Trump National Address: मध्य पूर्व में जारी भारी उथल-पुथल और ईरान के साथ बढ़ते सैन्य संघर्ष के बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप आज रात (स्थानीय समयानुसार रात 9 बजे) राष्ट्र को संबोधित करने वाले हैं। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलीन लैविट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर इस बात की पुष्टि की है कि राष्ट्रपति ईरान के संबंध में एक ‘महत्वपूर्ण अपडेट’ साझा करेंगे। यह संबोधन ऐसे समय में हो रहा है जब पूरी दुनिया की नजरें अमेरिका के अगले कदम पर टिकी हैं—क्या ट्रंप युद्धविराम की घोषणा करेंगे या सैन्य कार्रवाई को और अधिक आक्रामक बनाएंगे?
बदलते बयानों के बीच अमेरिकी जनता में असमंजस
ईरान युद्ध को लेकर राष्ट्रपति ट्रंप के हालिया रुख ने न केवल अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों बल्कि खुद अमेरिकी नागरिकों को भी उलझन में डाल दिया है। कभी वे नाटो देशों से सैन्य मदद की अपील करते हैं, तो कभी उसे अनावश्यक बता देते हैं। तेहरान के ऊर्जा ठिकानों पर हमले की धमकी देने के बाद अचानक पीछे हटना उनके प्रशासन की अनिश्चितता को दर्शाता है। प्यू रिसर्च सेंटर के एक ताजा सर्वे के मुताबिक, करीब 61% अमेरिकी नागरिक ईरान के प्रति ट्रंप की वर्तमान नीतियों से असहमति जता रहे हैं, जबकि केवल 37% लोग ही इस सैन्य संघर्ष के पक्ष में खड़े नजर आ रहे हैं।
ईरान से बाहर निकलने के संकेत और ईंधन का संकट
हाल ही में व्हाइट हाउस में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जब ट्रंप से वैश्विक बाजार में ईंधन की आसमान छूती कीमतों पर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने एक चौंकाने वाला संकेत दिया। ट्रंप ने कहा कि उनकी प्राथमिकता अब इस युद्ध से बाहर निकलना है। उन्होंने उम्मीद जताई कि ईरान से अमेरिकी सैनिकों की वापसी की प्रक्रिया बहुत जल्द, शायद कुछ दिनों या अधिकतम दो हफ्तों के भीतर पूरी हो सकती है। हालांकि, हजारों मरीन्स की हालिया तैनाती की खबरें इन दावों के विपरीत एक अलग ही कहानी बयां कर रही हैं।
इजरायल और अमेरिका के बीच उभरता मतभेद
भले ही अमेरिका और इजरायल ने 28 फरवरी को इस साझा सैन्य अभियान की शुरुआत की थी, लेकिन अब दोनों देशों के रुख में स्पष्ट अंतर दिखाई दे रहा है। जहां ट्रंप युद्ध से पीछे हटने की बात कर रहे हैं, वहीं इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने साफ कर दिया है कि उनका अभियान अभी समाप्त नहीं हुआ है। नेतन्याहू का मानना है कि इस सैन्य कार्रवाई ने ईरानी शासन को जड़ों से हिला दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे उस विचारधारा को जड़ से मिटाना चाहते हैं जो “अमेरिका और इजरायल की बर्बादी” के नारे लगाती है।
ईरान की जवाबी चेतावनी और वैश्विक कंपनियों पर खतरा
युद्ध के इस नाजुक मोड़ पर ईरान की शक्तिशाली सैन्य इकाई ‘इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर’ (IRGC) ने एक भीषण चेतावनी जारी की है। ईरान ने घोषणा की है कि यदि 1 अप्रैल के बाद ईरानी क्षेत्र में किसी भी प्रकार की हत्या या हमला होता है, तो वे पश्चिम एशिया में स्थित अमेरिकी और वैश्विक दिग्गज कंपनियों को निशाना बनाएंगे। इस सूची में माइक्रोसॉफ्ट, गूगल, एप्पल, टेस्ला और बोइंग समेत कुल 18 बड़ी कंपनियों के नाम शामिल हैं। ईरान का आरोप है कि ये कंपनियां उसके खिलाफ रची जा रही “आतंकी साजिशों” में तकनीकी और आर्थिक रूप से सहयोग कर रही हैं।
एक निर्णायक मोड़ पर खड़ा मध्य पूर्व
आज रात होने वाला ट्रंप का यह संबोधन संभवतः इस साल की सबसे बड़ी कूटनीतिक घटना साबित हो सकता है। यदि अमेरिका अपनी सेनाएं वापस बुलाने का फैसला करता है, तो इसका सीधा असर इजरायल की सुरक्षा और वैश्विक तेल बाजार पर पड़ेगा। वहीं, यदि ट्रंप ने युद्ध जारी रखने का संकेत दिया, तो ईरान की जवाबी कार्रवाई पूरे क्षेत्र को एक ऐसी तबाही की ओर ले जा सकती है, जिससे उबरने में दशकों लग जाएंगे। दुनिया की सांसें इस समय व्हाइट हाउस से निकलने वाले एक-एक शब्द पर टिकी हुई हैं।
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