Trump-Netanyahu Meeting : ट्रंप-नेतन्याहू मुलाकात, ईरान पर नहीं बना कोई ठोस समझौता, शांति पहल पर हुई चर्चा

ट्रंप और नेतन्याहू के बीच व्हाइट हाउस में हुई सातवीं मुलाकात ने दुनिया को सस्पेंस में डाल दिया है। तीन घंटे चली इस बैठक में ईरान के मिसाइल प्रोग्राम और गाजा में 'बोर्ड ऑफ पीस' पर चर्चा हुई, लेकिन कोई ठोस समझौता नहीं हो सका। क्या ट्रंप पर्दे के पीछे कोई बड़ा प्लान बना रहे हैं?

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

फ़रवरी 12, 2026

Trump-Netanyahu Meeting 2026: अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच बुधवार को वॉशिंगटन में एक बेहद महत्वपूर्ण मुलाकात हुई। सत्ता में ट्रंप की वापसी के बाद दोनों नेताओं के बीच यह सातवीं बैठक थी, जिस पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी थीं। बंद कमरे में दो घंटे से अधिक समय तक चली इस उच्च स्तरीय चर्चा के बावजूद, ईरान के परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय आक्रामकता को लेकर कोई निर्णायक समझौता नहीं हो सका है। बैठक के बाद जारी बयानों से यह स्पष्ट होता है कि दोनों देश ईरान के मुद्दे पर एक ही पन्ने पर आने की कोशिश तो कर रहे हैं, लेकिन फिलहाल किसी अंतिम नतीजे पर नहीं पहुँचे हैं।

ट्रंप का रुख: बातचीत पहली पसंद, लेकिन विकल्प सभी खुले हैं

मुलाकात के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर अपने विचार साझा किए। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि इस बैठक में कोई पक्का फैसला नहीं लिया गया है, लेकिन उन्होंने ईरान के साथ कूटनीतिक रास्ते खुले रखने की वकालत की है। ट्रंप ने लिखा, “मैंने प्रधानमंत्री नेतन्याहू से कहा है कि ईरान के साथ बातचीत जारी रहनी चाहिए ताकि यह देखा जा सके कि कोई सार्थक समझौता संभव है या नहीं।” उन्होंने आगे कहा कि एक संतोषजनक समझौता उनकी पहली प्राथमिकता है, लेकिन यदि कूटनीति विफल रहती है, तो आगे के कड़े कदमों पर बाद में विचार किया जाएगा।

ईरान पर बड़ी सफलता का अभाव: इजरायल की सुरक्षा चिंताओं का क्या?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना था कि नेतन्याहू इस बैठक का उपयोग ट्रंप को ईरान पर अधिक सख्त रुख अपनाने के लिए राजी करने में करेंगे। इजरायल चाहता है कि ईरान के साथ किसी भी समझौते में केवल परमाणु कार्यक्रम ही नहीं, बल्कि उसकी बैलिस्टिक मिसाइल क्षमताओं और हिजबुल्लाह-हमास जैसे समूहों को मिलने वाले समर्थन पर भी रोक लगाई जाए। नेतन्याहू ने बैठक में इजरायल की सुरक्षा जरूरतों को पुरजोर तरीके से उठाया, लेकिन फिलहाल ऐसे कोई संकेत नहीं मिले हैं कि ट्रंप ने उनकी सभी शर्तों को स्वीकार कर लिया है। इजरायली अधिकारियों को डर है कि अमेरिका केवल परमाणु मुद्दे पर सीमित समझौता कर सकता है, जो इजरायल के लिए पर्याप्त नहीं होगा।

मिसाइल और परमाणु हथियारों पर ट्रंप की दोटूक टिप्पणी

फॉक्स बिजनेस को दिए एक इंटरव्यू में ट्रंप ने अपने इरादे साफ करते हुए कहा कि वे एक ऐसा समझौता चाहते हैं जिसमें ‘नो न्यूक्लियर वेपन्स और नो मिसाइल्स’ की शर्त शामिल हो। ट्रंप ने क्षेत्र में अपनी सैन्य उपस्थिति मजबूत करने के संकेत देते हुए कहा कि वे मध्य पूर्व में एक और एयरक्राफ्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप भेजने पर विचार कर रहे हैं। दूसरी ओर, तेहरान (ईरान) ने पहले ही चेतावनी दी है कि वे अपने मिसाइल कार्यक्रम को किसी भी परमाणु वार्ता का हिस्सा नहीं बनाएंगे। ट्रंप ने ईरान को ‘मिडनाइट हैमर’ जैसे पिछले झटकों की याद दिलाते हुए उम्मीद जताई कि इस बार वे अधिक समझदारी दिखाएंगे।

गाज़ा संघर्ष और ‘बोर्ड ऑफ पीस’ पहल में इजरायल की भागीदारी

ईरान के अलावा, बैठक का एक बड़ा हिस्सा गाज़ा संघर्ष और क्षेत्र के पुनर्निर्माण पर केंद्रित रहा। ट्रंप ने दावा किया कि मध्य पूर्व में शांति बहाली की दिशा में “अद्भुत प्रगति” हो रही है। इस दौरे की एक बड़ी उपलब्धि यह रही कि नेतन्याहू ने ट्रंप की ‘बोर्ड ऑफ पीस’ (Board of Peace) पहल में शामिल होने के दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। अमेरिकी विदेश सचिव मार्को रुबियो से मुलाकात के बाद नेतन्याहू ने इसकी पुष्टि की। हालांकि, गाज़ा में संघर्ष विराम और हमास के निशस्त्रीकरण को लेकर अभी भी कई तकनीकी और कूटनीतिक पेच फंसे हुए हैं, जिससे प्रगति की गति धीमी बनी हुई है।

भविष्य की रणनीति: निकट समन्वय पर बनी सहमति

भले ही इस बैठक से कोई ऐतिहासिक ‘डील’ निकलकर सामने न आई हो, लेकिन दोनों नेताओं ने भविष्य में निरंतर संपर्क और समन्वय बनाए रखने पर सहमति जताई है। नेतन्याहू के कार्यालय ने एक बयान में कहा कि प्रधानमंत्री ने बातचीत के दौरान इजरायल की रेड-लाइन्स को स्पष्ट कर दिया है। ओवल ऑफिस में हुई इस मुलाकात के दौरान मीडिया को दूर रखा गया, जो यह दर्शाता है कि चर्चा काफी संवेदनशील और रणनीतिक थी। अब देखना यह होगा कि ट्रंप की कूटनीति और नेतन्याहू की सुरक्षा चिंताओं के बीच ईरान के मुद्दे पर ऊंट किस करवट बैठता है।

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