Unnao News: भाई-बहन के रिश्ते को मजबूत करता है ‘सुजिया’ पर्व, उन्नाव में दिखती है खास रौनक

उत्तर प्रदेश के कुछ ग्रामीण क्षेत्रों, विशेषकर उन्नाव के आसपास रक्षाबंधन के पावन पर्व से जुड़ा एक पारंपरिक स्थानीय पर्व 'सुजिया' मनाया जाता है, जो भाई-बहन के पवित्र रिश्ते को गहराई प्रदान करता है।

Unnao News

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

अगस्त 27, 2026

Unnao News: भारत उत्सवों और पर्वों का देश है, यहाँ हर कोने में संस्कृति और संस्कारों से जुड़ी अनूठी परंपराएं देखने को मिलती हैं। उत्तर प्रदेश के कुछ चुनिंदा हिस्सों, विशेषकर उन्नाव और उसके आसपास के ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में रक्षाबंधन के पावन पर्व के आसपास या उससे ठीक पहले एक बेहद खास और पारंपरिक स्थानीय पर्व मनाया जाता है, जिसे ‘सुजिया’ (या सुजिया पर्व) के नाम से जाना जाता है। यह त्यौहार आधुनिक चकाचौंध से दूर ग्रामीण संस्कृति की उस सुदीर्घ परंपरा का हिस्सा है, जो भाई और बहन के बीच के पवित्र रिश्ते को गहराई प्रदान करता है।

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सुजिया पर्व का सांस्कृतिक और पारिवारिक महत्व

भारतीय संस्कृति में भाई-बहन के प्रेम को समर्पित रक्षाबंधन और भाई दूज जैसे बड़े पर्वों की अपनी एक अलग महत्ता है, लेकिन ‘सुजिया’ जैसे स्थानीय पर्व क्षेत्रीय संस्कृति की विविधता और उसकी गहराई को दर्शाते हैं।

रिश्तों की अटूट डोर: यह त्यौहार मुख्य रूप से भाई-बहन के आपसी प्रेम, विश्वास, आत्मीयता और एक-दूसरे के प्रति समर्पण की भावना को मजबूत करने का कार्य करता है।

दीर्घायु और आरोग्यता की कामना: इस परंपरा के तहत बहनें अपने भाइयों के जीवन में खुशहाली, सफलता और दीर्घायु की कामना करती हैं, वहीं भाई भी अपनी बहन की रक्षा और उसके उज्ज्वल भविष्य का संकल्प लेते हैं।

पारिवारिक मिलन: इस बहाने पूरा परिवार और सगे-संबंधी एक-सजे मंच पर एकत्र होते हैं, जिससे आपसी भाईचारा और पारिवारिक सौहार्द प्रगाढ़ होता है।

उत्सव का उल्लास और पारंपरिक अनुष्ठान

सुजिया पर्व के दौरान उन्नाव और आसपास के इलाकों में एक अलग ही सांस्कृतिक रौनक देखने को मिलती है। हालांकि यह मुख्य रूप से एक स्थानीय और पारंपरिक पर्व है, लेकिन इसे मनाने के तौर-तरीके बेहद सादगीपूर्ण और भावनात्मक होते हैं।

पारिवारिक एकजुटता: इस दिन परिवार के सभी सदस्य मिलकर इस स्नेह पर्व को बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाते हैं। घरों में पारंपरिक व्यंजनों की महक फैल जाती है और एक खुशनुमा माहौल बनता है।

मिठास और उपहारों का आदान-प्रदान: रिश्ते में हमेशा मिठास बनी रहे, इसके लिए पारंपरिक तरीके से एक-दूसरे का मुंह मीठा कराया जाता है। बहनें भाइयों को तिलक लगाती हैं और अपनी लोक-संस्कृति के अनुसार मंगलकामनाएं करती हैं।

क्षेत्रीय रीति-रिवाज: आधुनिकता के इस दौर में भी उन्नाव के स्थानीय लोग अपनी इस पारंपरिक थाती को संजोए हुए हैं। बुजुर्ग महिलाएं इस पर्व से जुड़ी पारंपरिक गीत-कहानियों और लोक-रीतियों को नई पीढ़ी तक पहुंचाती हैं।

लोक संस्कृति का संरक्षण और आधुनिक संदर्भ

आज के समय में जब भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग अपनी जड़ों से दूर होते जा रहे हैं, ‘सुजिया’ जैसे क्षेत्रीय पर्व हमें अपनी मिट्टी और संस्कृति से जोड़े रखने का काम करते हैं। यह त्यौहार केवल एक दिन का उत्सव नहीं है, बल्कि यह उन सामाजिक और पारिवारिक मूल्यों का जीवंत दस्तावेज है जो हमारी संस्कृति की असली पहचान हैं।

उत्तर प्रदेश की यह अनूठी सांस्कृतिक विरासत भाई-बहन के रिश्ते के उस आत्मीय बंधन को प्रगाढ़ करती है, जिसे शब्दों में पिरोना कठिन है। आने वाली पीढ़ियों के लिए इन स्थानीय पर्वों का संरक्षण करना हमारी सांस्कृतिक धरोहर को जीवंत रखने के समान है।

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