Trump Warning: तुर्की के इस्तांबुल शहर में होने वाली प्रस्तावित बातचीत से पहले ईरान के तेवर बदलते नजर आ रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, तेहरान ने अपने विवादित परमाणु कार्यक्रम को अस्थायी रूप से सस्पेंड करने या पूरी तरह बंद करने पर विचार करने के संकेत दिए हैं। यह बदलाव ऐसे समय में आया है जब डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने ईरान के खिलाफ सख्त रुख अख्तियार कर रखा है। अमेरिकी अधिकारी और ईरानी प्रतिनिधि अब इस्तांबुल में आमने-सामने बैठकर मध्यस्थता की राह तलाशने की तैयारी में जुटे हैं। इस संभावित बैठक को खाड़ी क्षेत्र में शांति बहाल करने की आखिरी बड़ी कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
ट्रंप के दूत और ईरानी विदेश मंत्री की मुलाकात: एक महत्वपूर्ण मोड़
माना जा रहा है कि शुक्रवार को होने वाली इस उच्च-स्तरीय बैठक में डोनाल्ड ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और उनके दामाद जेरेड कुशनर शामिल हो सकते हैं। इनकी मुलाकात ईरान के विदेश मंत्री से होने की उम्मीद है, जिसमें तुर्की, कतर और मिस्र जैसे क्षेत्रीय प्रभाव वाले देशों के अधिकारी भी गवाह बनेंगे। यह कूटनीतिक सक्रियता उस समय बढ़ी है जब अमेरिका ने मध्य पूर्व में अपनी युद्धक क्षमता और बड़े सैन्य संसाधन तैनात कर दिए हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि यदि बातचीत विफल रहती है, तो अमेरिका सैन्य कार्रवाई (Air Strikes) से पीछे नहीं हटेगा।
सुप्रीम लीडर खामेनेई के रुख में बदलाव: युद्ध का बढ़ता खतरा
ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई, जो हमेशा से अमेरिका के सामने न झुकने की कसमें खाते रहे हैं, अब कुछ नरम पड़ते दिखाई दे रहे हैं। इससे पहले तेहरान ने परमाणु कार्यक्रम रोकने की ट्रंप की हर शर्त को सिरे से खारिज कर दिया था। खामेनेई ने चेतावनी दी थी कि किसी भी अमेरिकी हमले की सूरत में पूरे क्षेत्र में एक विनाशकारी युद्ध छिड़ सकता है। लेकिन अब, सैन्य दबाव और आर्थिक प्रतिबंधों के दोहरे संकट को देखते हुए, ईरान की ओर से बातचीत की मेज पर आने की इच्छा जताना एक बड़े कूटनीतिक बदलाव का संकेत है।
परमाणु कार्यक्रम को सस्पेंड करने की शर्तें: रूस की भूमिका
ताजा रिपोर्टों के मुताबिक, संभावित अमेरिकी हमले को टालने के लिए ईरान कुछ कड़ी शर्तें मानने को तैयार है। ईरान ने संकेत दिया है कि वह अपना न्यूक्लियर एनरिचमेंट सस्पेंड कर सकता है, लेकिन वह उस पुराने प्रस्ताव को प्राथमिकता दे रहा है जिसमें परमाणु ऊर्जा के लिए एक क्षेत्रीय कंसोर्टियम बनाने की बात कही गई थी। हाल ही में ईरान की नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव अली लारीजानी ने मॉस्को में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात कर खामेनेई का संदेश सौंपा था। इससे यह स्पष्ट होता है कि ईरान इस सौदे में रूस को एक मध्यस्थ और गारंटर के रूप में शामिल करना चाहता है।
यूरेनियम एनरिचमेंट में कटौती: क्या चाहता है तेहरान?
ईरान ने संकेत दिया है कि वह परमाणु बम बनाने में सहायक ‘एनरिच्ड यूरेनियम’ के अपने भंडार को रूस भेज सकता है, जैसा कि उसने 2015 की ऐतिहासिक न्यूक्लियर डील (JCPOA) के दौरान किया था। हालांकि, सुप्रीम लीडर के वरिष्ठ सलाहकार अली शमखानी का कहना है कि ईरान अपना पूरा भंडार खत्म नहीं करेगा। यदि अमेरिका कुछ ठोस आर्थिक लाभ और प्रतिबंधों में राहत देता है, तो ईरान यूरेनियम संवर्धन (Enrichment) के स्तर को 60 प्रतिशत से घटाकर 20 प्रतिशत तक लाने के लिए राजी हो सकता है।
डोनाल्ड ट्रंप की चेतावनी: बातचीत या बड़े जहाजों का प्रहार
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मौजूदा स्थिति पर टिप्पणी करते हुए कहा कि उनके “बहुत बड़े जहाज” ईरान की दिशा में बढ़ रहे हैं। उन्होंने यह भी पुष्टि की कि ईरान के साथ बातचीत जारी है और तेहरान अब चर्चा के लिए गंभीर नजर आ रहा है। ट्रंप ने संकेत दिया है कि परमाणु हथियारों को लेकर एक निश्चित समयसीमा (Deadline) तय की गई है। ट्रंप की इस रणनीति को ‘दबाव के जरिए कूटनीति’ के रूप में देखा जा रहा है, जहाँ एक तरफ बातचीत के दरवाजे खुले रखे गए हैं और दूसरी तरफ सैन्य कार्रवाई की तलवार लटकी हुई है।
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