UN Committee Report: भारत पर रिपोर्ट से मचा विवाद, MEA ने बताया ‘राजनीति से प्रेरित’

संयुक्त राष्ट्र की नस्लीय भेदभाव समिति की भारत पर रिपोर्ट के बाद विवाद बढ़ गया है। समिति ने कानून प्रवर्तन और कुछ समुदायों से जुड़े अधिकारों पर चिंताएं जताईं। विदेश मंत्रालय ने रिपोर्ट के संदर्भों को राजनीति से प्रेरित और अत्यंत दुर्भावनापूर्ण बताया। भारत ने कहा कि समीक्षा में उसके पक्ष को भी स्पष्ट रखा गया था।

UN Committee Report

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

अगस्त 26, 2026

UN Committee Report: संयुक्त राष्ट्र की ‘नस्लीय भेदभाव उन्मूलन समिति’ (UNCERD) की भारत से संबंधित हालिया रिपोर्ट को केंद्र सरकार ने सिरे से खारिज कर दिया है। विदेश मंत्रालय ने समिति की टिप्पणियों पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि रिपोर्ट में भारत को लेकर किए गए कुछ संदर्भ राजनीतिक रूप से प्रेरित और दुर्भावनापूर्ण हैं। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि भारत ऐसे आरोपों और टिप्पणियों को पूरी तरह अस्वीकार करता है। साथ ही सरकार ने यह भी याद दिलाया कि जिस अंतरराष्ट्रीय कन्वेंशन के तहत यह समिति काम करती है, उसके निर्माण में भारत की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

रणधीर जायसवाल ने रिपोर्ट के संदर्भों को बताया दुर्भावनापूर्ण

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने प्रेस रिलीज के जरिए भारत का पक्ष सामने रखा। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र समिति की रिपोर्ट में भारत को लेकर किए गए कथित ‘राजनीतिक रूप से प्रेरित और अत्यंत दुर्भावनापूर्ण’ संदर्भों को स्पष्ट शब्दों में खारिज किया। जायसवाल ने कहा कि ऐसे संदर्भों को उसी अवमानना के साथ अस्वीकार किया जाना चाहिए, जिसके वे हकदार हैं। मंत्रालय ने यह भी बताया कि जिनेवा स्थित भारतीय मिशन समीक्षा पूरी होने के बाद इस विषय पर पहले ही विस्तृत प्रतिक्रिया जारी कर चुका है।

जिनेवा में हुई थी भारत की 11वीं आवधिक समीक्षा

विदेश मंत्रालय के अनुसार, 11 और 12 अगस्त को जिनेवा में भारत की अंतरराष्ट्रीय कन्वेंशन से जुड़ी 11वीं आवधिक समीक्षा हुई थी। मंत्रालय ने इसे नियमित ‘ट्रीटी बॉडी रिव्यू’ बताते हुए कहा कि भारत ने इस प्रक्रिया में रचनात्मक भावना के साथ हिस्सा लिया। समीक्षा के दौरान भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने देश में मौजूद संवैधानिक सुरक्षा उपायों, कानूनी प्रावधानों और बहुलवादी व्यवस्था की जानकारी समिति के सामने रखी। इसके साथ ही वंचित और कमजोर समुदायों की सुरक्षा के लिए किए जा रहे प्रयासों को भी रेखांकित किया गया।

नस्लीय भेदभाव के खिलाफ भारत ने जताई प्रतिबद्धता

भारत ने समीक्षा के दौरान स्पष्ट किया कि नस्लीय भेदभाव से निपटने को लेकर उसकी प्रतिबद्धता लगातार मजबूत है। विदेश मंत्रालय ने बताया कि भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने देश के संवैधानिक ढांचे और मजबूत कानूनी व्यवस्था के जरिए भेदभाव से निपटने के प्रयासों को सामने रखा। भारत का कहना था कि देश में विविधता और बहुलवाद की रक्षा के लिए संवैधानिक संस्थाएं और कानूनी तंत्र मौजूद हैं। सरकार ने यह भी संकेत दिया कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत के खिलाफ किए गए आरोपों का जवाब तथ्यों और निर्धारित प्रक्रियाओं के आधार पर दिया जाएगा।

ICERD के निर्माण में भारत की रही अहम भूमिका

विदेश मंत्रालय ने संयुक्त राष्ट्र समिति को यह भी याद दिलाया कि 1960 के दशक में नस्लीय भेदभाव के सभी रूपों के उन्मूलन से संबंधित अंतरराष्ट्रीय कन्वेंशन यानी ICERD के निर्माण और मसौदा तैयार करने में भारत की महत्वपूर्ण भूमिका रही थी। मंत्रालय के मुताबिक, भारत इस व्यवस्था के गठन से जुड़े प्रयासों में सक्रिय भागीदार रहा है। समीक्षा के दौरान भारतीय अंतर-मंत्रालयी प्रतिनिधिमंडल ने व्यापक सामान्यीकरण, बिना पर्याप्त प्रमाण के लगाए गए आरोपों और कन्वेंशन के अधिकार क्षेत्र से आगे जाने वाली टिप्पणियों पर भी आपत्ति दर्ज कराई।

समिति की टिप्पणियों का जवाब प्रक्रिया के तहत देगा भारत

भारत सरकार ने कहा है कि समिति की टिप्पणियों और रिपोर्ट में उठाए गए मुद्दों पर उचित जवाब स्थापित प्रक्रिया के अनुसार दिया जाएगा। विदेश मंत्रालय का कहना है कि भारत ने समीक्षा प्रक्रिया में रचनात्मक तरीके से भाग लिया और अपने संवैधानिक तथा कानूनी ढांचे की जानकारी विस्तार से दी। हालांकि, जिन टिप्पणियों को भारत राजनीतिक या दुर्भावनापूर्ण मानता है, उन्हें स्वीकार नहीं किया जाएगा। सरकार का रुख है कि अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की टिप्पणियों का मूल्यांकन तथ्यों और संबंधित कन्वेंशन के दायरे में किया जाना चाहिए।

UN समिति ने भारत में कई समुदायों को लेकर जताई चिंता

इससे पहले जिनेवा स्थित संयुक्त राष्ट्र समिति ने फिनलैंड, होंडुरास, भारत और कुवैत की समीक्षा के बाद अपनी रिपोर्ट जारी की थी। भारत से जुड़े हिस्से में समिति ने अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, दलित और रोहिंग्या शरणार्थियों सहित आबादी के कुछ वर्गों के मानवाधिकारों से जुड़े कथित उल्लंघनों की खबरों पर गंभीर चिंता व्यक्त की। समिति ने भारत से ऐसे आरोपों की तत्काल, गहन और निष्पक्ष जांच करने तथा यदि आरोप सही पाए जाएं तो जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय करने का आग्रह किया।

हिंसा और हिरासत से जुड़े आरोपों पर भी चिंता

संयुक्त राष्ट्र समिति ने अपनी टिप्पणियों में दावा किया कि संबंधित समुदायों के लोगों को नस्लीय आधार पर हिंसा, अत्यधिक बल प्रयोग, कथित गैर-न्यायिक हत्याओं और उचित कानूनी प्रक्रिया के बिना मनमानी या लंबी हिरासत जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। रिपोर्ट में प्रताड़ना, दुर्व्यवहार और यौन हिंसा से जुड़े आरोपों का भी उल्लेख किया गया। समिति ने इन मामलों को लेकर प्रभावी जांच और जवाबदेही सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया है।

भारत और UN समिति के बीच सामने आया मतभेद

UNCERD की रिपोर्ट और भारत सरकार की प्रतिक्रिया से दोनों पक्षों के दृष्टिकोण में अंतर स्पष्ट हो गया है। जहां समिति ने कुछ समुदायों से जुड़े कथित मानवाधिकार उल्लंघनों पर चिंता जताई है, वहीं भारत ने रिपोर्ट के कुछ संदर्भों को राजनीतिक और दुर्भावनापूर्ण बताते हुए खारिज कर दिया है। अब भारत की ओर से स्थापित अंतरराष्ट्रीय प्रक्रिया के तहत समिति की टिप्पणियों पर विस्तृत जवाब दिए जाने की बात कही गई है। इससे आने वाले समय में इस मुद्दे पर भारत और संयुक्त राष्ट्र समिति के बीच आगे भी चर्चा की संभावना बनी हुई है।

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