Trump Netanyahu Call : ईरान युद्ध पर ट्रंप और नेतन्याहू में तीखी बहस, अमेरिका-इजरायल के बीच आई बड़ी दरार

ईरान के साथ जारी भीषण युद्ध के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच फोन पर बेहद तीखी बहस होने की खबर सामने आई है! इस बातचीत के बाद वाशिंगटन और तेल अवीव के रिश्तों में आई दरार ने पूरी दुनिया को चौंका दिया है। आखिर क्या है इस विवाद की पूरी इनसाइड स्टोरी? जानने के लिए पढ़ें...

Trump Netanyahu Call

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

मई 21, 2026

Trump Netanyahu Call : अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच ईरान के साथ जारी संघर्ष के भविष्य को लेकर हुई एक फोन कॉल के दौरान भारी गरमागरमी की खबर है। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस बेहद अहम बातचीत के दौरान दोनों शीर्ष नेताओं के बीच युद्ध की रणनीति और कूटनीतिक रुख को लेकर गहरे मतभेद खुलकर सामने आए हैं। रिपोर्टों से संकेत मिलते हैं कि जहां एक तरफ अमेरिका इस समय युद्ध को टालने, बातचीत करने और किसी ठोस समझौते पर पहुंचने के पक्ष में दिखाई दे रहा है, वहीं दूसरी तरफ इजरायल का रुख बेहद आक्रामक है और वह ईरान पर फिर से चौतरफा सैन्य हमले शुरू करने की जिद पर अड़ा है।

फोन कॉल के बाद भड़के इजरायली पीएम

अमेरिकी मीडिया आउटलेट ‘एक्सिओस’ ने अपनी रिपोर्ट में सनसनीखेज दावा किया है कि ट्रंप के साथ हुई इस फोन कॉल के बाद इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ‘काफी गुस्से में’ थे। रिपोर्ट के मुताबिक, नेतन्याहू का मानना है कि ईरान की सैन्य क्षमताओं को पूरी तरह कमजोर करने और उसके प्रमुख बुनियादी ढांचे (Infrastructure) को नष्ट करने के लिए फिर से भीषण हमले शुरू करना बेहद जरूरी है, ताकि वहां की सरकार को घुटनों पर लाया जा सके। दूसरी ओर, राष्ट्रपति ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि उन्होंने ईरान पर होने वाले प्रस्तावित हमलों को फिलहाल टाल दिया है। ट्रंप का यह फैसला कतर और यूएई समेत कई प्रभावशाली अरब देशों के विशेष अनुरोध के बाद आया था।

इजरायल की बढ़ती निराशा

‘एक्सिओस’ ने राजनयिक सूत्रों के हवाले से बताया कि कतर और पाकिस्तान ने अन्य क्षेत्रीय मध्यस्थों के साथ मिलकर एक नया ‘शांति प्रस्ताव’ का मसौदा तैयार किया है। इस प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य अमेरिका और ईरान के बीच की कड़वाहट और मतभेदों को कम करना है। हालांकि, इजरायल का शीर्ष नेतृत्व इस बात से बेहद निराश और चिंतित है कि ट्रंप प्रशासन ईरान को ‘कूटनीतिक देरी’ और समय बर्बाद करने की छूट दे रहा है। इजरायल चाहता है कि बिना वक्त गंवाए सैन्य कार्रवाई शुरू की जाए। वहीं, राष्ट्रपति ट्रंप अभी भी मानते हैं कि समझौते की खिड़की खुली हुई है, लेकिन उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि बातचीत विफल रही, तो सैन्य विकल्प दोबारा इस्तेमाल किया जाएगा।

ट्रंप का बड़ा दावा

ईरान संकट के बीच डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा बयान देकर हलचल मचा दी है। ट्रंप ने हाल ही में कहा था कि या तो ईरान समझौते के दस्तावेज पर हस्ताक्षर करेगा या फिर अमेरिका खुद आगे बढ़कर इस पूरे मामले को हमेशा के लिए खत्म कर देगा। उन्होंने साफ किया कि इस समय ईरान के साथ समझौता होना और भीषण जंग छिड़ जाना, दोनों ही संभावनाएं बिल्कुल ‘बॉर्डर’ पर टिकी हैं। इसके साथ ही ट्रंप ने नेतन्याहू पर टिप्पणी करते हुए कहा कि ईरान के मुद्दे पर इजरायली पीएम ‘वही करेंगे जो मैं चाहूंगा’, हालांकि उन्होंने दोनों देशों के बीच मजबूत संबंधों का भी हवाला दिया। उधर, ईरान ने पुष्टि की है कि वह एक संशोधित अमेरिकी प्रस्ताव पर विचार कर रहा है, लेकिन उसने अपने रुख में किसी नरमी के संकेत नहीं दिए हैं।

30 दिनों की बातचीत का नया खाका

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप ने नेतन्याहू को शांत करने के लिए बताया कि अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थ इस समय एक ‘लेटर ऑफ इंटेंट’ (Letter of Intent) तैयार कर रहे हैं, जिस पर अमेरिका और ईरान दोनों के हस्ताक्षर कराने की योजना है। इस दस्तावेज का मुख्य उद्देश्य वर्तमान युद्ध को औपचारिक रूप से रोकना और अगले 30 दिनों के लिए एक सघन शांति वार्ता शुरू करना होगा। इस प्रस्तावित बातचीत के एजेंडे में ईरान का विवादित परमाणु कार्यक्रम और व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को दोबारा सुरक्षित खोलना जैसे बेहद संवेदनशील और अहम मुद्दे शामिल होंगे। कुल मिलाकर, अमेरिका और ईरान के बीच पर्दे के पीछे समझौते की कोशिशें जारी हैं, लेकिन इजरायल के कड़े रुख के कारण तनाव अभी भी चरम पर है।