UP Budget 2026: यूपी बजट 2026 पर अखिलेश यादव का तीखा हमला, बताया भाजपा का ‘विदाई बजट’

योगी सरकार ने 9.12 लाख करोड़ का भारी-भरकम बजट पेश कर अपनी पीठ थपथपाई, लेकिन अखिलेश यादव ने इसे 'विदाई बजट' कहकर सनसनी फैला दी। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार पुराने बजट का 50% भी खर्च नहीं कर पाई है। क्या यह बजट वाकई विकास लाएगा या सिर्फ चुनावी जुमला है?

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

फ़रवरी 11, 2026

UP Budget 2026: उत्तर प्रदेश विधानसभा में पेश किए गए बजट पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बुधवार को लखनऊ में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर जोरदार हमला बोला। अखिलेश यादव ने इस बजट को पूरी तरह से दिशाहीन और खोखला करार देते हुए इसे भारतीय जनता पार्टी का ‘विदाई बजट’ बताया। उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता अब सच्चाई समझ चुकी है और इस बजट के साथ ही भाजपा की सत्ता से विदाई भी निश्चित हो गई है। सपा प्रमुख के अनुसार, सरकार केवल कागजों पर आंकड़े बढ़ाकर जनता को गुमराह करने की कोशिश कर रही है, जबकि हकीकत में आम आदमी की परेशानियां जस की तस बनी हुई हैं।

बजट के आकार और खर्च पर गंभीर सवाल

अखिलेश यादव ने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि बजट का आकार बढ़ाना विकास की गारंटी नहीं है। उन्होंने आधिकारिक आंकड़ों का हवाला देते हुए खुलासा किया कि सरकार पिछले बजट की पूरी राशि भी खर्च करने में नाकाम रही है। अखिलेश के मुताबिक, सरकार स्वास्थ्य और कृषि जैसे बुनियादी क्षेत्रों में आवंटित बजट का 60 प्रतिशत हिस्सा भी खर्च नहीं कर पाई है। उन्होंने सवाल किया कि जब पुराने आवंटन का ही इस्तेमाल नहीं हो सका, तो नए और बड़े बजट का ढिंढोरा पीटने से आम जनता को क्या लाभ मिलेगा? उनके अनुसार, सरकारी धन का उपयोग समय पर न होना प्रशासनिक विफलता का बड़ा प्रमाण है।

अर्थव्यवस्था और विकास दर के दावों की पोल

प्रदेश को एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के सरकार के लक्ष्य पर तंज कसते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि 90 लाख करोड़ की इकोनॉमी का सपना दिखाने के लिए कम से कम 30 प्रतिशत की विकास दर (Growth Rate) की आवश्यकता है। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि वर्तमान आर्थिक परिस्थितियों और बेरोजगारी के आलम में ऐसी विकास दर हासिल करना पूरी तरह से नामुमकिन है। अखिलेश ने कहा कि किसानों की आय दोगुनी करने और युवाओं को रोजगार देने के लिए सरकार के पास कोई ठोस रोडमैप नहीं है, केवल नारों के सहारे प्रदेश को आगे ले जाने का भ्रम फैलाया जा रहा है।

निवेश और रोजगार के दावों पर छिड़ा विवाद

उत्तर प्रदेश में हुए निवेश के दावों पर कटाक्ष करते हुए सपा मुखिया ने कहा कि सरकार ने 50 लाख करोड़ रुपये के एमओयू (MOU) साइन करने का दावा किया था, लेकिन धरातल पर निवेश शून्य है। उन्होंने तर्क दिया कि यदि निवेश वास्तव में जमीन पर उतरा होता, तो आज उत्तर प्रदेश के युवा दर-दर की ठोकरें नहीं खा रहे होते और सरकार को बार-बार नए रोजगार देने की घोषणाएं नहीं करनी पड़तीं। अखिलेश ने यह भी आरोप लगाया कि प्रति व्यक्ति आय के मामले में यूपी लगातार पिछड़ रहा है और सरकार मुफ्त राशन पाने वालों की दयनीय आर्थिक स्थिति को आंकड़ों के पीछे छिपाने की कोशिश कर रही है।

स्वास्थ्य और कृषि क्षेत्र की बदहाली का आरोप

अखिलेश यादव ने स्वास्थ्य सेवाओं के निजीकरण की ओर इशारा करते हुए आरोप लगाया कि सरकार की मंशा सरकारी अस्पतालों को ठप करने की है ताकि स्वास्थ्य सेवाओं को निजी हाथों में सौंपा जा सके। उन्होंने कहा कि सरकार ने मेडिकल कॉलेजों की संख्या तो बढ़ा दी है, लेकिन वहां न तो डॉक्टर हैं और न ही इलाज की पर्याप्त व्यवस्था। वहीं, कृषि क्षेत्र और एमएसएमई (MSME) पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि किसानों को गन्ने का उचित रेट नहीं मिल रहा है। नई वैश्विक ट्रेड डील और सरकारी नीतियों के कारण एमएसएमई इकाइयों को भारी नुकसान हो रहा है और सरकार रजिस्टर्ड इकाइयों की मदद करने में पूरी तरह विफल रही है।

जनता की उम्मीदों के साथ खिलवाड़

प्रेस कॉन्फ्रेंस के अंत में अखिलेश यादव ने इस बजट को केवल ‘कागजी खेल’ बताया। उन्होंने कहा कि यह बजट न तो किसानों का भला कर पाएगा और न ही युवाओं के भविष्य को सुरक्षित कर सकेगा। समाजवादी पार्टी ने इसे विकास विरोधी बताते हुए स्पष्ट किया कि वे इस मुद्दे को जनता के बीच ले जाएंगे। उनके अनुसार, बुनियादी शिक्षा में महज 62 प्रतिशत और स्वास्थ्य में 58 प्रतिशत बजट का खर्च होना यह दर्शाता है कि सरकार की प्राथमिकता में आम आदमी का कल्याण नहीं है।

Read More: Kohrra 2 Review: एक बार में देख डालेंगे ये 6 एपिसोड, सस्पेंस और इमोशन्स का डेडली कॉम्बिनेशन