Trump Popularity Dip: ईरान युद्ध के बीच डोनाल्ड ट्रंप को बड़ा झटका, लोकप्रियता में रिकॉर्ड गिरावट, क्या ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ पड़ेगा भारी?

राष्ट्रपति ट्रंप जहाँ एक ओर ईरान पर विजय का दावा कर रहे हैं, वहीं Reuters/Ipsos के ताज़ा सर्वे ने उनकी चिंता बढ़ा दी है। सर्वे के अनुसार, केवल 36% अमेरिकी उनके काम से संतुष्ट हैं। युद्ध के कारण अमेरिका में गैस (पेट्रोल) की कीमतें 1 डॉलर प्रति गैलन तक बढ़ गई हैं, जिससे उनके अपने 'MAGA' समर्थक भी अब सवाल उठाने लगे हैं।

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

मार्च 25, 2026

Trump Popularity Dip:  ईरान के साथ सैन्य संघर्ष छेड़ना अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए कूटनीतिक से ज्यादा राजनीतिक मोर्चे पर महंगा पड़ता नजर आ रहा है। एक ताजा सर्वेक्षण के नतीजों ने व्हाइट हाउस की नींद उड़ा दी है, क्योंकि राष्ट्रपति की अप्रूवल रेटिंग में ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की गई है। युद्ध के कारण वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आए उछाल और अमेरिका के भीतर बढ़ती महंगाई ने आम नागरिकों के बीच ट्रंप प्रशासन के प्रति असंतोष भर दिया है।

लोकप्रियता के ग्राफ में रिकॉर्ड गिरावट: केवल 36% समर्थन

ताजा ओपिनियन पोल के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप के कामकाज से संतुष्ट अमेरिकियों का आंकड़ा गिरकर अब केवल 36 प्रतिशत रह गया है। चिंताजनक बात यह है कि महज एक सप्ताह पहले उनकी रेटिंग 40 प्रतिशत थी, जिसमें सीधे 4 फीसदी की गिरावट आई है। यह उनके दूसरे कार्यकाल की अब तक की सबसे कम लोकप्रियता रेटिंग मानी जा रही है। सर्वे में शामिल लगभग 62 प्रतिशत लोगों ने ट्रंप के समग्र प्रदर्शन (Overall Performance) को पूरी तरह से नकार दिया है, जो प्रशासन के लिए एक खतरे की घंटी है।

ईरान पर सैन्य कार्रवाई का विरोध: जनता की राय बंटी

अमेरिकी जनता का एक बड़ा हिस्सा तेहरान पर किए गए हमलों को रणनीतिक रूप से सही नहीं मान रहा है। आंकड़ों के मुताबिक, 61 प्रतिशत अमेरिकियों ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई का विरोध किया है, जबकि केवल 35 प्रतिशत लोग ही इस फैसले के समर्थन में दिखे। युद्ध शुरू होने के बाद पेट्रोल और डीजल की कीमतों में जो बेतहाशा वृद्धि हुई है, उसने अमेरिकी परिवारों के मासिक बजट को बिगाड़ दिया है। जनता का मानना है कि विदेशी युद्धों में उलझने के बजाय राष्ट्रपति को घरेलू आर्थिक स्थिरता पर ध्यान देना चाहिए था।

आर्थिक मोर्चे पर विफलता: जो बाइडेन से भी बदतर रेटिंग

डोनाल्ड ट्रंप ने 2024 का चुनाव मुख्य रूप से महंगाई पर नियंत्रण और ‘सस्ती जिंदगी’ (Affordability) के वादे पर जीता था। विडंबना यह है कि वर्तमान युद्ध ने उन्हें इसी मोर्चे पर सबसे अधिक कमजोर कर दिया है। आर्थिक प्रबंधन (Economic Management) के मामले में ट्रंप की रेटिंग लुढ़क कर मात्र 29 प्रतिशत रह गई है। यह स्थिति पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन के कार्यकाल के सबसे खराब दौर से भी बदतर बताई जा रही है। जीवन-यापन के मुद्दे पर तो केवल 25 प्रतिशत अमेरिकियों ने ही ट्रंप की नीतियों पर भरोसा जताया है।

महंगाई और तेल की कीमतें: ट्रंप के लिए सबसे बड़ी चुनौती

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि ईरान के साथ यह संघर्ष लंबा खिंचता है, तो ट्रंप की मुश्किलें और अधिक बढ़ सकती हैं। ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत 47 प्रतिशत लोकप्रियता के साथ की थी, लेकिन युद्ध और महंगाई के दोहरे वार ने इसे तेजी से नीचे खींच लिया है। अमेरिका में गैस स्टेशनों पर बढ़ती कीमतें सीधे तौर पर राष्ट्रपति की छवि को नुकसान पहुँचा रही हैं। मिडिल क्लास वोटर, जो ट्रंप का मुख्य आधार था, अब बढ़ते खर्चों के कारण उनसे दूर छिटकता नजर आ रहा है।

 सत्ता की नींव पर संकट और भविष्य की राह

यह सर्वे ट्रंप प्रशासन के लिए एक स्पष्ट चेतावनी है कि अंतरराष्ट्रीय वर्चस्व की लड़ाई में घरेलू हितों की अनदेखी करना आत्मघाती हो सकता है। यदि ट्रंप को अपनी गिरती साख बचानी है, तो उन्हें युद्ध को जल्द समाप्त कर तेल की कीमतों को स्थिर करने के ठोस उपाय करने होंगे। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या ट्रंप अपनी नीतियों में बदलाव करते हैं या फिर ‘अमेरिका फर्स्ट’ का उनका नारा युद्ध की भेंट चढ़ जाता है।

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