Twisha Sharma Death Case: ‘मरी हुई बेटी से अच्छी तलाकशुदा बेटी…’, सुप्रीम कोर्ट में भावुक हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता

भोपाल के हाई-प्रोफाइल ट्विशा शर्मा मौत मामले में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने आरोपी सास और पूर्व जिला जज गिरिबाला सिंह के आचरण पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

Twisha Sharma Death Case

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

मई 25, 2026

Twisha Sharma Death Case: भोपाल के हाई-प्रोफाइल ट्विशा शर्मा मौत मामले की गूंज देश की सर्वोच्च अदालत में सुनाई दी है। सोमवार (25 मई, 2026) को सुप्रीम कोर्ट में हुई एक बेहद संवेदनशील सुनवाई के दौरान देश के सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता ने एक ऐसी भावुक टिप्पणी की, जिसने कोर्ट रूम में मौजूद सभी लोगों को झकझोर कर रख दिया। मामले की गंभीरता को रेखांकित करते हुए एसजी मेहता ने कहा कि “एक तलाकशुदा बेटी, हमेशा एक मरी हुई बेटी से कहीं ज्यादा अच्छी होती है।” इसके साथ ही उन्होंने समाज और पीड़ित परिवार की मानसिकता पर भी गहरी नाराजगी जताई कि क्यों समय रहते बेटी की तकलीफों और शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया गया।

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सुप्रीम कोर्ट की बेंच के सामने तीखी बहस

यह महत्वपूर्ण सुनवाई देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचौली की विशेष पीठ के समक्ष हुई। अदालत में मध्य प्रदेश सरकार का पक्ष सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने रखा, जबकि मुख्य आरोपी परिवार (ट्विशा की सास) की पैरवी वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे कर रहे थे।

अदालत का रुख

सुनवाई के दौरान जब मीडिया ट्रेल और अखबारों में छप रहे बयानों को लेकर सवाल उठे, तो सीजेआई सूर्यकांत ने साफ किया कि अदालत किसी भी तरह का बनावटी नैरेटिव गढ़ने के सख्त खिलाफ है। यही वजह है कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए इसकी जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंपी गई है। शीर्ष अदालत ने कहा कि उन्हें देश की पुलिस और न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है। साथ ही कोर्ट ने मीडिया से बेहद जिम्मेदारी से काम करने और आरोपियों या पीड़ितों के रिश्तेदारों के बयानों के आधार पर समानांतर ट्रायल न चलाने की सख्त अपील की।

“बहू को बदनाम कर रही हैं पूर्व जज सास”—एसजी मेहता के गंभीर आरोप

लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, सुनवाई के दौरान एसजी तुषार मेहता ने ट्विशा शर्मा की सास और पूर्व जिला न्यायाधीश (जज) गिरिबाला सिंह के आचरण पर बेहद गंभीर सवाल खड़े किए।

मीडिया में इंटरव्यू देने पर आपत्ति

एसजी मेहता ने दलील दी कि एक तरफ आरोपी पक्ष मीडिया रिपोर्ट्स पर आपत्ति जता रहा है, तो दूसरी तरफ खुद आरोपी सास गिरिबाला सिंह, जो खुद कानून की जानकार और पूर्व जिला जज रही हैं, अलग-अलग टीवी चैनलों पर जाकर इंटरव्यू दे रही हैं। वे मीडिया के माध्यम से अपनी ही मृत बहू को बदनाम करने की कोशिश कर रही हैं।

जांच में असहयोग का आरोप

सरकार की तरफ से कोर्ट को बताया गया कि पुलिस और जांच एजेंसियों ने कई बार पूर्व जज गिरिबाला सिंह का बयान दर्ज करने की कोशिश की, लेकिन वे लगातार आनाकानी करती रहीं और उन्होंने जांच में कोई सहयोग नहीं किया। हालांकि, गिरिबाला के वकील सिद्धार्थ दवे ने इन आरोपों का पुरजोर विरोध करते हुए कहा कि यह दावे गलत हैं और उनकी मुवक्किल ने अपना बयान रिकॉर्ड कराया है।

सबूत मिटाने और एफआईआर में देरी का मुद्दा

ट्विशा शर्मा के पीड़ित परिवार की ओर से देश के दिग्गज वकील सिद्धार्थ लूथरा ने अदालत में पैरवी की। उन्होंने स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि इतनी बड़ी घटना होने के बावजूद तीन दिन बाद एफआईआर (FIR) दर्ज की गई। इस देरी की वजह से घटनास्थल से महत्वपूर्ण सबूतों को सुरक्षित रखने में भारी लापरवाही बरती गई, जिससे मामला प्रभावित हो सकता है। लूथरा ने यह भी आरोप लगाया कि पूर्व जज अपनी हनक का इस्तेमाल कर खुद ही अपना कॉल डेटा रिकॉर्ड (CDR) पेश कर रही थीं, जिसकी कानूनी रूप से अनुमति नहीं है।

सुनवाई के अंत में, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को एक अहम प्रशासनिक अपडेट देते हुए बताया कि मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के कड़े निर्देशों का पालन करते हुए दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) के डॉक्टरों की विशेष टीम ने रविवार (24 मई, 2026) को मृतका ट्विशा शर्मा का दूसरा पोस्टमार्टम (Re-postmortem) पूरा कर लिया है, जिसकी रिपोर्ट जल्द ही जांच का हिस्सा बनेगी।

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