Udhayanidhi Stalin : सनातन बयान पर मद्रास हाईकोर्ट सख्त, उदयनिधि टिप्पणी हेट स्पीच करार

मद्रास हाईकोर्ट ने उदयनिधि स्टालिन के सनातन धर्म को 'बीमारी' बताने वाले विवादित बयान पर अपना रुख साफ कर दिया है। कोर्ट ने इसे न केवल गलत माना, बल्कि 'हेट स्पीच' की श्रेणी में रखा है। क्या इस फैसले के बाद उदयनिधि की चुनावी योग्यता पर खतरा मंडराएगा? पूरी रिपोर्ट यहाँ पढ़ें।

Udhayanidhi Stalin

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जनवरी 21, 2026

Udhayanidhi Stalin: चुनावी साल के बीच मद्रास उच्च न्यायालय ने तमिलनाडु की सत्तारूढ़ DMK और उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन को बड़ा झटका दिया है। सनातन धर्म को लेकर दिए गए उदयनिधि स्टालिन के बयान पर अदालत ने कड़ी टिप्पणी करते हुए इसे हेट स्पीच की श्रेणी में रखा। कोर्ट ने कहा कि इस तरह के भड़काऊ बयान से सनातन धर्म को मानने वाले लोगों की सुरक्षा को खतरा हो सकता है।

अमित मालवीय के खिलाफ FIR रद्द

यह मामला तब चर्चा में आया जब बीजेपी नेता अमित मालवीय ने उदयनिधि स्टालिन के बयान का सार्वजनिक रूप से विरोध किया। इसके बाद DMK से जुड़े लोगों की शिकायत पर मालवीय के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई थी। अब मद्रास हाईकोर्ट ने इस एफआईआर को रद्द करते हुए कहा कि मालवीय के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही जारी रखना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा।

भाषण से हिंसा का संकेत मिल सकता है: कोर्ट

न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि मंत्री का भाषण लगभग 80 प्रतिशत हिंदुओं के खिलाफ लक्षित था और यह नफरत फैलाने वाले भाषण के दायरे में आता है। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि ऐसे बयान से नरसंहार जैसी गंभीर व्याख्या निकल सकती है, जो सामाजिक सौहार्द के लिए खतरनाक है।न्यायमूर्ति एस. श्रीमति ने कहा कि अमित मालवीय स्वयं सनातनी हैं और इस तरह के बयान से प्रभावित व्यक्ति हैं। उन्होंने केवल मंत्री के बयान पर प्रतिक्रिया दी थी और सनातन धर्म का पक्ष रखा था। अदालत के अनुसार, यह प्रतिक्रिया भारतीय दंड संहिता की किसी भी धारा के अंतर्गत अपराध नहीं बनती।

मंत्री पर केस नहीं, प्रतिक्रिया देने वाले पर कार्रवाई

अदालत ने यह भी दर्ज किया कि उदयनिधि स्टालिन के खिलाफ उनके कथित हेट स्पीच को लेकर कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं किया गया, जबकि उस बयान पर प्रतिक्रिया देने वाले व्यक्ति के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया। कोर्ट ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि यह न्यायसंगत नहीं है।यह पूरा विवाद वर्ष 2023 में आयोजित ‘सनातन उन्मूलन सम्मेलन’ से जुड़ा है, जहां उदयनिधि स्टालिन ने सनातन धर्म की तुलना डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों से की थी और इसके उन्मूलन की बात कही थी। इस बयान के बाद उनके खिलाफ मद्रास हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं भी दाखिल की गई थीं।

मालवीय पर क्यों दर्ज हुआ था मामला

सम्मेलन के बाद अमित मालवीय ने मंत्री के भाषण का वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया था। आरोप लगाया गया कि उन्होंने भाषण को तोड़-मरोड़ कर पेश किया और यह दर्शाने की कोशिश की कि मंत्री ने सनातन धर्म मानने वाले 80 प्रतिशत लोगों के खिलाफ हिंसा का आह्वान किया है। इसी आधार पर उनके खिलाफ IPC की धाराओं 153, 153A और 505(1)(B) के तहत मामला दर्ज किया गया था।मालवीय ने अदालत में कहा कि उन्होंने वही वीडियो साझा किया जो पहले से सार्वजनिक था और केवल उसके निहितार्थों पर सवाल उठाए। उनका तर्क था कि मंत्री का भाषण गंभीर प्रकृति का था और उसमें बहुसंख्यक समुदाय के खिलाफ नफरत फैलाने की क्षमता थी।

अभियोजन के आरोप और कोर्ट की टिप्पणी

अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया कि मालवीय ने गलत व्याख्या कर फर्जी जानकारी फैलाई। इस पर कोर्ट ने कहा कि जिस राजनीतिक दल से मंत्री जुड़े हैं, उसकी ओर से पहले भी सनातन धर्म को लेकर विवादास्पद टिप्पणियां की जाती रही हैं, इसलिए पूरे संदर्भ को देखना जरूरी है।अदालत ने यह भी कहा कि रिकॉर्ड में ऐसे उदाहरण मौजूद हैं, जहां पार्टी से जुड़े लोगों द्वारा भगवान राम की मूर्ति को चप्पल पहनाने या गणेश प्रतिमाओं को नुकसान पहुंचाने जैसी घटनाएं हुई हैं। कोर्ट के अनुसार, इससे यह स्पष्ट होता है कि हिंदू धर्म पर सुनियोजित हमले किए गए, जिन पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।