Chimpanzee Civil War : आज के दौर में जब पूरी दुनिया की निगाहें मध्य-पूर्व में ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव पर टिकी हैं, उसी समय अफ्रीकी महाद्वीप के युगांडा से एक ऐसी खबर आई है जिसने वैज्ञानिकों को हैरत में डाल दिया है। यह संघर्ष इंसानों के बीच नहीं, बल्कि हमारे सबसे करीबी पूर्वज कहे जाने वाले चिंपांजियों के बीच हो रहा है। युगांडा के जंगलों में चिंपांजियों के दो गुटों के बीच एक भीषण ‘सिविल वॉर’ छिड़ गया है, जिसमें अब तक 24 से अधिक चिंपांजियों की जान जा चुकी है। प्रकृति के बीच हो रही यह हिंसा यह सोचने पर मजबूर करती है कि क्या युद्ध की प्रवृत्ति केवल इंसानों तक ही सीमित नहीं है?
दुनिया का सबसे बड़ा चिंपांजी समूह ‘नगोगो‘: एकता से अलगाव तक का सफर
युगांडा का किबाले नेशनल पार्क अपनी जैव विविधता के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ चिंपांजियों का एक विशाल समूह रहता था जिसे वैज्ञानिक ‘नगोगो’ (Ngogo) के नाम से जानते हैं। करीब 200 सदस्यों वाला यह समूह दुनिया का सबसे बड़ा जंगली चिंपांजी कुनबा माना जाता था। दशकों तक ये चिंपांजी एक साथ शिकार करते थे, मिल-जुलकर फल खाते थे और अपने क्षेत्र की रक्षा करते थे। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में इस एकता में दरार आ गई। संसाधनों, नेतृत्व और इलाके पर कब्जे की होड़ ने इस विशाल परिवार को दो कट्टर दुश्मन गुटों में तब्दील कर दिया।
30 साल की लंबी स्टडी का नतीजा: ‘सेंट्रल‘ और ‘वेस्टर्न‘ गुटों की खूनी जंग
वैज्ञानिकों ने नगोगो समूह पर पिछले 30 वर्षों तक गहन शोध किया। एरॉन सैंडेल के नेतृत्व वाली रिसर्च टीम ने पाया कि सामाजिक ढांचा चरमराने के कारण यह समूह धीरे-धीरे दो हिस्सों में विभाजित हो गया—एक जिसे ‘सेंट्रल ग्रुप’ कहा गया और दूसरा ‘वेस्टर्न ग्रुप’। बंटवारे के बाद दोनों समूहों के बीच तनाव इतना बढ़ गया कि वे एक-दूसरे के खून के प्यासे हो गए। इस हिंसक संघर्ष के आंकड़े डराने वाले हैं; अब तक 20 से ज्यादा व्यस्क चिंपांजी और करीब 25 बच्चों की मौत इस आपसी लड़ाई में हो चुकी है। यह शोध प्रमाणित करता है कि चिंपांजी अपने समाज के भीतर अत्यंत सुनियोजित और गंभीर हिंसा को अंजाम दे सकते हैं।
इंसानी युद्ध और चिंपांजी संघर्ष: क्या है इनके व्यवहार के पीछे का मनोविज्ञान?
चिंपांजी और इंसानों के डीएनए में काफी समानता होती है, यही वजह है कि वैज्ञानिक उनके व्यवहार का अध्ययन कर मानव विकास को समझने की कोशिश करते हैं। एरॉन सैंडेल की टीम का मानना है कि इंसानों में युद्ध के पीछे अक्सर धर्म, राजनीति, जाति या विचारधारा जैसे जटिल कारण होते हैं। हालांकि, चिंपांजियों में ये कृत्रिम कारण नहीं होते। उनके बीच युद्ध का मुख्य कारण सामाजिक रिश्तों में बदलाव, समूह का टूटना या क्षेत्रीय विस्तार होता है। यह रिसर्च बताती है कि सामूहिक हिंसा और युद्ध करने की प्रवृत्ति हमारे भीतर शायद लाखों साल पुराने विकासवादी इतिहास से आई है।
इतिहास खुद को दोहरा रहा है: तंजानिया के बाद अब युगांडा में हिंसा
चिंपांजियों के बीच इस तरह का गृहयुद्ध पहली बार नहीं देखा गया है। 1970 के दशक में मशहूर शोधकर्ता जेन गुडॉल ने तंजानिया में भी चिंपांजियों के एक समूह को दो हिस्सों में टूटते और सालों तक एक-दूसरे से लड़ते हुए देखा था। उस समय कुछ विशेषज्ञों ने तर्क दिया था कि यह हिंसा इंसानों द्वारा उन्हें खाना दिए जाने के कारण उपजे असंतुलन से हुई थी। लेकिन नगोगो की वर्तमान घटना ने उन तर्कों को गलत साबित कर दिया है। नई रिसर्च स्पष्ट करती है कि बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप या बाहरी उकसावे के भी चिंपांजी अपने ही समूह के भीतर सत्ता और जमीन के लिए खूनी जंग लड़ सकते हैं।
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