Punjab News: केंद्र सरकार के ‘डिजिटल इंडिया’ अभियान को एक बड़ा झटका लग सकता है। देश भर के पेट्रोल पंप डीलर, जो कल तक ग्राहकों को कैशलेस इकॉनमी और डिजिटल भुगतान (जैसे- Google Pay, UPI, Paytm) के लिए बढ़-चढ़कर प्रोत्साहित कर रहे थे, अब ऑनलाइन पेमेंट स्वीकार करने से कतराने लगे हैं। इस अचानक आए बदलाव के पीछे केंद्रीय वित्त मंत्रालय द्वारा 14 सितंबर को जारी की गई एक गजट अधिसूचना है। इस नए आदेश ने पेट्रोलियम इंडस्ट्री से जुड़े कारोबारियों की चिंताएं बढ़ा दी हैं और वे इसके कड़े विरोध में उतर आए हैं।
Punjab News: पंजाब सरकार ने बढ़ाया कर्मचारियों का DA, वित्त विभाग ने जारी
वित्त मंत्रालय के नए नियम से पलटे हालात

सरकार की नई अधिसूचना के अनुसार, पेट्रोल पंपों पर 2000 रुपये से अधिक के डिजिटल भुगतान (कैशलेस ट्रांजैक्शन) पर अब अतिरिक्त चार्ज लगेगा। सबसे बड़ी समस्या यह है कि यह अतिरिक्त शुल्क ग्राहकों से नहीं, बल्कि पेट्रोल पंप डीलरों की जेब से वसूला जाएगा। इस आदेश के लागू होने के बाद से ही पेट्रोल पंप संचालकों में भारी रोष है। कल तक जो डीलर ग्राहकों को डिजिटल पेमेंट के फायदे गिनाते थे, वे अब बड़े भुगतानों के लिए नकद (Cash) को प्राथमिकता देने पर विचार कर रहे हैं।
2000 रुपये से अधिक के लेन-देन पर है मुख्य विवाद

पेट्रोल पंपों पर ईंधन भराने वाले अधिकांश व्यावसायिक वाहन, कारें, ट्रक, बसें और फैक्ट्रियों के लिए खरीदे जाने वाले डीजल का बिल आमतौर पर 2000 रुपये से अधिक ही होता है। ऐसे में इन बड़े भुगतानों को अगर ग्राहक डिजिटल माध्यम से करते हैं, तो डीलरों को बैंक या पेमेंट गेटवे को अपनी जेब से ट्रांजैक्शन चार्ज देना पड़ेगा। पेट्रोलियम डीलर एसोसिएशन (विशेषकर पंजाब के कारोबारियों) ने सरकार के इस फैसले का कड़ा विरोध करते हुए इसे पेट्रोलियम सेक्टर को नुकसान पहुंचाने वाला कदम बताया है। उनका गुस्सा अब सातवें आसमान पर है।
रोजाना 12,500 रुपये का सीधा आर्थिक नुकसान
डीलरों ने इस नुकसान का गणित समझाते हुए बताया कि एक औसतन बड़े और व्यस्त पेट्रोल पंप पर प्रतिदिन 2000 रुपये से ऊपर की लगभग 2500 से अधिक ट्रांजैक्शन होती हैं। यदि प्रति ट्रांजैक्शन डीलर को 5 रुपये भी अपनी जेब से भरने पड़ें, तो उसे हर दिन लगभग 12,500 रुपये का सीधा आर्थिक नुकसान सहना पड़ेगा। महीने भर में यह आंकड़ा लाखों में पहुंच जाता है। डीलरों का कहना है कि पेट्रोलियम कारोबार पहले से ही कम मार्जिन के कारण ‘वेंटिलेटर’ पर है, ऐसे में यह नया आर्थिक बोझ उनका गला घोंटने के समान है।
कमीशन में हो भारी बढ़ोतरी

पेट्रोलियम कारोबारियों ने सरकार के सामने स्पष्ट कर दिया है कि वे इस अतिरिक्त वित्तीय बोझ को उठाने में पूरी तरह असमर्थ हैं। उनकी सरकार से अपील है कि यदि डिजिटल भुगतान पर इस तरह के चार्ज लागू रखे जाते हैं, तो पेट्रोल और डीजल की बिक्री पर मिलने वाले डीलर कमीशन में तत्काल वृद्धि की जाए। एसोसिएशन ने मांग की है कि डीलर कमीशन में कम से कम 5 से 7 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की जाए, ताकि वे अपने खर्चों का प्रबंधन कर सकें। यदि सरकार इस मुद्दे का जल्द समाधान नहीं निकालती है, तो आने वाले दिनों में आम जनता को पेट्रोल पंपों पर कैशलेस भुगतान करने में भारी असुविधा का सामना करना पड़ सकता है।
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