Uddhav Thackeray Attack: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बयानबाजी तेज हो गई है। शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला है। ठाकरे ने प्रधानमंत्री की उस मुलाकात पर सवाल उठाया, जिसमें उन्होंने एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना और अन्य बागी गुटों के सांसदों से दिल्ली में मुलाकात की थी। मुंबई में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उद्धव ठाकरे ने इस बैठक को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की और केंद्र सरकार पर राजनीतिक प्राथमिकताओं को लेकर निशाना साधा।
Gen Z प्रदर्शनकारियों से मिलने का समय नहीं-ठाकरे
उद्धव ठाकरे ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पास देश के युवाओं और जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे जनरेशन Z यानी Gen Z के लोगों से मिलने का समय नहीं है। लेकिन, उनके मुताबिक, प्रधानमंत्री उन नेताओं से मुलाकात कर रहे हैं, जिन्होंने शिवसेना से कथित तौर पर गद्दारी की। ठाकरे ने कहा कि सरकार को युवाओं और प्रदर्शनकारियों की समस्याओं को सुनने पर भी उतना ही ध्यान देना चाहिए।
बागी सांसदों को दिए भरोसे पर सवाल
ठाकरे ने प्रधानमंत्री की ओर से बागी सांसदों को दिए गए कथित भरोसे को भी मुद्दा बनाया। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में पिछले करीब चार वर्षों से शिवसेना के विभाजन और विधायकों-सांसदों की अयोग्यता से जुड़े मामले लंबित हैं। ऐसे समय में प्रधानमंत्री का बागी सांसदों से मिलना और उन्हें कथित तौर पर ‘डरो मत, मैं तुम्हारे साथ हूं’ जैसा भरोसा देना राजनीतिक रूप से कई सवाल खड़े करता है।
अमित शाह और फडणवीस को लेकर भी उठाया सवाल
उद्धव ठाकरे ने सवाल किया कि प्रधानमंत्री का यह संदेश आखिर किसके लिए था। उन्होंने पूछा कि क्या यह संदेश केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस या उन सभी लोगों के लिए है, जो भविष्य में किसी राजनीतिक दल के साथ विश्वासघात करने के बारे में सोच सकते हैं। ठाकरे के बयान को महाराष्ट्र की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों से जोड़कर देखा जा रहा है।
न्यायपालिका पर दबाव का जताया अंदेशा
शिवसेना (UBT) प्रमुख ने यह आशंका भी जताई कि क्या प्रधानमंत्री की इस तरह की मुलाकात के जरिए न्यायपालिका पर अप्रत्यक्ष दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या शीर्ष नेतृत्व की ओर से बागी नेताओं के साथ खड़े होने का संदेश देकर किसी तरह का राजनीतिक प्रभाव बनाने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि, ठाकरे ने साथ ही कहा कि उन्हें देश की न्यायपालिका और मुख्य न्यायाधीश पर पूरा भरोसा है।
2022 से जारी है शिवसेना विवाद
दरअसल, जून 2022 में शिवसेना में विभाजन के बाद से पार्टी के नियंत्रण, चुनाव चिह्न धनुष-बाण और राजनीतिक विरासत को लेकर विवाद लगातार जारी है। इस पूरे घटनाक्रम ने महाराष्ट्र की राजनीति को लंबे समय तक प्रभावित किया है। उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले दोनों गुट खुद को शिवसेना की राजनीतिक विरासत का वास्तविक दावेदार बताते रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट में लंबित है कानूनी लड़ाई
शिवसेना के विभाजन और इससे जुड़े अयोग्यता के मामलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में भी कानूनी लड़ाई चल रही है। न्यायमूर्ति सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ इस मामले से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर सुनवाई कर रही है। इसी पृष्ठभूमि में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शिंदे गुट के सांसदों के साथ हुई मुलाकात को उद्धव ठाकरे खेमे की ओर से गंभीर राजनीतिक संकेत के तौर पर देखा गया है।
महाराष्ट्र में फिर गरमाया सियासी माहौल
प्रधानमंत्री की बैठक के बाद उद्धव ठाकरे के बयान ने महाराष्ट्र की राजनीति में नई बहस को जन्म दे दिया है। एक ओर ठाकरे ने इसे राजनीतिक और न्यायिक प्रक्रिया से जोड़ते हुए सवाल उठाए हैं, वहीं दूसरी ओर यह मुलाकात सत्तारूढ़ खेमे और विपक्ष के बीच जारी राजनीतिक खींचतान को और तेज कर सकती है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर दोनों पक्षों के बीच बयानबाजी बढ़ने की संभावना है।
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