सीटें, कई दावेदार: झारखंड में राज्यसभा चुनाव को लेकर बढ़ी हलचल, गठबंधन गणित पर टिकी नजरें

रांची  झारखंड में आगामी राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज होने लगी है। राज्य से राज्यसभा की दो सीटें खाली होने जा रही हैं, जिन पर सत्तारूढ़ गठबंधन और विपक्ष दोनों की नजरें टिकी हुई हैं। इन सीटों को लेकर सत्ता पक्ष में भी अंदरूनी खींचतान के संकेत मिल रहे हैं, जबकि भाजपा सीमित संख्या के बावजूद मुकाबले को रोचक बनाने की रणनीति पर काम कर रही है। सत्तारूढ़ गठबंधन में शामिल झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) दोनों सीटों पर अपनी दावेदारी मजबूत मान रहा है। पार्टी का मानना है कि राज्य की राजनीति में उसकी प्रमुख भूमिका के मद्देनजर

Wrriten By :

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Published On :

अप्रैल 7, 2026

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रांची

 झारखंड में आगामी राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज होने लगी है। राज्य से राज्यसभा की दो सीटें खाली होने जा रही हैं, जिन पर सत्तारूढ़ गठबंधन और विपक्ष दोनों की नजरें टिकी हुई हैं। इन सीटों को लेकर सत्ता पक्ष में भी अंदरूनी खींचतान के संकेत मिल रहे हैं, जबकि भाजपा सीमित संख्या के बावजूद मुकाबले को रोचक बनाने की रणनीति पर काम कर रही है।

सत्तारूढ़ गठबंधन में शामिल झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) दोनों सीटों पर अपनी दावेदारी मजबूत मान रहा है। पार्टी का मानना है कि राज्य की राजनीति में उसकी प्रमुख भूमिका के मद्देनजर उसे अधिक प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। हालांकि, यह राह इतनी आसान नहीं है।

झामुमो को इन दोनों सीटों पर जीत सुनिश्चित करने के लिए कांग्रेस के सहयोग की आवश्यकता होगी। गठबंधन की मजबूती और आपसी तालमेल इस चुनाव में निर्णायक भूमिका निभाएंगे।

कांग्रेस के लिए भी यह चुनाव कम अहम नहीं है। असम विधानसभा चुनाव में तालमेल की कमी के कारण पार्टी पहले से ही असहज स्थिति में है। ऐसे में झारखंड में राज्यसभा सीट पर अपनी दावेदारी छोड़ना उसके लिए राजनीतिक रूप से नुकसानदायक साबित हो सकता है।

पार्टी के भीतर यह संदेश देने की कोशिश होगी कि वह गठबंधन में बराबरी की हिस्सेदार है और अपने राजनीतिक हितों से समझौता नहीं करेगी।

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भाजपा की मौजूदगी से रोमांचक होगा चुनाव, रेस में सीता सोरेन

विपक्षी भाजपा भी इस चुनाव को हल्के में लेने के मूड में नहीं दिख रही है। भले ही पार्टी के पास अपने दम पर जीत के लिए पर्याप्त संख्या नहीं है, लेकिन सहयोगी दलों आजसू पार्टी, जदयू और लोजपा के साथ मिलाकर उसके पास 24 वोट हैं। ऐसे में यदि भाजपा चार अतिरिक्त वोटों का इंतजाम कर लेती है तो वह अपने प्रत्याशी को जीत दिलाने की स्थिति में आ सकती है।

यही कारण है कि भाजपा संभावित क्रॉस वोटिंग और रणनीतिक समर्थन की संभावनाओं पर नजर बनाए हुए है। पार्टी के संभावित उम्मीदवारों को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। भाजपा की ओर से सीता सोरेन का नाम चर्चा में है। यदि उन्हें मैदान में उतारा जाता है तो चुनाव दिलचस्प हो सकता है।

आंकड़ा गठबंधन के पक्ष में

संख्या बल के लिहाज से देखें तो राज्यसभा चुनाव में जीत के लिए एक उम्मीदवार को निर्धारित 28 वोटों की आवश्यकता होगी। सत्तारूढ़ गठबंधन के घटक दलों झामुमो, कांग्रेस, राजद, भाकपा माले को मिलाकर 56 विधायकों का आंकड़ा है, जो दो सीटों पर जीत के लिए पर्याप्त है, लेकिन इसके लिए गठबंधन के घटक दलों में आपसी तालमेल और विश्वास आवश्यक है।

 

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