UP Assemby Session: सतीश महाना के बयान से विधानसभा में हलचल, इस्तीफे को लेकर शुरू हुई चर्चाएं

उत्तर प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान सदन में हुए भारी हंगामे और अमर्यादित आचरण से आहत होकर विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना भावुक हो गए।

UP Assemby Session

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

अगस्त 5, 2026

UP Assemby Session: उत्तर प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान सदन की कार्यवाही और मर्यादा को लेकर एक बेहद भावुक और सनसनीखेज पल देखने को मिला। विधानसभा अध्यक्ष (स्पीकर) सतीश महाना सदन के भीतर विधायकों को संबोधित करते हुए अचानक भावुक हो गए। सत्र के दूसरे दिन यानी 4 अगस्त को सदन में हुए भारी हंगामे और अमर्यादित आचरण से आहत होकर स्पीकर ने अपनी ही कार्यशैली और पद की योग्यता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि उन्हें यह आत्मअवलोकन करना पड़ेगा कि वह इस गरिमामयी कुर्सी के योग्य हैं भी या नहीं।

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“मेरी राजनीतिक पारी अब अंतिम चरण में है”

विधायकों को नसीहत देते हुए और सदन की गरिमा की याद दिलाते हुए स्पीकर सतीश महाना ने अपने राजनीतिक सफर का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उनकी एक लंबी राजनीतिक पारी रही है, जो अब अपने अंतिम चरण में है। उन्होंने इस बात को दोहराते हुए कहा कि उनके राजनीतिक जीवन का यह आखिरी दौर चल रहा है, ऐसे में सदन की सुचिता को बनाए रखना उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता रही है।

सदन के पुराने वाक्यों को याद करते हुए उन्होंने कहा कि जब अखिलेश यादव प्रदेश के मुख्यमंत्री थे, तब इसी विधानसभा में दो विधायकों ने अपने कपड़े उतार दिए थे। उस घटना पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने तब भी कहा था कि यह केवल दो विधायकों के कपड़े उतरने जैसी घटना नहीं है, बल्कि यह सदन के सभी 403 विधायकों के सम्मान के उतरने के समान है। इसके अलावा, उन्होंने पूर्व नेता प्रतिपक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य द्वारा तत्कालीन नेता सदन अखिलेश यादव के खिलाफ की गई आपत्तिजनक टिप्पणी का विरोध किए जाने की बात को भी सदन के रिकॉर्ड का हवाला देकर याद दिलाया।

भाषा की मर्यादा और डॉ. अंबेडकर के कथन का जिक्र

सतीश महाना ने सदन में लगातार गिरते स्तर और भाषा की मर्यादा तार-तार होने पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि विधायक पद की शपथ लेते समय यह स्पष्ट निहित होता है कि सभी सदस्य सदन के नेता का सम्मान करेंगे।

लोकतंत्र और असहमति: उन्होंने माना कि वाद-विवाद, आपसी सहमति और असहमति लोकतंत्र का अभिन्न अंग हैं, लेकिन विरोध जताने के दौरान भी भाषा और आचरण की मर्यादा हर हाल में बनी रहनी चाहिए।

दुख और निराशा: 4 अगस्त को सदन में हुए घटनाक्रम से वह बेहद आहत और निराश नजर आए। उन्होंने यहां तक कह दिया कि उन्हें अपने जीवन में पहली बार ऐसा महसूस हुआ है कि या तो उनके प्रयासों में कोई बड़ी कमी रह गई है, या फिर संविधान निर्माता बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर की वह बात बिल्कुल सही थी जिसमें उन्होंने कहा था कि “कमी संविधान में नहीं, बल्कि उसे चलाने वाले व्यक्तियों में होती है।”

रोल मॉडल माने जाने वाले विधायक के आचरण से टूटे स्पीकर

सपा विधायक सचिन यादव का नाम लिए बिना स्पीकर सतीश महाना ने उनके आचरण पर गहरी नाराजगी और निराशा जताई। उन्होंने कहा कि कल सदन के भीतर एक ऐसे सदस्य के व्यवहार ने उन्हें सबसे ज्यादा दुखी किया है, जिसे वह व्यक्तिगत रूप से सदन का ‘रोल मॉडल’ मानते थे।

स्पीकर ने तल्ख लहजे में कहा कि उनके द्वारा बार-बार मना किए जाने के बावजूद उस विधायक ने सदन के बाहर जिस प्रकार की अमर्याद भाषा का प्रयोग किया, वह बेहद निराशाजनक और चिंताजनक है। स्पीकर के इस कड़े और भावुक संबोधन के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति और सदन के गलियारों में हलचल काफी तेज हो गई है।

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