Delhi Violence: दिल्ली के तुर्कमान गेट इलाके में अवैध अतिक्रमण हटाने गई एमसीडी (MCD) की टीम पर हुए पथराव ने अब राजनीतिक तूल पकड़ लिया है। इस मामले में उत्तर प्रदेश के रामपुर से समाजवादी पार्टी के सांसद मोहिबुल्लाह नदवी का नाम सामने आने के बाद दिल्ली से लेकर लखनऊ तक सियासत गरमा गई है। पुलिस अब इस साजिश में सांसद की भूमिका की जांच कर रही है।
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अतिक्रमण विरोधी अभियान
बताते चले कि, नगर निगम की टीम जब कोर्ट के आदेशानुसार तुर्कमान गेट के पास अवैध कब्जों को हटाने पहुंची, तो वहां माहौल अचानक तनावपूर्ण हो गया। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, कार्रवाई के दौरान भारी संख्या में लोग इकट्ठा हो गए और टीम पर पथराव शुरू कर दिया। दिल्ली पुलिस के अधिकारी मधुर वर्मा ने पुष्टि की है कि करीब 100 से 150 उपद्रवी इस हिंसा में शामिल थे। इस हमले के बाद एमसीडी को अपना काम बीच में ही रोकना पड़ा और सुरक्षा बलों को स्थिति नियंत्रित करने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ी।
सपा सांसद मोहिबुल्लाह नदवी की भूमिका पर गहराया संदेह
आपको बता दे कि, इस पूरे विवाद में नया मोड़ तब आया जब रामपुर के सपा सांसद मोहिबुल्लाह नदवी का नाम प्राथमिकी और जांच के दायरे में आया। नदवी, जो संसद मार्ग स्थित मस्जिद के इमाम भी हैं, पर आरोप है कि उन्होंने देर रात इलाके का दौरा किया और लोगों को कथित तौर पर उकसाया। दिल्ली पुलिस अब इस बात की तफ्तीश कर रही है कि क्या उनकी मौजूदगी और उनके बयानों ने भीड़ को हिंसक होने के लिए प्रेरित किया। पुलिस जल्द ही उनसे पूछताछ करने की तैयारी में है।
भाजपा प्रवक्ता नवीन कोहली का तीखा प्रहार
भाजपा नेता और प्रवक्ता नवीन कोहली ने इस घटना को एक सोची-समझी साजिश करार दिया है। उन्होंने सवाल उठाया कि “आधी रात के वक्त कोई सांसद तुर्कमान गेट क्यों जाता है?” कोहली ने कहा कि जब मामला कोर्ट के आदेश और आपसी संवाद से जुड़ा था, तो सपा सांसद ने धर्म को बीच में लाकर माहौल बिगाड़ने की कोशिश क्यों की। उन्होंने समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव से मांग की है कि वे इस पर अपनी चुप्पी तोड़ें और स्पष्ट करें कि क्या वे अपने सांसद की इन हरकतों का समर्थन करते हैं।
दिल्ली पुलिस की सख्त कानूनी कार्रवाई
हिंसा के बाद दिल्ली पुलिस एक्शन मोड में है। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की 7 अलग-अलग धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की है। अब तक कम से कम 15 लोगों को हिरासत में लिया गया है। हमलावरों की पहचान आदिल कासिफ, मोहम्मद कैफ, मोहम्मद अरीब, उजैफ और आजिम इरफान के रूप में हुई है। पुलिस का कहना है कि किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर अन्य दंगाइयों की तलाश जारी है।
भ्रामक वीडियो और ऑडियो नोट्स वायरल करने वालों पर नकेल
जांच के दौरान यह भी पाया गया कि हिंसा भड़काने के लिए तकनीक का सहारा लिया गया। पुलिस ने उन व्यक्तियों की पहचान कर ली है जिन्होंने व्हाट्सएप और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भड़काऊ वीडियो और ऑडियो मैसेज फैलाए। अदनान और समीर नामक युवकों पर आरोप है कि उन्होंने गलत जानकारी साझा कर भीड़ को लामबंद किया। पुलिस साइबर सेल के माध्यम से इन डिजिटल सबूतों को सुरक्षित कर रही है ताकि मास्टरमाइंड तक पहुँचा जा सके।










