Iran US War 2026 : ट्रंप और PM मोदी की पहली बातचीत, ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ को खोलने पर बनी सहमति

Trump-Modi Update 2026: क्या पीएम मोदी मिडिल ईस्ट में जारी खूनी संघर्ष को रोकने के लिए 'पीस मेकर' की भूमिका निभाएंगे? राष्ट्रपति ट्रंप के फोन कॉल ने पूरी दुनिया का ध्यान खींच लिया है। होर्मुज जलडमरूमध्य को सुरक्षित रखने के लिए भारत और अमेरिका के बीच क्या गुप्त समझौता हुआ है? जानें पूरी इनसाइड स्टोरी!

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

मार्च 24, 2026

Iran US War 2026 : भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने टेलीफोन पर बातचीत कर मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) में जारी युद्ध और इसके वैश्विक परिणामों पर विस्तृत चर्चा की है। 28 फरवरी, 2026 को संघर्ष शुरू होने के बाद से दोनों दिग्गज नेताओं के बीच यह पहली आधिकारिक बातचीत है। भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने इस उच्च-स्तरीय संवाद की पुष्टि करते हुए बताया कि दोनों नेताओं ने न केवल क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने पर जोर दिया, बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित करने की आवश्यकता को भी रेखांकित किया। यह बातचीत ऐसे समय में हुई है जब पूरी दुनिया की नजरें पश्चिम एशिया के बिगड़ते हालातों पर टिकी हैं।

होर्मुज जलडमरूमध्य का महत्व: समुद्री व्यापार मार्ग को खुला रखने की चुनौती

बातचीत का एक प्रमुख केंद्र ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (Strait of Hormuz) रहा, जो फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच स्थित एक अत्यंत महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्ग है। राष्ट्रपति ट्रंप ने पीएम मोदी को अवगत कराया कि उन्होंने ईरान के ऊर्जा ठिकानों पर संभावित हमलों को अगले पांच दिनों के लिए टाल दिया है ताकि कूटनीतिक रास्ते तलाशे जा सकें। अमेरिकी राजदूत के अनुसार, दोनों नेताओं ने इस बात पर सहमति जताई कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार और तेल की आपूर्ति को निर्बाध रखने के लिए इस जलमार्ग का खुला रहना अनिवार्य है। ट्रंप ने पहले ही संकेत दिए हैं कि वे ईरान को दी गई समय सीमा बढ़ाकर तनाव कम करने की कोशिश कर रहे हैं।

जयशंकर और मार्को रूबियो की वार्ता: वैश्विक अर्थव्यवस्था पर संकट के बादल

प्रधानमंत्री स्तर की बातचीत से पहले, भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सोमवार, 23 मार्च 2026 को अपने अमेरिकी समकक्ष मार्को रूबियो से फोन पर संपर्क साधा था। दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था, विशेषकर ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभावों पर चिंता व्यक्त की। जयशंकर ने सोशल मीडिया के माध्यम से जानकारी दी कि भारत और अमेरिका निरंतर संपर्क में रहकर अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल और गैस की कीमतों को स्थिर रखने के लिए सहयोग करेंगे। अमेरिकी विदेश विभाग ने भी इस बात की पुष्टि की है कि दोनों राष्ट्रों के बीच सहयोग की प्रक्रिया जारी रहेगी।

खाड़ी देशों के साथ समन्वय: भारतीय समुदाय और ऊर्जा चिंताओं पर चर्चा

अपनी कूटनीतिक सक्रियता को बढ़ाते हुए, एस जयशंकर ने खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के सदस्य देशों—सऊदी अरब, यूएई, ओमान, कतर, बहरीन और कुवैत के राजदूतों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की। इस बैठक में भारत की ऊर्जा सुरक्षा चिंताओं के साथ-साथ इन देशों में रह रहे लाखों भारतीय प्रवासियों की सुरक्षा पर भी चर्चा हुई। जयशंकर ने संकट की इस घड़ी में भारतीय समुदाय को दिए जा रहे समर्थन के लिए खाड़ी देशों का आभार व्यक्त किया। भारत के लिए खाड़ी क्षेत्र न केवल ऊर्जा का मुख्य स्रोत है, बल्कि वहां बड़ी संख्या में भारतीय कार्यबल भी मौजूद है, जिनकी सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।

तेल की कीमतों में उछाल और भारत का रुख: शांति के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक स्तर पर तेल और गैस की कीमतों में भारी वृद्धि दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि होर्मुज मार्ग अवरुद्ध होता है, तो ऊर्जा संकट गहरा सकता है। इसी संदर्भ में, जयशंकर ने श्रीलंका और जर्मनी के विदेश मंत्रियों से भी चर्चा की है। भारत ने स्पष्ट संदेश दिया है कि वह क्षेत्रीय शांति और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए सभी अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ मिलकर काम करने के लिए प्रतिबद्ध है। भारत का संतुलित दृष्टिकोण इस संकट को संवाद के माध्यम से सुलझाने की वकालत करता है ताकि वैश्विक आर्थिक रिकवरी पर आंच न आए।

Read More: नरसिंहपुर में खौफनाक घटना: खाना बनाते वक्त फटा इंडक्शन, महिला और बच्चे बाल-बाल बचे