West Asia Tension: अमेरिका-ईरान के बीच चल रहा युद्ध थमने का नाम नहीं ले रहा है।अमेरिका ने अपनी कार्रवाई तेज करते हुए पश्चिमी एशिया में हजारों सैनिकों को तैनात करना भी शुरू कर दिया है।इस कड़ी में यूएस आर्मी की एलीट 82वीं एयरबोर्न डिवीजन के हजारों सैनिक वहां पहुंचने शुरू हो गए हैं। दो अमेरिकी अधिकारियों ने इस बारे में जानकारी दी और बताया कि,राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के खिलाफ युद्ध में अपने अगले ठोस कदम पर विचार कर रहे हैं।
ईरान को ट्रंप की चेतावनी
अमेरिका ने पैराट्रूपर्स के साथ-साथ अतिरिक्त सैनिक,नाविकों,मरीन और विशेष संचालन बलों की संख्या में इजाफा किया है।इससे पहले भी बीते सप्ताह लगभग 2,500 मरीन मध्य पूर्व पहुंचे थे।ट्रंप के इस कदम को खार्ग द्वीप पर कब्जा करने या नियंत्रण में लेने से जोड़कर देखा जा रहा है।हालांकि अभी तक कोई आधिकारिक निर्णय इसको लेकर नहीं लिया गया है।इससे पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी थी कि,यदि ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को नहीं खोला तो अमेरिका ईरान के ऊर्जा संयंत्रों और तेल कुओं को नष्ट कर देगा।
ईरान के ऊर्जा संयंत्रों को नष्ट करने की धमकी
ट्रंप की ओर से यह चेतावनी उस समय दी गई जब ईरान ने अमेरिकी शांति प्रस्तावों को अवास्तविक करार दिया और इजराइल पर मिसाइलों की बौछार कर दी।राष्ट्रपति ट्रंप ने चेतावनी दी अगर तेहरान होर्मुज जलडमरूमध्य को नहीं खोलता है तो अमेरिका ईरान के ऊर्जा संयंत्रों और तेल के कुओं को पूरी तरह तबाह कर देगा।
ईरान समर्थित हिज्बुल्लाह भी कूदा युद्ध में
वहीं इजराइल की सेना ने बताया कि,यमन से आए दो ड्रोन को भी रोक लिया गया।यह घटना ईरान-समर्थित हूती विद्रोहियों के युद्ध में शामिल होने के दो दिन बाद हुई।हूती विद्रोहियों ने इजराइल पर मिसाइलें दागी थीं।लेबनान के हिज़्बुल्लाह संगठन ने भी इजराइल पर रॉकेट दागे थे।इजरायली सेना ने तेहरान में जिसे उन्होंने ‘सैन्य ढांचा’ कहा और बेरूत में ईरान-समर्थित हिज़्बुल्लाह द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले ढांचे पर मिसाइल हमले किए,जिससे लेबनान की राजधानी के ऊपर काला धुआं छा गया।
वैश्विक अर्थव्यवस्था को युद्ध से भारी नुकसान
एक महीने से चल रहे इस युद्ध में तेहरान का रुख अब भी अडिग है।यह युद्ध 28 फरवरी को ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमलों के साथ शुरू हुआ था और अब पूरे क्षेत्र में फैल चुका है।इसके चलते हजारों लोगों की जान जा चुकी है, ऊर्जा आपूर्ति बाधित हुई है और वैश्विक अर्थव्यवस्था को भी नुकसान पहुंचा है।







