UP Politics: समाजवादी पार्टी की योगी सरकार को घेरने की बड़ी तैयारी, अखिलेश यादव ने खोले पत्ते

फ्रेंडशिप डे के मौके पर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने अपना नया 'Gen Z' अवतार दिखाया है। उन्होंने दक्षिण कोरियाई K-Pop स्टाइल में फिंगर हार्ट बनाकर देश के युवाओं को शुभकामनाएं दीं और इंस्टाग्राम पर वीडियो शेयर कर कहा कि वे हर दिन कुछ नया सीख रहे हैं, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

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Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

अगस्त 2, 2026

UP Politics: उत्तर प्रदेश विधानसभा का मॉनसून सत्र सोमवार, 3 अगस्त से शुरू हो रहा है, जिसके चलते सूबे की सियासत में सरगर्मी तेज हो गई है। विपक्षी दल समाजवादी पार्टी ने इस सत्र के दौरान योगी आदित्यनाथ सरकार को विभिन्न गंभीर मुद्दों पर घेरने की पूरी तैयारी कर ली है। पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP), शिक्षा व्यवस्था, सरकारी स्कूलों की बंदी, रोजगार, आरक्षण, पेपर लीक, एक्सप्रेस-वे निर्माण में भ्रष्टाचार, राम मंदिर चढ़ावा चोरी, खाली पड़े शिक्षक पदों और जौहर विश्वविद्यालय जैसे तमाम ज्वलंत मुद्दों पर सरकार को सदन के भीतर और बाहर चुनौती देने की ठोस रणनीति बनाई है।

सत्र से पहले अखिलेश यादव की प्रेस कॉन्फ्रेंस

बताते चले कि, सत्र शुरू होने से ठीक एक दिन पहले रविवार, 2 अगस्त को समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने राजधानी लखनऊ में एक उच्चस्तरीय प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने भारतीय जनता पार्टी की सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि कल से विधानसभा का सत्र शुरू हो रहा है और उनके विधायक जनता से जुड़े सभी महत्वपूर्ण मुद्दों को सदन में जोरदार तरीके से उठाएंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के नुमाइंदे विधानसभा का सामना करने से कतराते हैं। इसके साथ ही उन्होंने किसानों की बदहाली और खाद की भारी किल्लत का मुद्दा उठाते हुए तंज कसा कि पहले खाद की बोरी चोरी होती थी, लेकिन अब तो पूरी की पूरी बोरी ही गायब हो रही है।

जौहर यूनिवर्सिटी और स्कूलों की बंदी पर सरकार को घेरा

अखिलेश यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में हमला बोलते हुए कहा कि जो लोग खुद विश्वविद्यालय नहीं बना पाए, वे अब विश्वविद्यालयों पर हथौड़ा चलाना चाहते हैं। उन्होंने दावा किया कि शुरू से ही जौहर यूनिवर्सिटी को लेकर सरकार के इरादे और मकसद ठीक नहीं रहे हैं और वह इस पर कड़ी कार्रवाई करना चाहती है।

सपा प्रमुख ने बड़ा खुलासा करते हुए कहा कि बीजेपी के दस साल के शासनकाल में उत्तर प्रदेश में कुल 26,386 सरकारी स्कूल बंद हो चुके हैं। उनकी पार्टी विधानसभा में बंद हुए इन स्कूलों का पुरजोर मुद्दा उठाएगी। उन्होंने तुलना करते हुए बताया कि जब प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार थी, तब कुल 1,13,938 स्कूल संचालित होते थे, जो 2026 में घटकर काफी कम रह गए हैं।

पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र में भी बंद हुए स्कूल

सपा प्रमुख ने आंकड़े पेश करते हुए बताया कि सबसे ज्यादा प्राइमरी स्कूल लखीमपुर खीरी जिले में बंद हुए हैं, और हैरानी की बात यह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में भी कई प्राइमरी स्कूल बंद किए गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जब उनकी पार्टी ने इन मामलों पर आंकड़े जुटाने शुरू किए, तो घबराई हुई योगी सरकार ने आधिकारिक सरकारी वेबसाइट्स को ही बंद कर दिया। अखिलेश ने कहा कि सरकार का मुख्य मकसद यह है कि ‘PDA’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) समाज के लोग शिक्षित न हो सकें। सरकारी आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि 2017 तक प्राइमरी स्कूलों में जहां 1 करोड़ 17 लाख बच्चे पढ़ते थे, वहीं 2026 में यह संख्या घटकर करीब 89 लाख रह गई है यानी 28 लाख बच्चे कम हो गए हैं, जिनमें 25 लाख बच्चे OBC, SC और ST वर्ग के हैं।

शिक्षकों के खाली पद और बदहाल बुनियादी ढांचा

शिक्षा व्यवस्था की बदहाली पर बात करते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि 2017 में राज्य में 4 लाख शिक्षक थे, जो घटकर अब 3 लाख 40 हजार रह गए हैं। नई भर्तियां करना तो दूर, सरकारी आंकड़े खुद यह गवाही देते हैं कि वर्तमान में 1 लाख 40 हजार शिक्षकों के पद खाली पड़े हैं। उन्होंने बताया कि स्कूलों में पढ़ने वाली बेटियों की संख्या भी 61 लाख से घटकर 45 लाख हो गई है। इसके अलावा, यूपी के 7,000 स्कूलों में बिजली तक नहीं है, 2,300 स्कूलों में छात्राओं के लिए शौचालय जैसी बुनियादी सुविधा नहीं है, 576 स्कूलों में पीने का शुद्ध पानी उपलब्ध नहीं है और 23,000 स्कूलों में एक भी कंप्यूटर नहीं है।

इन तमाम मुद्दों को उजागर करते हुए सपा ने ‘2026 में 26000 स्कूल बंद’ शीर्षक से एक विशेष बुकलेट भी जारी की है। अंत में उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के सामने आज एकमात्र बड़ा संकट भारतीय जनता पार्टी है, और यदि बीजेपी को सत्ता से हटा दिया जाए, तो जनता के सारे संकट स्वतः हल हो जाएंगे।