Trump vs Iran: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ अपने आक्रामक रुख को और कड़ा करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि जब तक तेहरान बिना शर्त आत्मसमर्पण (सरेंडर) नहीं करता, तब तक कोई भी शांति समझौता संभव नहीं है। एक प्रमुख समाचार चैनल को दिए टेलीफोनिक इंटरव्यू में ट्रंप ने मध्य-पूर्व में तत्काल युद्धविराम की किसी भी संभावना को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने खुलासा किया कि हालांकि ईरान तनाव को कम करने और शत्रुता समाप्त करने में रुचि दिखा रहा है, लेकिन वे वर्तमान शर्तों से कतई संतुष्ट नहीं हैं। ट्रंप ने जोर देकर कहा कि कोई भी भावी समझौता “बहुत ठोस” होना चाहिए, जिससे अमेरिका और उसके सहयोगियों के हितों की रक्षा हो सके।
मुज्तबा खामेनेई की सेहत पर रहस्य और ट्रंप का दावा
राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान के नए सुप्रीम लीडर मुज्तबा खामेनेई की स्थिति को लेकर एक बड़ा और चौंकाने वाला दावा किया है। उन्होंने अयातुल्लाह अली खामेनेई के उत्तराधिकारी की सेहत पर संदेह जताते हुए कहा, “मैंने सुना है कि ईरान के नए सुप्रीम लीडर अब जीवित नहीं हैं।” मुज्तबा खामेनेई के सार्वजनिक रूप से दिखाई न देने पर टिप्पणी करते हुए ट्रंप ने कहा कि अब तक कोई भी उनसे मिल नहीं पाया है, जो उनकी मृत्यु या गंभीर स्थिति की ओर इशारा करता है। उन्होंने आगे कहा कि यदि वे जीवित हैं, तो उन्हें अपने देश को तबाही से बचाने के लिए समझदारी दिखाते हुए तुरंत सरेंडर कर देना चाहिए।
खारग द्वीप की तबाही और सैन्य शक्ति का प्रदर्शन
ईरान की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले रणनीतिक तेल निर्यात केंद्र ‘खारग द्वीप’ पर हुए हमलों को लेकर ट्रंप ने बड़ी जानकारी साझा की। उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी सेना के हमलों में यह द्वीप पूरी तरह से नष्ट हो गया है। ट्रंप ने तंज कसते हुए कहा, “हमने इसे पूरी तरह तबाह कर दिया है, और हम मजे के लिए इस पर कुछ और हमले भी कर सकते हैं।” हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि अमेरिका ने केवल रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया है और भविष्य में पुनर्निर्माण की संभावनाओं को देखते हुए कुछ ऊर्जा अवसंरचनाओं को सुरक्षित रखा है। ट्रंप के अनुसार, अमेरिका ने ईरान की अधिकांश मिसाइलों और ड्रोन क्षमताओं को पहले ही बर्बाद कर दिया है।
होर्मुज स्ट्रेट में वैश्विक शक्तियों से युद्धपोत तैनात करने की अपील
विश्व व्यापार के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग ‘होर्मुज स्ट्रेट’ में जारी तनाव को देखते हुए ट्रंप ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से सक्रिय होने का आह्वान किया है। उन्होंने ब्रिटेन, चीन, फ्रांस, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों से अपील की है कि वे इस महत्वपूर्ण जलमार्ग की सुरक्षा के लिए अपने युद्धपोत तैनात करें। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि उन्हें अपनी इस आक्रामक रणनीति का आगामी चुनावों पर पड़ने वाले प्रभाव की “बिल्कुल भी चिंता नहीं” है। उनका एकमात्र उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ईरान फिर कभी मध्य-पूर्व क्षेत्र में अपनी धाक न जमा सके और वैश्विक सुरक्षा के लिए खतरा न बने।
क्षेत्रीय सुरक्षा और भविष्य की राजनयिक रणनीति
इंटरव्यू के अंत में ट्रंप ने अपनी सैन्य और राजनयिक रणनीति का बचाव करते हुए इसे क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए अनिवार्य बताया। उन्होंने कहा कि अमेरिका की वर्तमान कार्रवाई ईरान की घरेलू उत्पादन क्षमता और सैन्य मनोबल को तोड़ने के लिए है। अमेरिकी प्रशासन का मानना है कि ‘अधिकतम दबाव’ (Maximum Pressure) की यह नीति ही ईरान को वार्ता की मेज पर झुकने के लिए मजबूर करेगी। ट्रंप ने साफ संदेश दिया कि वे मध्य-पूर्व में शक्ति संतुलन को पूरी तरह से बदलने के लिए प्रतिबद्ध हैं, चाहे इसके लिए कितनी ही कड़ी सैन्य कार्रवाई क्यों न करनी पड़े।










