अनुराधा देवी के नेतृत्व में रसूलपुर पंचायत ने रचा विकास का मॉडल

रोहतास बिहार के रोहतास जिले की रसूलपुर ग्राम पंचायत ने महिला सशक्तिकरण, ग्रामीण प्रशासन और सतत विकास के क्षेत्र में एक बेहतरीन मिसाल कायम की है। इस 9 हजार 876 की आबादी वाली पंचायत में लगभग 45 प्रतिशत महिलाएं हैं। मुखिया अनुराधा देवी के सशक्त और दूरदर्शी नेतृत्व में इस पंचायत ने स्वास्थ्य, शिक्षा, आजीविका, सुरक्षा और सामाजिक समावेश की कई अभूतपूर्व पहलें सफलतापूर्वक लागू की गई हैं। यहां वर्तमान में 16 आंगनवाड़ी केंद्र, 9 विद्यालय, 1 स्वास्थ्य केंद्र और एक पंचायत भवन संचालित हो रहे हैं। मुखिया अनुराधा देवी का स्पष्ट उद्देश्य है- महिला-केंद्रित शासन सुनिश्चित करना, स्वास्थ्य व

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Published On :

अप्रैल 13, 2026

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रोहतास

बिहार के रोहतास जिले की रसूलपुर ग्राम पंचायत ने महिला सशक्तिकरण, ग्रामीण प्रशासन और सतत विकास के क्षेत्र में एक बेहतरीन मिसाल कायम की है। इस 9 हजार 876 की आबादी वाली पंचायत में लगभग 45 प्रतिशत महिलाएं हैं। मुखिया अनुराधा देवी के सशक्त और दूरदर्शी नेतृत्व में इस पंचायत ने स्वास्थ्य, शिक्षा, आजीविका, सुरक्षा और सामाजिक समावेश की कई अभूतपूर्व पहलें सफलतापूर्वक लागू की गई हैं। यहां वर्तमान में 16 आंगनवाड़ी केंद्र, 9 विद्यालय, 1 स्वास्थ्य केंद्र और एक पंचायत भवन संचालित हो रहे हैं।

मुखिया अनुराधा देवी का स्पष्ट उद्देश्य है- महिला-केंद्रित शासन सुनिश्चित करना, स्वास्थ्य व पोषण में सुधार, बालिका शिक्षा को बढ़ावा, आजीविका के नए अवसर और एक सुरक्षित और सशक्त ग्राम पंचायत का निर्माण। मुखिया की कोशिशों ने पंचायत में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत किया है। यहां 216 गर्भवती महिलाओं का सफल पंजीकरण किया गया। सौ प्रतिशत प्रसवोत्तर जांच सुनिश्चित की गई और संस्थागत प्रसव को बढ़ावा दिया गया। परिणामस्वरूप मातृ मृत्यु दर मात्र 1 और शिशु मृत्यु दर केवल 2 रही। यहां नियमित पोषण दिवस का आयोजन, स्तनपान और सही पोषण संबंधी जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं।

शिक्षा और बालिका सशक्तिकरण
अनुसूचित जाति और जनजाति के छात्र-छात्राओं को शिक्षा में बेहतर करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। मुखिया अनुराधा देवी बताती हैं कि प्रति वर्ष दसवीं और बारहवीं में अच्छे अंक लाने वाले बच्चों को पुरस्कृत किया जाता है। परिणामस्वरूप शिक्षा के प्रति लोगों का रवैया बदला है, लड़कियां इसमें खासकर अच्छा कर रही हैं।
आर्थिक आजादी की ओर कदम

इस पंचायत में 172 स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) सक्रिय हैं, जिनमें से 162 बैंक ऋण से जुड़ चुके हैं। महिलाओं को सिलाई, हस्तशिल्प और कंप्यूटर जैसे कौशल के प्रशिक्षण दिए जा रहे हैं। जीविका के माध्यम से एससी-एसटी की महिलाएं स्कूल ड्रेस सिलाई कर अच्छी आय कमा रही हैं। अब सैकड़ों महिलाएं आर्थिक रूप से स्वतंत्र हो चुकी हैं और शासन प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी कर रही हैं।

ग्राम स्तर पर समस्याओं का समाधान
महिलाओं की सुरक्षा के लिए शक्ति सलाह केंद्र की स्थापना की गई है। दहेज, बाल विवाह और महिलाओं के विरुद्ध अपराधों से संबंधित मामलों को मुखिया अनुराधा देवी अपने स्तर पर या ग्राम कचहरी में सुलझाती हैं। उनका प्रयास रहता है कि मामले थाने तक न पहुंचें। मजबूत जागरूकता अभियान के कारण लिंग आधारित हिंसा में उल्लेखनीय कमी आई है।

पंचायत ने 2 हजार 572 शौचालयों का निर्माण करवाया है। सभी घरों तक सड़क बनाई गई है। सौ एलईडी स्ट्रीट लाइटें लगाई गई हैं और आरओ आधारित पेयजल सुविधा भी उपलब्ध है। इसके साथ ही विधवा पेंशन के 143, वृद्धावस्था पेंशन के 149 और विकलांगता पेंशन के 67 लाभार्थियों को नियमित लाभ मिल रहा है। पात्र सभी लाभार्थियों को सौ प्रतिशत कवरेज देने का लक्ष्य रखा गया है।

चुनौतियों से निपटने के लिए निकाले रास्ते
मुखिया बताती हैं कि शुरुआत में महिलाओं की भागीदारी कम थी और सामाजिक रूढ़िवादी मानसिकता बाधा बन रही थी। नियमित जागरूकता अभियान, महिला सभाएं, क्षमता निर्माण प्रशिक्षण और सरकारी योजनाओं से समन्वय के माध्यम से इन चुनौतियों पर काबू पाया। आज महिलाओं की निर्णय लेने में सक्रिय भागीदारी बढ़ी है और अब वे विभिन्न आजीविका गतिविधियों से जुड़कर आर्थिक स्वतंत्रता हासिल कर चुकी हैं।
सूर्यकांत पाठक

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