Trump to Pakistan? : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में दक्षिण एशिया की कूटनीति एक नया मोड़ लेती दिख रही है। अपने पहले कार्यकाल में पाकिस्तान के प्रति सख्त रुख अपनाने वाले ट्रंप अब उसी देश के कसीदे पढ़ रहे हैं। ईरान और अमेरिका के बीच पिछले सात सप्ताह से जारी तनाव को खत्म करने के लिए पाकिस्तान एक मुख्य मध्यस्थ के रूप में उभरा है। इस बीच ट्रंप ने एक बड़ा बयान देकर सबको चौंका दिया है कि यदि ईरान के साथ शांति समझौता फाइनल होता है, तो वह खुद इस्लामाबाद की यात्रा पर विचार कर सकते हैं। यह बयान न केवल पाकिस्तान के बढ़ते कूटनीतिक कद को दर्शाता है, बल्कि वैश्विक शांति की दिशा में एक बड़ी उम्मीद भी जगाता है।
“वे मुझे पसंद करते हैं”: ट्रंप का पाकिस्तान दौरा संभव
व्हाइट हाउस में पत्रकारों से मुखातिब होते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने पाकिस्तान के साथ अपने संबंधों पर खुलकर बात की। उन्होंने कहा, ‘पाकिस्तान के लोग और वहां के अधिकारी मुझे बेहद पसंद करते हैं। उनके अफसर लगातार यह इच्छा जता रहे हैं कि मैं वहां जाऊं।’ ट्रंप ने स्पष्ट किया कि अगर अमेरिका और ईरान के बीच चल रही जटिल बातचीत का अंतिम पड़ाव इस्लामाबाद बनता है, तो वह वहां जाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। यह बयान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस्लामाबाद की मध्यस्थता की भूमिका को आधिकारिक तौर पर स्वीकार करने जैसा है।
शहबाज शरीफ और जनरल मुनीर की तारीफों के पुल
ट्रंप ने इस दौरान पाकिस्तान के राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व की जमकर सराहना की। उन्होंने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर (जिन्हें ट्रंप ने फील्ड मार्शल कहकर संबोधित किया) को “बेहतरीन” बताया। ट्रंप ने कहा, ‘फील्ड मार्शल बहुत अच्छे हैं और शहबाज शरीफ का काम भी सराहनीय है, इसलिए शायद मैं वहां जाऊं।’ यह बदली हुई भाषा दिखाती है कि ट्रंप प्रशासन अब पाकिस्तान को आतंकवाद के चश्मे से देखने के बजाय एक रणनीतिक साझेदार और शांति दूत के रूप में देख रहा है।
“फ्री होर्मुज और सस्ता तेल”: समझौते के बड़े आर्थिक लाभ
डोनाल्ड ट्रंप केवल शांति की बात नहीं कर रहे, बल्कि वह इस समझौते के पीछे छिपे बड़े आर्थिक फायदों को भी देख रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि ईरान के साथ बातचीत बहुत ही सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है। यदि यह डील फाइनल होती है, तो ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (Hormuz Strait) पूरी तरह से व्यापार के लिए मुक्त हो जाएगा, जिससे तेल की वैश्विक आपूर्ति सुगम होगी। ट्रंप के अनुसार, इस समझौते का सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ेगा और कच्चे तेल की कीमतें पहले की तुलना में काफी कम हो जाएंगी, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी।
जनरल मुनीर का तेहरान दौरा: समझौते की पटकथा तैयार
एक ओर जहां ट्रंप व्हाइट हाउस से बयान दे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर जमीनी स्तर पर कूटनीतिक हलचलें तेज हैं। पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर ने हाल ही में तेहरान का दौरा किया और ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बगेर गालिबफ से मुलाकात की। अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, मुनीर का यह दौरा पूरी तरह से अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता की कड़ी को मजबूत करने के लिए था। पाकिस्तान इस समय दोनों देशों के बीच एक ‘सेतु’ का काम कर रहा है, ताकि सालों से चले आ रहे परमाणु और सैन्य विवादों का कोई स्थायी हल निकाला जा सके।
कूटनीतिक सस्पेंस: क्या सफल होगी दूसरे दौर की वार्ता?
हालांकि पहले दौर की शांति वार्ता में कोई बड़ा परिणाम सामने नहीं आया था, लेकिन दूसरे दौर की बैठकों को लेकर ट्रंप बेहद आशान्वित हैं। उन्होंने संकेत दिया कि अगर बातचीत सही दिशा में चलती रही, तो समझौते की घोषणा जल्द ही की जा सकती है। दुनिया भर के रणनीतिक विशेषज्ञों की नजर अब इस्लामाबाद पर टिकी है। क्या पाकिस्तान वास्तव में वह जमीन बन पाएगा जहां अमेरिका और ईरान के दशकों पुराने दुश्मनी के संबंध खत्म होंगे? अगर ट्रंप इस्लामाबाद जाते हैं, तो यह न केवल पाकिस्तान की बड़ी कूटनीतिक जीत होगी, बल्कि ट्रंप की ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति की एक बड़ी उपलब्धि भी मानी जाएगी।
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