Trump on Zelensky  : ट्रंप ने जेलेंस्की को क्यों दी चेतावनी? रूस के डीजल हमलों पर दिया बड़ा बयान

रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच डोनाल्ड ट्रंप ने जेलेंस्की को रूसी डीजल इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमले रोकने की सलाह दी है। ट्रंप का कहना है कि इन हमलों से डीजल की कमी बढ़ रही है और दुनिया प्रभावित हो रही है। अब सवाल है कि क्या कीव अमेरिकी दबाव के बाद अपनी रणनीति बदलेगा?

Trump on Zelensky

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

सितम्बर 14, 2026

Trump on Zelensky : अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की से रूस में डीजल ईंधन के ठिकानों को निशाना बनाने वाले हमले रोकने की अपील की। ट्रंप ने कहा कि यूक्रेन के लगातार ड्रोन और लंबी दूरी के हमलों की वजह से रूस के कई इलाकों में डीजल ईंधन की कमी की स्थिति बन रही है। उन्होंने यह टिप्पणी आयरलैंड ओपन के अंतिम दिन डूनबेग गांव स्थित अपने गोल्फ क्लब में आयोजित कार्यक्रम के दौरान की।

‘दूसरे ठिकानों को निशाना बनाएं, डीजल को नहीं’

ट्रंप ने कहा कि जेलेंस्की को एक खास बात का ध्यान रखना चाहिए। उनके मुताबिक यूक्रेन रूस में अन्य सैन्य या रणनीतिक ठिकानों पर कार्रवाई कर सकता है, लेकिन डीजल ईंधन के बुनियादी ढांचे को निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए। ट्रंप ने तर्क दिया कि ऐसे हमलों से रूस में ईंधन की उपलब्धता प्रभावित हो रही है और डीजल की कमी बढ़ रही है।

रूस के तेल-गैस उद्योग पर यूक्रेन का दबाव

यूक्रेन पिछले कई महीनों से रूस के तेल और गैस उद्योग से जुड़े ठिकानों पर लंबी दूरी के ड्रोन और मिसाइल हमले कर रहा है। कीव का कहना है कि रूस का ऊर्जा क्षेत्र मॉस्को को यूक्रेन के खिलाफ लंबे समय से जारी युद्ध के लिए आर्थिक संसाधन उपलब्ध कराता है। यूक्रेन का दावा है कि तेल और गैस से होने वाली आय के जरिए रूस अपनी सैन्य गतिविधियों को बनाए रखता है।

ड्रोन हमलों से कई क्षेत्रों में ईंधन राशनिंग

यूक्रेन के लगातार ड्रोन हमलों के अभियान का असर रूस के घरेलू ईंधन बाजार पर भी दिखाई देने लगा है। रूस के कई हिस्सों में डीजल और अन्य ईंधन की राशनिंग जैसी स्थिति पैदा होने की खबरें सामने आई हैं। यह घटनाक्रम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि रूस दुनिया के प्रमुख तेल और गैस उत्पादक एवं निर्यातक देशों में शामिल है। इसके बावजूद घरेलू आपूर्ति पर दबाव बढ़ने से उपभोक्ताओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

ऑनलाइन रिटेल कंपनियां भी बनीं निशाना

यूक्रेन के हमलों का असर केवल रूस के ऊर्जा क्षेत्र तक सीमित नहीं रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक यूक्रेन की ओर से किए गए कुछ अन्य हमलों में रूस की बड़ी ऑनलाइन रिटेल कंपनियों को भी निशाना बनाया गया। इससे युद्ध का प्रभाव आम नागरिकों और रोजमर्रा की आर्थिक गतिविधियों तक पहुंचता दिखाई दे रहा है।

ट्रंप ने फिर दोहराया 5,000 डॉलर देने का दावा

इसी कार्यक्रम के दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने अपने एक पुराने चुनावी वादे को भी दोहराया। उन्होंने कहा कि यदि मध्यावधि चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी प्रतिनिधि सभा और सीनेट दोनों पर अपना नियंत्रण बरकरार रखती है, तो अमेरिका के प्रत्येक वयस्क नागरिक को 5,000 डॉलर दिए जाएंगे। ट्रंप ने दावा किया कि सरकार के पास इस भुगतान के लिए पर्याप्त धन उपलब्ध है।

सरकार के पास बड़ी रकम आने का दावा

ट्रंप ने कहा कि अगर रिपब्लिकन पार्टी चुनाव में जीत हासिल करती है तो उनके द्वारा किए गए वादे को पूरा किया जा सकता है। उन्होंने दावा किया कि सरकार को बड़ी मात्रा में धन प्राप्त हो रहा है और इसलिए 5,000 डॉलर का भुगतान संभालना मुश्किल नहीं होगा। हालांकि, इस प्रस्ताव के वित्तीय और कानूनी पहलुओं को लेकर विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।

जहाजों पर हमलों से कच्चे तेल की कीमतों में उछाल

दूसरी ओर, सऊदी अरब और होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों पर हुए नए हमलों के बाद अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में तेजी देखने को मिली। बाजार खुलने के बाद ब्रेंट क्रूड की कीमत में 3.46 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई और यह 108.23 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। वहीं वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट यानी WTI क्रूड 3.15 प्रतिशत बढ़कर 103.20 डॉलर प्रति बैरल हो गया।

ईरान की नाकेबंदी के बीच अमेरिकी कार्रवाई जारी

ईरान से जुड़े घटनाक्रम के बीच अमेरिकी सेना की कार्रवाई भी जारी है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, गाइडेड-मिसाइल विध्वंसक USS John Paul Jones पर तैनात अमेरिकी नौसैनिकों ने MH-60R Sea Hawk हेलीकॉप्टर के पायलट को संकेत दिया। यह युद्धपोत ईरान के खिलाफ अमेरिकी नाकेबंदी को लागू करने की कार्रवाई में शामिल है।

101 वाणिज्यिक जहाजों का बदला गया मार्ग

अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने बताया कि 13 सितंबर तक अमेरिकी बलों ने नाकेबंदी का पालन सुनिश्चित करने के लिए 101 वाणिज्यिक जहाजों का मार्ग बदल दिया है। ऐसे में रूस-यूक्रेन युद्ध, ईरान से जुड़ा तनाव और समुद्री मार्गों पर हमलों के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार पर दबाव बढ़ता नजर आ रहा है।

Read More  :  UP Election 2027 : BJP या SP, रायबरेली सदर में कौन मारेगा बाजी? जानिए जातीय समीकरण का पूरा गणित