UP Budget 2026: ‘नाम बड़े दर्शन छोटे’, यूपी बजट पर मायावती ने क्यों कसा योगी सरकार पर तंज?

यूपी विधानसभा में पेश हुए 9.12 लाख करोड़ के बजट पर बसपा प्रमुख मायावती ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि सरकार को दावों के बजाय जमीनी सच्चाई बतानी चाहिए। मायावती ने आरोप लगाया कि यह बजट केवल 2027 के चुनावों को ध्यान में रखकर बनाया गया है, जिसमें गरीबों का कोई भला नहीं होगा।

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

फ़रवरी 11, 2026

UP Budget 2026: उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने बुधवार, 11 फरवरी 2026 को विधानसभा में राज्य का अब तक का सबसे बड़ा बजट पेश किया। वित्त मंत्री सुरेश खन्ना द्वारा प्रस्तुत वित्त वर्ष 2026-27 का यह बजट कुल 9.13 लाख करोड़ रुपये का है। यह पिछले वित्त वर्ष के बजट की तुलना में लगभग 12.2 प्रतिशत की महत्वपूर्ण वृद्धि को दर्शाता है। सरकार ने इस बजट के माध्यम से बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में भारी निवेश का खाका तैयार किया है। हालांकि, इस भारी-भरकम बजट पर विपक्षी दलों ने तीखी प्रतिक्रिया देनी शुरू कर दी है, जिसमें बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की प्रमुख मायावती ने सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

मायावती का प्रहार: ‘विकास कम, अखबारों की सुर्खियां ज्यादा’

उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और बसपा सुप्रीमो मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) के माध्यम से इस बजट की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा कि यह बजट वास्तविक विकास के बजाय ‘लोक लुभावना’ अधिक प्रतीत होता है। मायावती के अनुसार, सरकार ने सर्वसमाज के उत्थान और प्रदेश के संतुलित क्षेत्रीय विकास पर ध्यान देने के बजाय केवल कागजी घोषणाओं और आश्वासनों के जरिए जनता को लुभाने का प्रयास किया है। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि यह बजट अखबारों की सुर्खियां बटोरने के लिए तो ठीक है, लेकिन इससे आम जनता के ‘अच्छे दिन’ आने की उम्मीदें एक बार फिर धूमिल हो गई हैं।

आंकड़ों की विश्वसनीयता पर सवाल और पिछले खर्च का हिसाब

मायावती ने बजट भाषण की परंपरा पर टिप्पणी करते हुए कहा कि अगर सरकार पिछले वर्ष के बजट के जमीनी क्रियान्वयन का सटीक डेटा पेश करती, तो यह भाषण अधिक विश्वसनीय होता। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार पुराने बजट का कितना हिस्सा वास्तव में जनता तक पहुँचा पाई, इसका ठोस विवरण देने में विफल रही है। बसपा प्रमुख ने जोर देकर कहा कि उत्तर प्रदेश की जनता को केवल आंकड़ों के खेल की नहीं, बल्कि एक ऐसी रोजगार व्यवस्था की तलाश है जिससे उन्हें स्थायी आमदनी हो सके। उनके अनुसार, रोजगार के मुद्दे पर सरकार की गंभीरता और सक्रियता अभी भी नदारद है।

आरक्षण और बैकलाग भर्ती पर सरकार का ध्यान खींचने की कोशिश

सामाजिक न्याय के मुद्दे को उठाते हुए मायावती ने सरकार को आगाह किया कि बजट में एससी, एसटी और ओबीसी वर्गों के आरक्षण पर समुचित ध्यान देना अनिवार्य है। उन्होंने विशेष रूप से सरकारी विभागों में खाली पड़े ‘बैकलॉग’ पदों को भरने की मांग की। मायावती ने कहा कि जितनी जल्दी इन पदों पर भर्तियाँ पूरी की जाएंगी, उतना ही वंचित वर्गों का भला होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार आरक्षण के संवैधानिक प्रावधानों को लागू करने में उतनी तत्परता नहीं दिखा रही है जितनी की आवश्यकता है।

‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ की नसीहत

योगी सरकार को कार्यप्रणाली में सुधार की सलाह देते हुए मायावती ने अपनी पिछली चारों सरकारों का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार को बसपा शासन की तरह ‘सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय’ के संवैधानिक दायित्व को निष्ठा और ईमानदारी से निभाने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि बजट किसी वर्ग या क्षेत्र विशेष का हित साधने वाला नहीं होना चाहिए। विशेषकर करोड़ों गरीबों और किसानों के हितों के खिलाफ बजट बनाना देशहित में नहीं है। मायावती के अनुसार, बजट को उनके जीवन स्तर में सुधार लाने का एक प्रभावी माध्यम बनना चाहिए, तभी इसकी सार्थकता सिद्ध होगी।

निष्कर्ष: चुनावी वादों और जमीनी हकीकत के बीच का अंतर

मायावती की यह प्रतिक्रिया दर्शाती है कि विपक्ष इस बजट को केवल आगामी राजनीतिक लाभ के लिए तैयार किया गया दस्तावेज मान रहा है। जहां एक ओर सरकार 9.13 लाख करोड़ के बजट को प्रदेश की प्रगति का इंजन बता रही है, वहीं मायावती ने इसे किसान-विरोधी और गरीब-विरोधी होने की आशंका जताई है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार विधानसभा में इन आरोपों का क्या जवाब देती है और क्या यह बजट वास्तव में धरातल पर बदलाव ला पाएगा।

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