US Iran Conflict: इस्लामाबाद में होगी ‘फाइनल’ डील? ट्रंप का ईरान को अल्टीमेटम—’रीज़नेबल डील’ मानो या तबाही चुनो

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को सख्त लहजे में चेतावनी दी है कि यदि वे इस्लामाबाद में होने वाली शांति वार्ता में 'तर्कसंगत समझौता' स्वीकार नहीं करते, तो अमेरिका ईरान के बुनियादी ढांचे को पूरी तरह नष्ट कर देगा। ट्रंप ने ईरान पर सीजफायर उल्लंघन का आरोप लगाते हुए इसे 'नो मोर मिस्टर नाइस गाय' की नीति बताया है।

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

अप्रैल 19, 2026

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US Iran Conflict: पश्चिम एशिया में गहराते सैन्य तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ अब तक का सबसे आक्रामक रुख अपनाया है। रविवार को एक सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए ट्रंप ने ईरान को दो टूक लहजे में चेतावनी दी कि यदि वह कूटनीतिक समझौते के लिए तैयार नहीं हुआ, तो अमेरिका उसके पूरे बुनियादी ढांचे को नेस्तनाबूद कर देगा।

सीजफायर के उल्लंघन पर ट्रंप का गुस्सा

बताते चले कि, डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर संघर्षविराम की शर्तों को तोड़ने का सीधा आरोप लगाया है। उन्होंने ‘ट्रुथ सोशल’ पर लिखा कि ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) में गोलियां चलाकर युद्धविराम समझौते का पूर्ण उल्लंघन किया है। ट्रंप के अनुसार, ईरानी हमलों का निशाना ब्रिटेन और फ्रांस के मालवाहक जहाज बने, जो कतई स्वीकार्य नहीं है। राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में इस तरह की उकसावे वाली कार्रवाई के गंभीर परिणाम होंगे और अमेरिका इसे मूकदर्शक बनकर नहीं देखेगा।

इस्लामाबाद में कूटनीतिक वार्ता

एक तरफ सैन्य हमले की धमकी और दूसरी तरफ कूटनीति का रास्ता दिखाते हुए ट्रंप ने पाकिस्तान में होने वाली बैठक का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि अमेरिकी प्रतिनिधि सोमवार (20 अप्रैल) को इस्लामाबाद में द्विपक्षीय बातचीत के लिए पहुंच रहे हैं। ट्रंप ने ईरान के सामने एक ‘उचित और तर्कसंगत’ समझौते का प्रस्ताव रखा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि ईरान इस कूटनीतिक समाधान को स्वीकार कर लेगा, ताकि क्षेत्र में जारी अस्थिरता को खत्म किया जा सके और एक स्थायी शांति की ओर बढ़ा जा सके।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की नाकेबंदी

ट्रंप ने ईरान के आर्थिक तंत्र पर प्रहार करते हुए कहा कि अमेरिकी नाकेबंदी (Blockade) पहले से ही प्रभावी है। उन्होंने दावा किया कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य की पाबंदी के कारण ईरान को प्रतिदिन 50 करोड़ डॉलर का भारी वित्तीय नुकसान हो रहा है। ट्रंप के अनुसार, ईरान का रास्ता बंद करने का दावा हास्यास्पद है क्योंकि अमेरिकी कार्रवाई ने उसकी अर्थव्यवस्था को पहले ही पंगु बना दिया है। दिलचस्प बात यह है कि ट्रंप ने इसे अमेरिका के लिए फायदेमंद बताया, क्योंकि अब तेल के लिए जहाज टेक्सस और लुइसियाना की ओर रुख कर रहे हैं।

ईरानी बुनियादी ढांचे की तबाही

चेतावनी को और सख्त करते हुए ट्रंप ने कहा कि अब “शराफत दिखाने का समय बीत चुका है।” उन्होंने धमकी दी कि अगर ईरान ने प्रस्तावित समझौते पर हस्ताक्षर नहीं किए, तो अमेरिकी सेना ईरान के हर एक पावर प्लांट और पुल को नष्ट कर देगी। ट्रंप ने इसे ‘ईरान की किलिंग मशीन’ को खत्म करने का मिशन बताया। उन्होंने जोर देकर कहा कि जो काम पिछले 47 वर्षों में किसी अमेरिकी राष्ट्रपति ने नहीं किया, वह उसे पूरा करना अपना सम्मान समझेंगे।

ईरान ने अमेरिका पर “विश्वासघात” का आरोप लगाया

अमेरिका और ईरान के बीच यह ताजा संघर्ष 28 फरवरी के हमलों के बाद शुरू हुआ था। पाकिस्तान की मध्यस्थता में हुआ दो सप्ताह का सीजफायर अब खतरे में नजर आ रहा है। पिछले दौर की वार्ता बेनतीजा रहने के बाद, ईरान ने अमेरिका पर “विश्वासघात” का आरोप लगाया है और शनिवार से फिर पाबंदियां लगा दी हैं। अब सोमवार को पाकिस्तान में दूसरे दौर की बातचीत पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं, क्योंकि यह वार्ता तय करेगी कि पश्चिम एशिया शांति की ओर बढ़ेगा या महायुद्ध की ओर।

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