही उम्मीदवारों का सपा और यादव परिवार के साथ गहरा रिश्ता है, जिससे चुनावी मुकाबला और भी रोचक हो गया है.
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सपा के गढ़ में बीजेपी की चुनौती

करहल विधानसभा सीट पर समाजवादी पार्टी का कब्जा 1993 से चला आ रहा है. इस दौरान सपा ने कई बार इस सीट पर जीत दर्ज की है. 2022 में, अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने इस सीट पर बड़ी जीत हासिल की थी. अब बीजेपी ने अनुजेश यादव को उम्मीदवार बनाकर सपा के इस किले को ढहाने की चुनौती दी है. बीजेपी को उम्मीद है कि यादव परिवार में विभाजन का फायदा उठाकर वे इस सीट को अपने कब्जे में ले सकेंगे.
सियासी समीकरण और चुनावी प्रभाव
करहल का यह उपचुनाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह यादव परिवार के भीतर एक सियासी जंग की तरह दिखाई दे रहा है. समाजवादी पार्टी इस सीट पर अपनी पकड़ बरकरार रखने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है, जबकि बीजेपी अपनी रणनीति के तहत यादव परिवार में फूट डालकर सपा के गढ़ को कमजोर करना चाहती है. इस उपचुनाव का नतीजा आगामी विधानसभा चुनावों पर भी प्रभाव डाल सकता है और राज्य की राजनीति की दिशा निर्धारित कर सकता है.
चुनाव की तैयारियां जोरों पर
इस उपचुनाव के लिए तैयारियां जोरो पर हैं. दोनों ही पार्टियां अपने उम्मीदवारों के समर्थन में रैलियां, जनसभाएं और प्रचार अभियान चला रही हैं राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि करहल की इस सियासी लड़ाई में दोनों ही दलों के लिए बड़ी चुनौती है, लेकिन यादव परिवार के भीतर की इस प्रतिस्पर्धा ने इस चुनाव को और भी पेचीदा बना दिया है.