Tu Ya Main Review: फर्स्ट हाफ में गिरावट, सेकेंड हाफ में चमके आदर्श और शनाया

कमजोर स्क्रिप्ट और ढीले ट्रीटमेंट के कारण तू या मैं दर्शकों को बांधने में असफल रहती है। एक्टर्स ने पूरी मेहनत की है, लेकिन कहानी और प्रस्तुति की कमी उनकी परफॉर्मेंस पर भारी पड़ती है।

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

फ़रवरी 13, 2026

Tu Ya Main Review: Tu Ya Main की कहानी थाई फिल्म The Pool से प्रेरित है, लेकिन इसे सीधे रीमेक कहने के बजाय थोड़ा बदलकर हिंदी स्क्रीन पर पेश किया गया है। हालांकि ओरिजनल फिल्म हिंदी में यूट्यूब पर उपलब्ध है, लेकिन वह इतनी लंबी या थकाऊ नहीं है। नई फिल्म की लंबाई लगभग 2 घंटे 25 मिनट है, जो दर्शकों के सब्र की परीक्षा लेती है। फिल्म का कमजोर स्क्रीनप्ले और ट्रिटमेंट उसे औसत दर्जे की फिल्म बनाता है, लेकिन आदर्श गौरव और शनाया की एक्टिंग कुछ हद तक इसे बचा लेती है।

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कहानी

Tu Ya Main Review
फर्स्ट हाफ में गिरावट

फिल्म की कहानी दो इंफ्लुएंसर्स के इर्द-गिर्द घूमती है। एक लड़की मिस वैनिटी है, जिसके 2 मिलियन फॉलोअर्स हैं, जबकि लड़के के केवल 10 हजार फॉलोअर्स हैं। दोनों की मुलाकात होती है, दोस्ती बढ़ती है और फिर इश्क की शुरुआत होती है। कहानी का मुख्य ट्विस्ट तब आता है जब दोनों एक स्विमिंग पूल में फंस जाते हैं और वहां एक मगरमच्छ आ जाता है। ट्रेलर में दिखाया गया यह प्लॉट दर्शक पहले से जानते हैं। इसके बाद कहानी यह बताती है कि वे इस स्थिति से कैसे बाहर निकलते हैं।

फिल्म का फर्स्ट हाफ

फिल्म का पहला हाफ बहुत कमजोर है। ऐसा लगता है कि फिल्म में हर कोई गाना बनाने की कोशिश कर रहा है। हर थोड़ी देर में गाने का एंट्री दर्शकों को इरिटेट करती है। फर्स्ट हाफ में दोनों मुख्य किरदारों की केमिस्ट्री और उनके रिश्ते का विकास समझ में नहीं आता। लड़की और लड़के के बीच आकर्षण का कारण अस्पष्ट है।

सेकेंड हाफ

सेकेंड हाफ में ही असली कहानी शुरू होती है। हालांकि यह हिस्सा थोड़ा बेहतर है, लेकिन फिर भी यह ना तो दर्शकों को डराने में कामयाब होता है और ना ही पूरी तरह बांध पाता है। कुछ सीन लॉजिक से काफी दूर लगते हैं। कुल मिलाकर सेकेंड हाफ फिल्म को कुछ हद तक बचाता है।

एक्टिंग

Tu Ya Main Review
फर्स्ट हाफ में गिरावट

आदर्श गौरव ने फिल्म में शानदार प्रदर्शन किया है। मुंबई के लोकल रैपर के किरदार में उन्होंने अपनी पूरी मेहनत दिखाई और फिल्म को अपने कंधों पर उठाया। उनका लुक, बोली और बॉडी लैंग्वेज प्रभावशाली हैं। शनाया ने भी अच्छा काम किया है। उन्होंने नेपो-किड होने के बावजूद अपने किरदार में विश्वास और स्वाभाविकता दिखाई। स्विमिंग पूल सीन में भी उनका प्रदर्शन संतुलित और सौम्य रहा। पारुल गुलाटी का छोटा रोल फिल्म में जरूरी नहीं था और उनके अभिनय का असर भी सीमित रहा।

राइटिंग और डायरेक्शन

हिमांशु शर्मा ने कहानी लिखी है और बिजॉय नांबियार ने इसे डायरेक्ट किया। फिल्म का ट्रिटमेंट कमजोर है और कहानी को बहुत खींचा गया है। इसे आराम से दो घंटे में निपटाया जा सकता था। डायरेक्शन कुछ सीन में अच्छा है और लोकेशन का इस्तेमाल प्रभावशाली रहा, लेकिन कुल मिलाकर फिल्म औसत ही साबित हुई।

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