UK Entry in Iran War: मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष ने अब एक नया और खतरनाक मोड़ ले लिया है। लंबे समय तक दूरी बनाए रखने के बाद, आखिरकार ब्रिटेन ने इस महायुद्ध में अपनी सीधी भागीदारी सुनिश्चित कर दी है। प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर की सरकार ने एक ऐतिहासिक और रणनीतिक फैसला लेते हुए अमेरिका को अपने मिलिट्री बेस इस्तेमाल करने की आधिकारिक अनुमति दे दी है। इस फैसले का सीधा अर्थ यह है कि अब अमेरिकी वायुसेना ब्रिटेन के ठिकानों का उपयोग करके ईरान के उन केंद्रों को निशाना बना सकेगी, जहाँ से होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में अंतरराष्ट्रीय जहाजों पर हमले किए जा रहे हैं। ब्रिटेन का यह कदम युद्ध की दिशा बदलने वाला साबित हो सकता है।
सऊदी अरब और UAE की सक्रियता: किंग फहद एयर बेस अमेरिका के लिए खुला
ईरान के हमलों का सामना कर रहे सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने भी अब रक्षात्मक रुख छोड़कर सक्रिय भूमिका अपना ली है। दोनों देशों ने अमेरिका और इजरायल के समर्थन में अपने सैन्य ठिकानों के दरवाजे खोल दिए हैं। सऊदी अरब ने अपने ‘किंग फहद एयर बेस’ को पूरी तरह से अमेरिकी वायुसेना के सुपुर्द कर दिया है, जिससे क्षेत्रीय अभियानों में अमेरिकी विमानों की पहुंच और मारक क्षमता बढ़ गई है। वहीं, UAE ने भी संकेत दिए हैं कि वह एक लंबे और निर्णायक संघर्ष के लिए तैयार है। अमेरिका ने भी क्षेत्र में अतिरिक्त मरीन सैनिकों की तैनाती तेज कर दी है, जिससे युद्ध के और भीषण होने की आशंका है।
ईरान की जवाबी चेतावनी: रास अल-खैमाह शहर को खाली करने का अल्टीमेटम
पश्चिमी देशों की बढ़ती घेराबंदी से ईरान बेफिक्र नजर नहीं आ रहा है। ईरान ने पलटवार करते हुए UAE के ‘रास अल-खैमाह’ शहर के निवासियों को तत्काल इलाका खाली करने की सख्त चेतावनी जारी की है। ईरानी अधिकारियों का दावा है कि खर्ग द्वीप (Kharg Island) के खिलाफ हालिया सैन्य अभियान इसी शहर से संचालित किया गया था, इसलिए अब यह शहर ईरान की मिसाइलों के सीधे निशाने पर है। इसके साथ ही, हिंद महासागर में स्थित ब्रिटेन के ‘डिएगो गार्सिया’ और ‘RAF फेयरफोर्ड’ बेस को अमेरिका को सौंपे जाने पर ईरान ने कड़ी आपत्ति जताई है।
स्टार्मर का यू-टर्न: सहयोगी देशों पर हमले के बाद बदला फैसला
शुरुआत में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने स्पष्ट किया था कि ब्रिटेन इस युद्ध का हिस्सा नहीं बनेगा। उन्होंने पहले अमेरिका के अनुरोध को यह कहते हुए ठुकरा दिया था कि किसी भी सैन्य कार्रवाई की कानूनी वैधता सुनिश्चित करना अनिवार्य है। इस रुख के कारण वाशिंगटन और लंदन के बीच तनाव भी पैदा हो गया था। हालांकि, जब ईरान ने ब्रिटेन के करीबी सहयोगी देशों और उनके हितों पर प्रहार करना शुरू किया, तो स्टार्मर को अपनी रणनीति बदलनी पड़ी। अब ब्रिटेन का मुख्य उद्देश्य होर्मुज स्ट्रेट को सुरक्षित करना है, क्योंकि इसी मार्ग से ब्रिटेन की तेल आपूर्ति निर्भर करती है।
ईरानी विदेश मंत्री की धमकी: ब्रिटिश नागरिकों की जान खतरे में
ब्रिटेन के इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने गंभीर चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि अमेरिका को अपने सैन्य बेस उपलब्ध कराकर कीर स्टार्मर ने ब्रिटिश नागरिकों की जिंदगी को दांव पर लगा दिया है। अराघची के अनुसार, भले ही ब्रिटिश सेना सीधे हमला न करे, लेकिन उनके ठिकानों का इस्तेमाल होने पर ईरान ‘आत्मरक्षा के अधिकार’ के तहत जवाबी कार्रवाई करेगा। इससे यह डर पैदा हो गया है कि युद्ध का दायरा अब मध्य पूर्व से निकलकर यूरोप के करीब पहुंच सकता है।
ट्रंप का विरोधाभासी बयान: क्या युद्ध वाकई समाप्ति की ओर है?
एक तरफ जहाँ ब्रिटेन और अन्य देश युद्ध में गहरे उतर रहे हैं, वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर एक अलग ही संकेत दिया है। ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिका अपने लक्ष्यों को हासिल करने के बेहद करीब है और वह सैन्य अभियानों को समाप्त करने पर विचार कर रहे हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि ‘सत्ता परिवर्तन’ का जो मुख्य उद्देश्य युद्ध की शुरुआत में रखा गया था, वह अभी तक अधूरा है। ऐसे में ट्रंप का यह बयान चुनावी रणनीति है या वास्तविक सैन्य योजना, यह आने वाला वक्त ही बताएगा।









