
UP Election 2027 : उत्तर प्रदेश समेत देश के पांच राज्यों में वर्ष 2027 की शुरुआत में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। इनमें उत्तर प्रदेश, पंजाब, मणिपुर, गोवा और उत्तराखंड शामिल हैं। आगामी चुनावों को लेकर राजनीतिक दलों के साथ-साथ निर्वाचन आयोग ने भी अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। चुनावी प्रक्रिया को व्यवस्थित और निष्पक्ष तरीके से संपन्न कराने के लिए आयोग ने राज्यों में प्रशासनिक और तकनीकी तैयारियों की समीक्षा शुरू कर दी है। उत्तर प्रदेश में हालिया गतिविधियों को इसी तैयारी का हिस्सा माना जा रहा है।
यूपी के 18 जिलों में चुनावी तैयारियों की समीक्षा
निर्वाचन आयोग ने 2 नवंबर को उत्तर प्रदेश के चार मंडलों के 18 जिलों में चुनावी तैयारियों की समीक्षा की। इस बैठक में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों पर विशेष ध्यान दिया गया। आयोग ने संबंधित अधिकारियों को चुनाव से जुड़ी व्यवस्थाओं को समय रहते पूरा करने के निर्देश दिए। इससे पहले भी आयोग ने प्रदेश में प्रशासनिक अधिकारियों की तैनाती और तबादलों को लेकर दिशा-निर्देश जारी किए थे। इन गतिविधियों के बीच आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

मतदाता सूची दुरुस्त करने के निर्देश
सोमवार को हुई समीक्षा बैठक में निर्वाचन आयोग ने वरिष्ठ अधिकारियों से मतदाता सूचियों को जल्द से जल्द अपडेट करने को कहा। आयोग ने नए मतदाताओं के नाम जोड़ने और मतदाता सूची में मौजूद त्रुटियों को दूर करने पर जोर दिया। इसके साथ ही मतदान केंद्रों पर जरूरी सुविधाएं सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए। आयोग का उद्देश्य मतदान से पहले मतदाता सूची और मतदान केंद्रों से जुड़ी व्यवस्थाओं को व्यवस्थित करना है, ताकि चुनाव के दौरान मतदाताओं को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।
EVM और VVPAT की व्यवस्था पर भी फोकस
चुनाव की तैयारियों के तहत इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन यानी EVM और वोटर वेरिफिएबल पेपर ऑडिट ट्रेल यानी VVPAT के प्रबंधन को लेकर भी निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों को इन मशीनों की उपलब्धता, रखरखाव और प्रबंधन से संबंधित तैयारियां समय पर पूरी करने को कहा गया है। इसके अलावा चुनावी ड्यूटी में लगाए जाने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रशिक्षण देने की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश भी दिए गए हैं। आयोग चाहता है कि मतदान से पहले सभी संबंधित कर्मचारी अपनी जिम्मेदारियों और चुनावी प्रक्रियाओं से परिचित हों।
एक जिले में तीन साल से तैनात अधिकारियों का होगा तबादला
निर्वाचन आयोग ने चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए अधिकारियों की तैनाती को लेकर भी सख्त दिशा-निर्देश दिए हैं। आयोग के निर्देश के मुताबिक, चुनाव से सीधे जुड़े ऐसे अधिकारी, जिन्होंने पिछले चार वर्षों की निर्धारित अवधि में 31 मई 2027 तक एक ही जिले में तीन साल पूरे कर लिए हैं, उन्हें संबंधित जिले से स्थानांतरित किया जाना है। इस व्यवस्था का उद्देश्य चुनावी प्रक्रिया में प्रशासनिक निष्पक्षता सुनिश्चित करना है।

30 नवंबर तक सरकार को देनी होगी रिपोर्ट
आयोग ने उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक (DGP) को 30 नवंबर तक संयुक्त रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है। इस रिपोर्ट में आयोग के दिशा-निर्देशों के तहत की गई कार्रवाई का पूरा विवरण देना होगा। तबादला नीति के दायरे में निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ERO), उपजिलाधिकारी (SDM), संयुक्त मजिस्ट्रेट और तहसीलदार जैसे अधिकारी शामिल हैं।
पांच राज्यों के चुनाव पर नजर
उत्तर प्रदेश के अलावा पंजाब, मणिपुर, गोवा और उत्तराखंड में भी 2027 की शुरुआत में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में निर्वाचन आयोग की तैयारियां इन सभी राज्यों के लिए महत्वपूर्ण हैं। हालांकि, उत्तर प्रदेश में 18 जिलों की समीक्षा और अधिकारियों के तबादलों से जुड़ी प्रक्रिया चुनावी तैयारियों की गति को दर्शाती है, लेकिन इन गतिविधियों को चुनाव की आधिकारिक घोषणा नहीं माना जा सकता। चुनाव कार्यक्रम की तारीखों का ऐलान निर्वाचन आयोग की ओर से अलग से किया जाएगा।











