Trump Nuclear Codes : ट्रंप ने ईरान पर परमाणु हमले के लिए मांगे थे कोड्स, पूर्व सीआईए विश्लेषक का बड़ा दावा

अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच एक पूर्व सीआईए विश्लेषक ने बेहद चौंकाने वाला दावा किया है। उनके मुताबिक, राष्ट्रपति ट्रंप ने एक आपातकालीन बैठक में ईरान पर परमाणु हमले के लिए न्यूक्लियर कोड्स मांग लिए थे। आखिर उस तूफानी बैठक में क्या हुआ और जनरल ने उन्हें क्यों रोका?

Trump Nuclear Codes

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

मई 15, 2026

Trump Nuclear Codes :  ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे गंभीर सैन्य तनाव के बीच एक ऐसा सनसनीखेज दावा सामने आया है, जिसने वैश्विक कूटनीति और रक्षा गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। अमेरिका की केंद्रीय खुफिया एजेंसी (CIA) के एक पूर्व उच्च स्तरीय विश्लेषक ने दोबारा यह दावा किया है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के खिलाफ परमाणु हथियारों का उपयोग करने के बेहद करीब पहुँच चुके थे। दावे के अनुसार, ट्रंप ने इसके लिए आवश्यक ‘न्यूक्लियर कोड्स’ (Nuclear Codes) तक इस्तेमाल करने की तैयारी कर ली थी। हालांकि, अमेरिकी रक्षा तंत्र के सबसे शक्तिशाली और सर्वोच्च रैंक के सैन्य अधिकारी ने अपनी सूझबूझ से राष्ट्रपति के इस आत्मघाती कदम पर ब्रेक लगा दिया। इस सनसनीखेज खुलासे के बाद सोशल मीडिया से लेकर वाशिंगटन के राजनीतिक हलकों में एक नई और तीखी बहस शुरू हो गई है।

पेंटागन की आपात बैठक का सच: पूर्व CIA विश्लेषक लैरी जॉनसन का बड़ा खुलासा

राष्ट्रीय सुरक्षा मामलों के विशेषज्ञ और पूर्व सीआईए विश्लेषक लैरी जॉनसन ने समाचार एजेंसी एएनआई (ANI) को दिए एक विशेष साक्षात्कार में इस गंभीर घटनाक्रम का सिलसिलेवार ब्योरा साझा किया है। जॉनसन, जो अमेरिकी सुरक्षा नीतियों पर लगातार ब्लॉग और टिप्पणियां लिखते रहते हैं, ने दावा किया कि डोनाल्ड ट्रंप ईरान को पूरी तरह नेस्तनाबूद करने के लिए परमाणु हमले का मन बना चुके थे। लेकिन अमेरिकी सेना के ‘जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ’ के प्रमुख जनरल डैन केन ने राष्ट्रपति के इस फैसले का कड़ा विरोध किया और उन्हें ऐसा करने से रोक दिया। जॉनसन के अनुसार, यह पूरी घटना 18 अप्रैल को पेंटागन में बुलाई गई एक अत्यंत गोपनीय और आपातकालीन बैठक के दौरान घटित हुई थी।

जनरल डैन केन की सूझबूझ: जब सेना प्रमुख ने किया राष्ट्रपति के आदेश का विरोध

लैरी जॉनसन ने इंटरव्यू के दौरान जनरल डैन केन के साहस की सराहना करते हुए कहा, “ट्रंप वास्तव में ईरान संकट को हमेशा के लिए खत्म करने हेतु परमाणु हथियार के विकल्प पर गंभीरता से विचार कर रहे थे। लेकिन हमें जनरल डैन केन की तारीफ करनी होगी, जिन्होंने देश और दुनिया को एक महाविनाश से बचा लिया। उन्होंने सैन्य नियमों का हवाला देते हुए ट्रंप को ऐसा करने से साफ मना कर दिया।” जॉनसन का मानना है कि सेना के इस कड़े रुख के कारण ही ट्रंप को कदम पीछे खींचने पड़े। यही वजह थी कि इस घटना के बाद जब ट्रंप मीडिया के सामने आए, तो उन्होंने अपने बयान बदलते हुए कहा कि अमेरिका कभी भी परमाणु हथियारों के इस्तेमाल पर विचार नहीं कर रहा था।

पॉडकास्ट में पहली बार हुआ था खुलासा: व्हाइट हाउस में मचे घमासान की अंदरूनी कहानी

इस विषय पर प्रकाश डालते हुए जॉनसन ने बताया कि उन्होंने करीब तीन हफ्ते पहले “जजिंग फ्रीडम” नामक एक प्रसिद्ध पॉडकास्ट में पहली बार इस संवेदनशील मुद्दे का जिक्र किया था। उन्होंने पॉडकास्ट में कहा था कि ट्रंप प्रशासन ईरान युद्ध को लेकर अपनी रणनीतिक विफलताओं से बेहद परेशान था और किसी भी तरह इस समस्या का हल चाहता था। जॉनसन ने खुफिया सूत्रों के हवाले से बताया कि 18 अप्रैल की रात व्हाइट हाउस और पेंटागन के बीच सीधा टकराव हुआ था। ट्रंप परमाणु कोड्स जारी करने पर अड़े थे, जबकि जनरल डैन केन ने सेना प्रमुख के रूप में अपने विशेषाधिकारों का उपयोग करते हुए इस आदेश को मानने से इनकार कर दिया। इस बैठक को बेहद गर्मागर्म और तनावपूर्ण टकराव के रूप में वर्णित किया गया है, जिसके बाद जनरल केन काफी चिंतित मुद्रा में बैठक से बाहर निकले थे।

दावे की प्रामाणिकता पर सवाल: क्या वाकई हुई थी पेंटागन में आपातकालीन बैठक?

हालांकि, इस हाई-प्रोफाइल और बेहद संवेदनशील दावे के बीच एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि इसकी आधिकारिक तौर पर कोई पुष्टि नहीं हो सकी है। अमेरिकी रक्षा विभाग (Pentagon) या व्हाइट हाउस की ओर से 18 अप्रैल को किसी भी तरह की आपातकालीन बैठक आयोजित किए जाने का कोई आधिकारिक रिकॉर्ड या बयान जारी नहीं किया गया है। रक्षा विशेषज्ञों का एक वर्ग लैरी जॉनसन के इन दावों को केवल एक राजनीतिक कयासबाजी या खुफिया समुदाय के भीतर की अंदरूनी राजनीति का हिस्सा मान रहा है। जब तक कोई ठोस दस्तावेजी सबूत या आधिकारिक बयान सामने नहीं आता, तब तक इस दावे की सत्यता पर सवालिया निशान बने रहेंगे, लेकिन इसने वैश्विक स्तर पर परमाणु हथियारों के नियंत्रण की बहस को फिर से जिंदा कर दिया है।

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